शनिवार, 16 मई 2009

ग्रहीय प्रभाव को क्‍यों सिद्ध नहीं कर पाते हम ?????

पता नहीं , अंग्रेजी माध्‍यम के शिक्षा पद्धति में क्‍यूं माना जाता है कि 4 वर्ष तक के बच्‍चों , जिनकी आई क्‍यू औसत से अधिक हो , को रंगों की पहचान हो जानी चाहिए। के जी 1 में दाखिले के वक्‍त सामान्‍य प्रश्‍नों के अलावा उसकी रंग पहचानने की शक्ति को अवश्‍य देखा जाता है। सचमुच इस उम्र में अधिकांश बच्‍चे रंग को पहचान ही जाते हैं , पर एक बच्‍चे को एक स्‍कूल में नर्सरी में दाखिला करवाना था , इंटरव्‍यू से पहले रंग की पहचान के लिए उसके माता पिता ने बहुत कोशिश की , पर व्‍यर्थ ही रहा। उन्‍होने घर के सामानों और बगीचे के फूलों पत्‍तों को दिखा दिखाकर समझाने की लाख कोशिश की , पर फल कुछ भी न निकला। खिलौनो की सहायता से बच्‍चे किसी बात को जल्‍द सीख जाते हैं , यह सोंचकर अंत में मैने यह जिम्‍मेदारी ली , उसके ढेर सारे खिलौनो को इकट्ठा कर उसके द्वारा रंग के बारे में जानकारी देनी चाही। मैं लाल रंग के एक बाल को उठाकर उससे उसी रंग के एक दूसरे सामान को उठाने को कहती , तो वह पीले रंग का एक बाल उठा लेता। जब एक हरे रंग के झुनझुने को उठाकर वैसे ही रंग का एक सामान उठाने को कहती , तो वह दूसरा झुनझुना उठा लेता । दिन भर कोशिश करने के बाद आखिर तक मैं उसे रंग को समझा न सकी और मेरे हार की वजह थी वह यह कि उसका ध्‍यान खिलौनो के रंग पर न होकर आकार प्रकार और अन्‍य विशेषताओं पर ही रहा।

बच्‍चे के साथ हुई इस घटना से एक बात तो मेरे समझ में आ ही गयी कि किसी बात को समझने के लिए वैसा ही नजरिया रखना पडता है। जहां तक मानव जीवन में ग्रह के प्रभाव के बारे में कहा जाए , यह जातक के सुख , दुख और प्रवृत्ति , इन्‍हीं तीन बातों से संबंध रखता है।इसलिए मानव जीवन में किसी भी क्षेत्र में ग्रहों का गुणात्‍मक प्रभाव ही देखा जा सकता है , परिमाणात्‍मक नहीं। इसलिए ग्रहों के प्रभाव के अध्‍ययन के मूल में हमें इन्‍हीं बातों का ध्‍यान रखना चाहिए। मनुष्‍य एक शरीर के साथ जन्‍म लेता है , उसे सुखी होने के लिए स्‍वास्‍थ्‍य का अच्‍छा होना आवश्‍यक है। ग्रहों का अच्‍छा प्रभाव हो तो वह स्‍वस्‍‍थ होगा अन्‍यथा अस्‍वस्‍थ , पर ज्‍योतिषी मनुष्‍य के रंग रूप , लंबाई चौडाई , वजन आदि में ग्रहों का प्रभाव ढूंढने लगते हैं , उसकी कुंडली में इससे संबंधित योग ढूंढने लगते हें , जिस कारण उन्‍हें आजतक सफलता नहीं मिल पायी है। इस प्रकार पढाई या जीवन के विविध पहलुओं के प्रति उसकी प्रवृत्ति , धारणा , सोंच आदि कैसी है , इसका पता ग्रहों से लग जाता है , पर एक विद्यार्थी क्‍या पढ रहा है , उससे ग्रहों को कोई मतलब नहीं होता । आज मध्‍यमवर्गीय परिवारों के लगभग सारे बच्‍चे इंजीनियरिंग या एम बी ए की पढाई कर रहे हैं , क्‍या आजकल सबों की कुंडली में एक ही योग है ? इसी प्रकार मानव जीवन के विभिन्‍न पहलुओं जैसे धन , भाई , बहन, किसी प्रकार की संपत्ति , घरेलू जीवन , जीवनशैली , पद प्रतिष्‍ठा के माहौल , लाभ , हानि और खर्च आदि से संबंधित सुख , दुख या प्रवृत्ति का पता ही हम ज्‍योतिष के द्वारा कर सकते हैं , क्‍योंकि ग्रह सिर्फ उन्‍ही पर प्रभाव डालते हैं । पर इसे ढूंढने के क्रम में एक ज्‍योतिषी कभी कभी खुद भी गुमराह होते आए हैं और इससे जजमानों को भी गुमराह होना पडता है। जब सही नजरिए के न होने से ही ग्रहीय प्रभाव को समझने के लिए आजतक ज्‍योतिषी भूलभूलैए में भटक रहे हैं , तो ज्‍योतिष को नहीं जाननेवाले भला सही नजरिया कैसे रख पाएंगे ? ग्रहों के सांकेतिक प्रभाव दिखाई पडने के कारण ही इसका अध्‍ययन करनेवाला शास्‍त्र ज्‍योतिष भी सांकेतिक विज्ञान ही माना जा सकता है। इसके बारे में एक पोस्‍टकाफी दिन पहले लिखा था अवश्‍य पढें।

