शनिवार, 16 जनवरी 2010

अपनी प्रकृति के अनुसार काम न कर पाने से आत्‍मविश्‍वास पर बुरा प्रभाव पडता है !!

काफी हद तक जीन का प्रभाव और कुछ हद तक परिस्थितियों का प्रभाव , पर इतने विशाल दुनिया में कोई भी दो बीज एक जैसे नहीं होते । रंग रूप , और बनावट में भिन्‍नता तो हमें स्‍पष्‍टत: दिखाई पडती है , पर वो एक होने पर भी कभी कभी स्‍वभाव तक में अच्‍छी खासी भिन्‍नता देखी जाती है। वास्‍तव मे विचित्रता से भरी इसी दुनिया में सुंदरता , स्‍वाद और व्‍यवहार का भिन्‍न भिन्‍न रूप हमारे सोंचने और समझने की शक्ति को बढाने में सहायक है। इनके वर्णन करने के क्रम में इतने साहित्‍य लिखे गए , पर लेखकों के लिए अभी भी न तो भाव की कमी हुई है और न ही शब्‍दों की और न ही आगे कभी होगी।

जीन की विभिन्‍नता के कारण ही नहीं , परिस्थितियों की विभिन्‍नता के कारण भी हम मनुष्‍य भी एक दूसरे से बिल्‍कुल भिन्‍न हैं। इतिहास की किताबों में हमने जितने महापुरूषों के बारे में पढा है , सबका व्‍यक्त्त्वि बिल्‍कुल भिन्‍न दिखाई पडा होगा , यहां तक कि किसी की किसी से तुलना भी नहीं की जा सकती है। अपने ही परिवार में हमें महसूस होगा कि हर व्‍यक्ति की रूचि , आई क्‍यू बात चीत करने का तरीका सब भिन्‍न है, पर इसे स्‍वीकारने में हमें कठिनाई आती रहती है।क्‍यूंकि हम अपने सामने वाले को एक ढांचे में फिट देखना चाहते हैं , जो कदापि संभव नहीं। इसके बावूजद हम एक दूसरे के दोष निकालते हैं , उसे भला बुरा कहते हैं , अपनी बातें मनवाने को मजबूर करते हैं।

बहुत से परिवार में अनुशासन के आड में बच्‍चों और बहू पर बहुत अंकुश रखा जाता है , यहां तक कि कई जगहों पर पति और पत्‍नी के द्वारा भी  एक दूसरे के साथ बहुत अधिक समायोजन की अपेक्षा रखी जाती है। बच्‍चे अभिभावक के मनमुताबिक कैरियर चुने , यह कहां का इंसाफ है ? पति पत्‍नी शादी विवाह के बंधन में अवश्‍य ही बंध गए हों , पर अपने अपने स्‍वभाव के अनुरूप जीने के लिए वो स्‍वतंत्र हैं , क्‍यूंकि किसी को अधिक खर्च करने की आदत होती है तो किसी को कम , किसी को घमने फिरने , मिलने जुलनेकी आदत होती है तो किसी की महत्‍वाकांक्षा उसके जीवन को व्‍यस्‍त बनाती है। पर कहीं पति इसे स्‍वीकार न करे तो उसे भला बुरा कहा कहा जाता है तो कहीं पत्‍नी को। घर कलह का केन्‍द्र बन जाता है , जिसका प्रभाव बच्‍चों पर बुरा पडता है।

यदि अधिक दिनों तक किसी व्‍यक्ति पर ऐसा दबाब बनाया जाए तो अपनी प्रकृति के अनुसार काम न कर पाने से उसके आत्‍मविश्‍वास पर बुरा प्रभाव पडता है। इसलिए चाहे वो आपका संतान हो , माता पिता हों या पति या फिर पत्‍नी जबतक किसी की जीवनशैली से  उसका या किसी और का बडा नुकसान न हो रहा हो , कोई खास समस्‍या न उपस्थित हो रही हो , उसे अपने मन मुताबिक काम करने से नहीं रोका जाना चाहिए। अपने मनमुताबिक काम करने से व्‍यक्ति सफलता के चरम तक पहुंच सकता है , दूसरों के दिखाए रास्‍ते पर कोई तभी चल सकता है , जब उसकी क्षमता कोई और काम कर पाने की न हो।





शुक्रवार, 15 जनवरी 2010

चार दिनों तक चलती रही हमारी बहस .. संपादन के बाद आपके लिए एक पोस्‍ट तैयार हो गयी !!

