बुधवार, 28 जनवरी 2009

गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष ने पाठको का विश्‍वास जीता ( Astrology )

‘ग्रह और व्‍यक्तित्‍व’ लेबल के अंतर्गत लिखे गए बहिर्मुखी , अंतर्मुखी और संतुलित व्‍यक्तित्‍व से संबंधित मेरे तीनो आलेखों में किए गए सर्वे को पढने के बाद ‘गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष’ को पाठको का इतना स्‍नेह मिलेगा, ये मेरी सोंच से परे था। आलेख पढने के बाद लोगो ने जल्‍दबाजी में प्रतिक्रिया न भी दी हो, पर जब उन्‍होने निश्चिंति से सारे डाटा पर गौर किया तो मुझे ईमेल करना नहीं भूले। अधिकांश पाठकों ने एक बात तो स्‍वीकार कर ही ली कि यह बहुत ही रोचक , ज्ञानवर्द्धक , गजब का शोध है और वे लगातार इस तरह के आलेख पढना चाहेगे। कुछ पाठकों को इस बात का आश्‍चर्य भी हुआ कि क्‍या वाकई में तिथियों का प्रभाव इतना पडता है ? एक पाठिका ने तो कहा कि 80 प्रतिशत तक आंकडे सही हैं , पर मै अपने पास आए ईमेल की बात करूं , तो मुझे लगता है कि 90 प्रतिशत तक आंकडे सही हैं।

हां , कुछ लोगों को इस बात का अफसोस अवश्‍य रहा कि उनके और उनके परिवार के अन्‍य लोगों की जन्‍मतिथियां मेरे दिए गए डाटा में नहीं होने से वे कुछ निर्णय नहीं दे पा रहे हैं। वैसे लोगों को मैं यह जानकारी देना चाहूगी कि मेरे ये आलेख पूर्ण तौर पर गाणितिक आधार पर लिखे गए है । मेरे तीनो आलेखों में जो भी तिथियां दी गयी हैं , वहां जन्‍म लेनेवाले लोगों में किशोरावस्‍था में और खासकर 18वें वर्ष में बहिर्मुखी , अंतर्मुखी या संतुलित व्‍यक्तित्‍व अपनी पराकाष्‍ठा पर होता है , साथ ही उसके कुछ दिन आगे और पीछे जन्‍म लेनेवालों में भी ये गुण बडे प्रतिशत में देखा जा सकता है , पर यदि आपकी या आपके परिवार के अन्‍य व्‍यक्ति की जन्‍मतिथि मेरे द्वारा उद्धृत की गयी तिथियों से कुछ दूर भी स्थित हो , यानि एक महीने तक भी , तो भी छोटे प्रतिशत में ही सही , वैसा गुण ही देखने को मिलेगा। इसलिए तीनो ही आलेखों में से आपकी जन्‍मतिथि किस आलेख में दिए गए डाटा के सन्निकट है , इस बात पर गौर करें , यदि आपकी तिथि किन्‍ही दो आलेखों में दिए गए तिथियों के मध्‍य भी हो तो भी आप एक निष्‍कर्ष पर आ ही सकते हें , वह यह कि आपमें दोनो प्रकार के व्‍यक्तित्‍व का सम्मिश्रण है।

कुछ लोगों को इन तिथियो के जाल में अपने को ढूंढना मुश्किल लगा , पर मुझे नहीं लगता कि ऐसा होना चाहिए , हर वर्ष की अलग अलग लाइनें है और अपनी जन्‍मतिथि को ढूंढने के लिए सिर्फ उसी लाइन को देखने की जरूरत है। ताज्‍जुब की बात है कि इतने सारे लोगों में मात्र एक मेल ही मुझे मिला , जिनके दोनो ही बच्‍चो के स्‍वभाव उनकी जन्‍मतिथियों से मैच नहीं कर रहे थे। मैने अपने नियम का अपवाद मानते हुए उनके बच्‍चों के जन्‍म विवरण अपने पास आगे के रिसर्च के लिए रख लिए हैं।

‘गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष’ के इस शोध को और मजबूत बनाने के लिए मैं बाकी पाठकों से भी गुजारिश करूंगी कि वे समय निकालकर इन लेखों को पढें, इनमें सम्मिलित डाटा से अपने, अपने परिवार, अपने मित्रों , परिचितों में जन्‍म लेनेवाले बच्‍चो के व्‍यवहार का मूल्‍यांकण करते हुए अपने मूल्‍यवान विचारों से हमें अवगत कराने की कोशिश करें। 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिषीय अनुसंधान केन्‍द्र' इसके लिए उनका आभारी रहेगा। हां , जिनकी जन्‍मतिथि निश्चित न हों , वे अंदाजा लगाकर गुमराह न हों।