बुधवार, 13 मई 2009

क्‍या 17 - 18 मई के बृहस्‍पति चंद्र युति का विशेष प्रभाव आपपर भी पडेगा ??????

16 से 19 मई 2009 को बृहस्पति ग्रह की सूर्य , पथ्वी और चंद्र से एक खास स्थिति बनेगी। 17 और 18 मई को पूर्वी क्षितिज पर 1 बजे रात्रि के आसपास बृहस्‍पति और चंद्र का लगभग साथ साथ उदय होगा , इसे आसमान में भोर होने तक कभी भी देखा जा सकता है। जहां 3 बजे भोर तक इन्‍हें पूर्वी क्षितिज पर 30 डिग्री उपर देखा जा सकता है , वहीं 5 बजे सुबह 60 डिग्री उपर। वैसे तो इस प्रकार का संयोग हर महीने होता है , पर 'गत्यात्मक ज्योतिष' के हिसाब अर्द्धचंद्र के साथ बननेवाली बृहस्‍पति की यह युति खास है। 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' के अनुसार इस दिन से 19 जून 2009 तक जहां बृहस्पति ग्रह की गत्यात्मक उर्जा में कमी आएगी , वहीं इसकी स्थैतिक उर्जा में दिन प्रतिदिन वृद्धि होती चली जाएगी। 16 मई से 19 जून 2009 तक बृहस्पति ग्रह की यह स्थिति जनसामान्य के सम्मुख विभिन्न प्रकार के कार्य उपस्थित करेगी। इस एक महीनें में लोग बृहस्पति के कारण उत्पन्न होनेवाले कार्य में उलझे रहेंगे। चूंकि बहस्पति धनु और मीन राशि का स्वामी है और अभी उसकी स्थिति कुंभ राशि में है , इसलिए धनु , कुंभ और मीन राशि से संबंधित कार्यों के उपस्थित होने की अधिक संभावना है।

क्‍या आप के परिवार में किसी का जन्‍म निम्‍न समयांतराल में हुआ है ....

सितम्‍बर 1945 से फरवरी 1946, जुलाई 1946 से सितम्‍बर 1946, सितम्‍बर 1957 से फरवरी 1958, जुलाई 1958 , अगस्‍त 1958, अगस्‍त 1969 से फरवरी 1970 , जुलाई 1970 , अगस्‍त 1970, नवम्‍बर 1980 से जनवरी 1981, जुलाई 1981 से नवम्‍बर 1981, नवम्‍बर 1992 से जनवरी 1993, जून 1993 से नवम्‍बर 1993। उपरोक्‍त समयांतराल में जन्‍म लेनेवालों के अलावा कन्‍या राशि वालों के लिए भी अच्‍छा प्रभाव रहेगा।