11 जनवरी को पोस्‍ट किए गए अपने आलेख में मैने इस सप्‍ताह में पृथ्‍वी पर कई भूकम्‍प के झटके और खासकर 13 जनवरी के 5 बजे से 7 बजे सुबह के मध्‍य एक बडी भूकम्‍प आने की भविष्‍यवाणी की थी। अधिकांश पाठकों ने इस लेख में टिप्‍पणी के रूप में जाल माल की क्षति न होने के लिए ईश्‍वर से प्रार्थना की थी।
डॉ टी एस दराल ने कहा
जी उम्मीद करते हैं की जान माल की कोई हानि न हो।
बाकि तो देखते है क्या होता है।

इसके बाद वंदना जी, रंजू भाटिया, समीरलाल जी, मनोज मिश्रा जी, विनय जी, डॉ रूपचंद्र शास्‍त्री जी, विष्‍णु बैरागी जी, सुरेश शर्मा जी, शिव कुमार मिश्र जी, जाकिर अली रजनीश जी, भारतीय नागरिक जी, और अभिषेक प्रसाद अवि जी ने भी इसी आशय के कमेंट किए। हेम पांडेय जी ने हाथ केगन को आरसी क्‍या की तर्ज पर कमेंट किया।
hem pandey ने कहा
२४ से अड़तालीस घंटों में सब स्पष्ट हो जाएगा. यदि भविष्यवाणी सही हुई तो आपकी विद्या पर विश्वास भी बढ़ेगा.

विष्‍णु बैरागी जी ने एक भाषाई गल्‍ती पर मेरा ध्‍यान भी आकृष्‍ट कराया।
'ईश्‍वरेच्‍छा बलीयसि।कृपया भूकम्‍प को 'उम्‍मीदतो नहीं कहें। वह तो आशंका है।

पर कुछ पाठकों को महसूस हुआ कि मैने प्रतिदिन होनेवाले भूकम्‍प के झटकों को जबरदस्‍ती ग्रहों के प्रभाव से जोडकर अपने ज्ञान को प्रदर्शित कर रही हूं।
हिमाचली ने कहामैंने कल किसी टीवी के टिकर पर पढ़ा था कि कहीं पर भूकंप आया है।और आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि दुनिया में रोज़ कहीं न कहीं भूकंप आता ही है और ये सामान्य भूगर्भीय घटना है..

उनका साथ देने में प्रवीण शाह जी और PD जी भी पीछे नहीं रहें। अभी हर प्रकार की टिप्‍पणी आना रूका भी नहीं था कि बी एस पाबला जी के द्वारा मुझे सूचना मिली कि हैती में भूकम्‍प आ चुका है। PD जी को भी उन्‍होने जबाब दिया।
बी एस पाबला ने कहा
आपकी पोस्ट पर दी गई संभावनाओं को मेरी पोस्ट पर बताए गए विज्ञान ने समर्थन दिया था
ताज़ा भूकम्प 7.2 की तीव्रता का आया हैआ रहा हैआएगा
अधिक जानकारी व लिंक्स मेरी पोस्ट पर
PD की टिप्पणी पर यही प्रतिक्रिया है कि
'मुर्गी एक बार में एक अंडा देती हैसारी दुनिया को पता चल जाता है
मछली एक बार में हजारों अंडे देती हैकिसी को खबर नहीं होतीJ
संगीता जी मौसम और भुकंप के बारे मे आपकी भविश्यबानी हमेशा सही के करीब होती है आज एक बडे भुकम्प की खबर आ रही है शाद हेति मे। धन्यवाद और शुभकामनायें

भूकम्‍प की सूचना से दुखी होने के बावजूद मैने प्रवीण शाह जी से पूछ ही लिया।
संगीता पुरी ने कहा
प्रवीण शाह जी ,
पर आज 13 जनवरी को हैटी में 7.2 रिक्‍टर वाली एक बडी भूकम्‍प आ गयी .. जान माल की भारी क्षति हुई है .. इसे क्‍या कहेंगे आप .. मात्र संयोग या ग्रहों का प्रभाव ??

