शुक्रवार, 19 दिसंबर 2008

पूरे 45 की हो गयी मै ( Astrology )

कहा जाता हैं , महिलाओं को उम्र छुपाने की आदत होती है। जब से होश संभाला, अन्‍यों तरह ही बहुत चाहा, उम्र छुपायी जाए , पर ऐसा हो न सका। केन्‍द्र में स्थित स्‍वक्षेत्री बृहस्‍पति ने झूठ बोलने की कोई उम्‍मीद ही नहीं बनने दी। महत्‍वाकांक्षी मां पापा को अपने पहले संतान को छोटी उम्र में ही बहुत कुछ सिखाने की ललक थी , सो बचपन से स्‍कूल भी नहीं भेजा , खुद बैठाकर छह वर्ष की उम्र तक तीसरी कक्षा तक के हिन्‍दी , गणित , विज्ञान और समाज अध्‍ययन रटवा डाले और छह वर्ष के पूरा होते ही 1970 में चौथी कक्षा में एडमिशन करवा डाला। अब छह साल की बच्‍ची का चौथी कक्षा में एडमिशन हो , तो उम्र तो छुपायी नहीं जा सकती थी। अपने से दो चार वर्ष बडी लडकियों को ही सहेली मानती मै आगे बढती गयी। 1978 में 11वीं बोर्ड की परीक्षा का फार्म भरते वक्‍त भी मैं 14 वर्ष भी पूरे नहीं कर पायी थी। सो उम्र घटाने की इच्‍छा उस समय भी त्‍यागनी ही पडी। अब पूरे विद्यार्थी जीवन मुझे अपनी उम्र कम करने का मौका नहीं मिल पाया। जीवन के दूसरे पडाव में उम्र छुपाने की बात वैवाहिक संबंधो मे की जा सकती थी , क्‍योंकि पढाई पूरी करने के क्रम में उस जमाने के हिसाब से मेरी उम्र अधिक हो ही गयी थी , पर उस समय भी बृहस्‍पति ने ऐसा कोई मौका आने नहीं दिया। मेरे पति मुझसे साढे पांच वर्ष बडे थे। इस स्थिति में मेरी उम्र के बारे में खामख्‍वाह झूठ बोलने की क्‍या जरूरत थी


इसके बाद उम्र बताने का एक मौका उस समय आया , जब मेरी पुस्‍तक छपने को थी । पुस्‍तक के अंत में छापने के लिए प्रकाशक ने मेरा पूरा परिचय मांगा था। नौकरी न करने के कारण सर्टिफिकेटस में लिखे गए उम्र की चर्चा तो कहीं होने से रही , यही सोंचकर मैने बाद में अपनी उम्र छिपाने का निश्‍चय किया। पर यहां भी मुश्किल आनी ही थी , क्‍योकि मात्र 33 वर्ष की उम्र में मेरी पुस्‍तक प्रकाशित होने को थी , वह भी ज्‍योतिष जैसे विषय पर , जो कि अनुभव पर आधारित शास्‍त्र माना जाता रहा है। अब इससे भी उम्र कम कर दूं , तो मेरी पुस्‍तक को आखिर पढेगा कौन ? अब अपनी उम्र कम करके बाजार में पुस्‍तक का महत्‍व तो कम कर नहीं सकती थी , लिहाजा उम्र छुपाने की बात मन में ही दबानी पडी। घर पर बैठे बैठे ज्‍योतिष के सैद्धांतिक ज्ञान से मन भर गया , तो इसके व्‍यावहारिक प्रयोग की चर्चा करने के लिए ब्‍लाग लिखना आरंभ किया। ब्‍लाग लेखन के क्रम में एक बार फिर से अपनी उम्र की चर्चा करने का मौका मिला। पर यहां भी तो मुझे अपने ज्‍योतिषीय अनुभवों की चर्चा करनी है । यह तो दिखाना ही पडेगा कि देखों भई , मैने ये बाल धूप में ही सफेद नहीं किए हैं । इसलिए साफ साफ बतला देने में ही भलाई दिख रही है कि मै पूरे 45 की हो गयी।


मेरे जन्‍मदिन पर मेरा बेटा आज पहली बार मुझसे दूर है , उसकी भावनाएं इन शब्‍दों में मेरे ईमेल के इनबाक्‍स तक पहुंची हैं---------------


Mummy here's wishing you a very very happy and cheerful birthday . Keep smiling as you always do …...



There are you to care for me
There are you to hear to me
There are you with me, I work or play
There are you, I feel, who shows me the right way


There are you to cheer for me
There are you driving the fear in me
There are you cleansing my shades of grey
There are you, I see, whenever I am there to pray


There are you to fly with me
There are you to cry with me
There are you whether I'm near or away
There are you, I know, with me it night or day


There are you to strive with me
There are you to fight with me
MUMMY, its you forever in me to stay
You are my future, my past, my today.......