तो उनके लिए एक खुशखबरी है । उनलोगों के लिए यह व्यस्तता सुख प्रदान करनेवाली होगी। वे उत्साहित होकर कार्य में जुटे रहेंगे। एक महीनें तक कार्य अच्छी तरह होने के पश्चात 19 जून 2009 के बाद किसी न किसी प्रकार के व्यवधान के उपस्थित होने से कार्य की गति कुछ धीमी पड़ जाएगी। 15 अगस्‍त 2009 तक काम लगभग रुका हुआ सा महसूस होगा। उसके बाद ही काम के शुरू किए जाने के लिए आशा की कोई किरण दिखाई दे सकती है। 13 अक्तूबर 2009 के पश्चात बृहस्पति ग्रह में गति आने कें साथ ही स्थगित कार्य पुन: उसी रुप में या बदले हुए रुप में उपस्थित होकर गतिमान होगा और 11 नवम्बर 2009 तक अपने निर्णयात्मक मोड़ पर पहुंच जाएगा। बृहस्पति के कारण होनेवाले इस निर्णय से भी इन लोगों को खुशी होगी।

किन्तु बृहस्पति की इस विशेष स्थिति से कुछ लोगों को कष्‍ट या तकलीफ भी होगी। वे निराशाजनक वातावरण में कार्य करने को बाध्य होंगे। 16 मई तक गंभीरता से काम किए जाने के बावजूद एक महीने यानि 19 जून 2009 के बाद कार्य के असफल होने से उन्हें तनाव का सामना करना पडे़गा। 15 अगस्‍त 2009 तक उनके समक्ष किकर्तब्‍यविमूढावस्‍था की स्थिति बनी रहेगी। 13 अक्तूबर 2009 के पश्चात बृहस्पति में गति आने के साथ-साथ पुन: निराशाजनक वातावरण में वे कार्य को आगे बढ़ाएंगे , कार्य पुन: उसी रुप में या बदले हुए रुप में गतिमान होकर 11 नवम्बर 2009 तक अपने निर्णयात्मक मोड़ पर पहुंच जाएगा। बृहस्पति के कारण होनेवाले इस निर्णय से भी इनलोगों को कष्‍ट पहुंचेगा। ऐसा निम्न समयांतराल में जन्मलेने वाले लोगों के साथ अधिक देखा जा सकता है ----

नवम्‍बर 1931 से मई 1932, दिसम्‍बर 1943 से मई 1944, दिसम्‍बर 1955 से मई 1956, अक्‍तूबर 1966 से दिसम्‍बर 1966, नवम्‍बर 1978 से जनवरी 1979,नवम्‍बर 1990 से अप्रैल 1991,नवम्‍बर 2002 से अप्रैल 2003,उपरोक्‍त समयांतराल में जन्‍म लेनेवालों के अलावा कर्क राशि वालों के लिए भी बुरा प्रभाव रहेगा।

इसके अलावे ज्‍योतिष में सबसे शुभग्रह के रूप में पूजनीय गुरू बृहस्‍पति सामान्‍य लोगों के लिए शुभता ही लाता है , अभी इतनी प्रचंड गर्मी वाले महीने में भारतवर्ष में खुशगवार मौसम का कारण भी बृहस्‍पति चंद्र की यह युति ही मानी जा सकती है , जो 18 मई तक बनी रहनी चाहिए। इसके अलावे गुरू बृहस्‍पति धर्म और ज्ञान से भी जुडा है , इसलिए धार्मिक क्रियाकलाप भी इस एक महीनों में जमकर होते हैं। पर जैसा कि आज के युग में धर्म का रूप भी वीभत्‍स हो गया है , इसलिए युग के अनुरूप ही दो चार वर्षों से बृहस्‍पति चंद्र की इस युति के फलस्‍वरूप यत्र तत्र धार्मिक और सांप्रदायिक माहौल को भडकते हुए भी पाया गया है । आइए ,'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष'के साथ गुरू बृहस्‍पति से प्रार्थना करें कि वे अपने शुभत्‍व को ही बनाए रखें और लोगों के समक्ष कल्‍याणकारी वातावरण ही बनाए रखें।

सोमवार, 11 मई 2009

ग्रह सापेक्ष इस राजनीतिक विश्‍लेषण को भविष्‍यवाणी नहीं , संभावना समझे

जब से मैने ब्‍लाग लिखना शुरू किया है , चुनाव का यह पहला मौका है। यत्र तत्र कुछ आलेखों को पढने के बाद केन्‍द्रीय राजनीति के भविष्‍य को जानने की मेरी जिज्ञासा बनी । जब हर प्रकार का माहौल ग्रहों से संचालित होता है तो भला राजनीति क्‍यों नही ? वैसे तो हमलोग ग्रह सापेक्ष राजनीतिक हालातों का हमेशा ही विश्‍लेषण करते हैं और इस कारण राजनीति में तिथियों के महत्‍व को दिखाते हुए इस सरकार के गठन के बारेएक आलेखपोस्‍ट किया ही जा चुका है कि इस बार सरकार के गठन में बहुत देर होगी। पर चुनाव परिणाम के बाद की राजनीति किस करवट बैठेगी , इस दिशा में अनुमान लगाने के लिए मैने सभी राजनीतिक दलों के 28 नेताओं की कुंडली का सूक्ष्‍म अध्‍ययन मनन किया।

इस तरह की भविष्‍यवाणी में यूं बहुत कठिनाई आती है , किसी राजनीतिक पार्टी की कुंडली पर ‘गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष’ को विश्‍वास नहीं , क्‍योंकि ग्रह का प्रभाव पडने के लिए जिस चेतना की आवश्‍यकता होती है , वह राजनीतिक पार्टियों में नहीं हो सकती। इसलिए उनके नेताओं की कुंडली में हम देश का राजनीतिक भविष्‍य तलाश करते हैं। नेताओं की लग्‍नकुंडली के आधार पर कुछ सटीक भविष्‍यवाणी तो की जा सकती है , पर वो उपलब्‍ध नहीं होने से उनकी जन्‍मतिथि के आधार पर हम चंद्रकुंडली ही बना पाते हैं । लग्‍नकुंडली की तुलना में चंद्रकुंडली बहुत स्‍थूल होता है , इस कारण भविष्‍यवाणी करने में खासी दिक्‍कतें आती हैं , उपर से यदि जन्‍मतिथि गलत हो , तो उससे की जा रही भविष्‍यवाणी के किसी भी दिशा में जाने की पूरी संभावना होती है। इसलिए उस जन्‍मतिथि के सापेक्ष जातक की पूर्व की घटनाओं से मिलान करना पडता है , ताकि भविष्‍यवाणी में सटीकता आ सके और इन सब में अच्‍छा खासा समय जाया होता है।

सबसे पहले मैने भाजपा और उसके सहयोगी दलों के छोटे बडे बहुत सारे नेताओं की जन्‍मकुंडली का अध्‍ययन किया। एक नीतिश कुमार के मजबूत ग्रहों के कारण भाजपा बिहार से कुछ अधिक उम्‍मीद रख सकता है , पर नरेन्‍द्र मोदी सहित भाजपा के अन्‍य वरिष्‍ठ नेताओं जैसे लालकृष्‍ण अडवानी , राजनाथ सिंह , अरूण जेटली , मुरली मनोहर जोशी , जसवंत सिंह ... किसी की कुंडली में मुझे बडी संभावनाएं नहीं दिखीं। इन नेताओं के ग्रहों के अनुकूल न होने से किसी पार्टी के साथ मिल जुल कर सरकार बनाने में इन्‍हें काफी समझौता करना पडेगा , जिसे स्‍वीकारना काफी मुश्किल दिखता है , इस कारण ये लोग विपक्ष में रहना अधिक पसंद करेंगे , बहुत हुआ तो ये किसी पार्टी को सरकार बनाने के लिए अपना समर्थन दे सकते हैं।