कृपया अंग्रजी में इस कविता के लिखे जाने पर कोई टिप्‍पणी न करें , क्‍योंकि मैने अपने बेटे से यह वादा करवा लिया है कि वह अगले वर्ष मुझे हिन्‍दी में लिखेगा।

मंगलवार, 16 दिसंबर 2008

ज्‍योतिष को विज्ञान सिद्ध करने के लिए और कितनी कोशिश करूं ? ( Astrology )

लगभग हर पोस्‍ट में मुझे पाठको की एक दो प्रतिक्रियाएं ऐसी अवश्‍य ही मिल जाती हैं कि वे ज्‍योतिष को विज्ञान नहीं मानते , इसलिए मेरे आलेख उनके लिए बकवास के सिवा कुछ नहीं। ज्‍योतिष या ज्‍योतिषियों का जो स्‍वरूप आज समाज में व्‍याप्‍त है , उसे देखते हुए उनका ऐसा कहना बिल्‍कुल स्‍वाभाविक है। किन्‍तु मेरा आग्रह है कि आप गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष पर आधारित मेरे आलेखों को ध्‍यान से पढकर इस विद्या के वैज्ञानिक स्‍वरूप को जानें पहचानें। आज 16 दिसम्‍बर है यानि , का बिल्‍कुल मध्‍य । इस समय के ठंड से बचने के लिए अबतक न जाने कितनी कोशिशें की जाती रही है , पर अभी के मौसम का हाल देखिए, अधिकतम और न्‍यूनतम दोनो में ही । क्‍या आपने पहले सोंचा था कि इस वर्ष ऐसा हो सकता है ? क्‍या मौसम विभाग की तरफ से भी ऐसी कोई सूचना मिली थी ? मेरे ख्‍याल से आपके पास इन दोनों प्रश्‍नों का जवाब ना में ही होगा। अब सोंचिए , सरकार की ओर से करोडों खर्च करने के बावजूद भी जिस मौसम के एक महीनें बाद की भविष्‍यवाणी मौसम वैज्ञानिकों द्वारा नहीं की जा सकी , उसे ग्रहों की स्थिति पर आधारित मात्र 50 या 100 रूपए के एक पंचांग के आधार पर हमने डेढ माह पूर्व ही कर लिया था। 25 दिसम्‍बर तक मौसम के असामान्‍य तौर पर ठंडे न होने की बात की भविष्‍यवाणी को 8 नवम्‍बर को प्रकाशित होनेवाले मेरे इस लेख में पढें।



इसी प्रकार मैने इस आलेख में 23 अक्‍तूबर की शाम को न सिर्फ 24 अक्‍तूबर को शेयर बाजार के सर्वाधिक गिरने की भविष्‍यवाणी ही , वरन सोमवार यानि 27 अक्‍तूबर से फिर से बाजार के सामान्‍य अवस्‍था में आने की भी भविष्‍यवाणी कर दी थी। इस भविष्‍यवाणी के सटीक होने पर ही मुझे कमल शर्मा जी के द्वारा उनकी वेबसाइट पर हर सप्‍ताह शेयर बाजार पर कालम लिखने का निमंत्रण भी मिला। सेंसेक्‍स की उतनी बुरी स्थिति में , जब सारे निवेशक हैरान परेशान थे , मैने मोल तोल पर प्रकाशित अपने कई लेखों में 20 दिसम्‍बर तक इसके सामान्‍य तौर पर बढने की ही भविष्‍यवाणी की और यदि तुलनात्मक ढंग से देखा जाय तो पुन: सेंसेक्‍स की वैसी बुरी हालत नहीं आयी। बिना किसी ठोस आधार के इतने आत्‍मविश्‍वास से कोई भविष्‍यवाणी नहीं की जा सकती है।



2 और 3 जनवरी 2009 को पुन: विभिन्‍न ग्रहों की जो स्थितियां बन रही हैं , वह मौसम को बहुत ही बडे रूप में प्रभावित करेगी , इस योग का प्रभाव इसके दो चार दिनों से एक सप्‍ताह पूर्व से ही शुरू होते देखा जा सकता है। इस योग के कारण निम्‍न बातें देखने को मिल सकती है.....


1. सारा आसमान बादलों से भरा रहेगा।
2. जगह जगह पर कुहरा बनना आरंभ होगा।
3. समुद्री भागों में तूफान आने की संभावना बनेगी।
4. पहाडी क्षेत्रों में बर्फ गिरने से मुश्किलें बढेंगी।
5. मैदानी भागों में तेज हवाएं चलेंगी।
6. बहुत सारे जगहों पर बेमौसम बरसात होने से ठंड का बढना स्‍वाभाविक होगा।
7. यह ठंड बढती हुई 21 जनवरी तक लोगों का जीना मुश्किल करेगी।
8. संभवत: इसी समय के आसपास पारा अपने न्‍यूनतम स्‍तर को स्‍पर्श करेगा।


सभी पाठकों से मेरा विनम्र अनुरोध है कि वे इस समय के मौसम पर गौर करें और ज्‍योतिष को विज्ञान समझने की कोशिश करें। आशा है , आप सबों का सहयोग मुझे अवश्‍य मिलेगा और मुझे लोगों के मन से यह भ्रम हटाने में सफलता मिलेगी कि ज्‍योतिष विज्ञान नहीं है।