गैर बीजेपी और गैर कांग्रेसी नेताओं की बात की जाए, तो जयललिता , चंद्रबाबू नायडू , प्रकाश करात और नवीन पटनायक की राजनीतिक स्थिति में इजाफा होने से सरकार बनाने में इनका महत्‍व बढा हुआ दिखाई पडता है , चाहे वो सरकार में शामिल हों या बाहर से समर्थन दें। पर शरद पव्‍वार और मायावती को अच्‍छे खासे सीटों के हिसाब से अपनी बढी हुई महत्‍वाकांक्षा के अनुरूप सफलता मिलती नहीं दिखाई पड रही है। इस लोकसभा चुनाव में एच डी दैवगोडा , मुलायम सिंह यादव , लालू यादव की स्थिति पहले की तुलना में काफी कमजोर दिखाई पडेगी। इनमें से एक मुलायम सिंह यादव ही अपनी कमजोर स्थिति के बावजूद राजनीतिक रूप से अधिकतम फायदा उठाने में कामयाब हो सकते हैं । उम्‍मीद बहुत कम है , पर संगति के लाभ से शायद लालू यादव को भी थोडा फायदा मिल जाए । एच डी दैवगौडा की स्थिति कमजोर बनी रहेगी। राजनीतिक स्थिति में थोडे सुधार के बावजूद भी रामविलास पासवान की महत्‍वाकांक्षा पूरी न हो सकेगी। ऐसी स्थिति को देखते हुए उपरोक्‍त में से कुछ के सरकार में शामिल होने और कुछ के बाहर से समर्थन देने और कुछ के विपक्ष में बने रहने की बात जंचती है , पर ग्रहीय योग से इनमें से कोई प्रधानमंत्री पद के अनुरूप दिखाई नहीं दे रहा , इसलिए इनके द्वारा सरकार बनाए जाने की उम्‍मीद नहीं दिखती।

काफी दवाब के बावजूद कांग्रेसी नेताओं की जन्‍मकुंडली में अपने सहयोगी दलों के साथ तालमेल करने और सरकार बना पाने की कुछ अधिक संभावनाएं दिखाई पड रही हैं। काफी मशक्‍कत के बाद अंत अंत में सोनिया गांधी थोडी राहत में दिख रही हैं , इससे कुछ उम्‍मीद तो लग रही है। मनमोहन सिंह की अगस्‍त 2008 से शनि की ढैय्या चल रही है, जिसके कारण उसी महीने लेफ्ट ने इससे समर्थन वापस ले लिया था , पर दो तीन ग्रहों के पक्ष में होने से मुलायम सिंह यादव ने साथ दिया और अभी तक कुछ नुकसान तो नहीं हो पाया , इसके बावजूद अब भी मनमोहन सिंह सवर्सम्‍मति से नेता चुने जाएंगे , इसमें शक की कुछ गुंजाइश तो रह ही जाती है । यदि इनकी जगह प्रणव मुखर्जी , शिवराज पाटिल या सुशील कुमार शिंडे का नाम लाया जाता है तो इनलोगों की भी संभावना कम ही दिखाई पड रही है , क्‍योंकि शनि की ढैय्या के साथ साथ इनके अन्‍य ग्रह भी कमजोर दिख रहे हैं। युवराज राहूल गांधी की कुंडली में भी तत्‍काल प्रधानमंत्री बनने की कोई उम्‍मीद नहीं दिखती। सोनिया गांधी के ग्रहीय संभावना होने के बावजूद वे प्रधानमंत्री का पद स्‍वीकार नहीं करेंगी , तो ऐसी स्थिति में वरिष्‍ठ कांग्रेसी नेताओं, जितने की कुंडली का अध्‍ययन मैने किया है , में जो नाम सामने बचा रह जाता है , वह है ए के अंटोनी या पी चिदम्‍बरम। उनके सारे ग्रह अनुकूल हैं और उनके प्रधानमंत्री बनने की संभावना मुझे अधिक दिखती है। इससे एक बात और तय होती है , कि यदि काग्रेस अपने सहयोगी दलों के साथ सरकार बनाती है और ए के अंटोनी या पी चिदम्‍बरम प्रधानमंत्री बनते हैं तो सरकार के स्‍थायित्‍व की भी संभावना अधिक रहेगी।