मुझसे विचारों की भिन्‍नता होने के बावजूद प्रवीण शाह जी हमेशा विनम्रता से पेश आते रहे है।
 प्रवीण शाह ने कहा
आदरणीय संगीता जी मैं किसी भी तरह के पूर्वाग्रह से मुक्त होकर आपके गत्यात्मक ज्योतिष को आंकने का क्षुद्र प्रयास मात्र कर रहा हूँ।
भूकंप के समय और तारीख के बारे में आप काफीकुछ सही रहीं पर स्थान के बारे में आपका अनुमान (180-72)= 108 डिग्री हटकर रहा।
न तो मैं इसे मात्र संयोग कहूंगान ही ग्रहों का
प्रभाव... कुछ भी कहने से पहले मैं आपकी इस तरह की कुछ और भविष्यवाणियों व उनके परिणाम (सच होने) का इंतजार करना अधिक उचित समझूंगा।

महिलाएं हांडी के एक चावल को पका देखकर सारे चावल के पके होने का अनुमान लगाती है , यदि आप पाठकों की तरह ही देर करें , तो नीचे के चावल अवश्‍य जल जाएंगे, जांच पडताल करने की भी कुछ सीमा होती है। इसलिए मैने कहा।
संगीता पुरी ने कहा
प्रवीण शाह जी ,यह पहला मौका नहीं है जब आपने मेरी भविष्‍यवाणी को सही होते पाया है .. आपने मेरी क्रिकेट की हर दिन की भविष्‍यवाणी पढी हैं .. और उसपर गौर करके देखा है .. इसके बाद भी और इंतजार करना चाहते हैं .. तो मुझे क्‍या आपत्ति हो सकती है ??

दिनेशराय द्विवेदी जी तो मेरी खामी दिखाने में एक कदम और आगे रहें। जाकिर अली रजनीश जी ने भी उनसे सह‍मति जतायी।
आप ने 180 डिग्री लोंजीट्यूड पर या उस से 20 डिग्री विचलन पर भूकंप की भविष्यवाणी की थी। लेकिन यह हेती में आया जो कि 72.20 डिग्री पर मौजूद है। इस तरह आप की भविष्यवाणी बहुत भटक गई। यदि यह 20 डिग्री के भीतर होती तो उस इलाके में लोगों को सावधान किया जा सकता है। लेकिन आप की भविष्यवाणी के हिसाब से तो सारी धरती को सावधान हो जाने के लिए तैयार हो जाना चाहिए जो संभव ही नहीं है।

शायद बी एस पाबला जी का जबाब उन्‍हीं के लिए था।
बी एस पाबला ने कहा
गणना में मामूली चूक और बाहरी कारक
कितने ही रॉकेट प्रक्षेपण असफल कर चुकी है,
कितने ही प्रयोग दम तोड़ चुके हैं,
कितने ही मरीज बेहोशी का इंजेक्शन देने के बाद होश में नहीं आ पाए,
कितने ही लोग फांसी चढ़ाए जाने पर रस्सी टूटने पर बच गए
कितने ही लोग ट्रेन के आगे कूद कर आत्महत्या से बच गए,
कितने ही किसान मौसम की वैज्ञानिक सूचना के भरोसे बारिश की राह जोहते अपनी फसल गंवा बैठे,
कितने ही तेज धावक पीछे रह गए।
अगली बार और सटीक गणना की उम्मीदआपसे

पर पाबला जी के जबाब मिलने तक द्विवेदी जी को दिया जाने वाला मेरा जबाब तैयार हो चुका था और वही जबाब उनका साथ देने वाले जाकिर जी के लिए भी था।
संगीता पुरी ने कहा
दिनेशराय द्विवेदी जी,
टिप्‍प्‍णी के लिए धन्‍यवाद .. इससे थोडा दुख तो अवश्‍य हुआ .. पर अपनी सहन शक्ति के लिए ईश्‍वर को धन्‍यवाद देती हूं .. आपने कोई नई बात नहीं कही है .. मैं इसी बात से परेशान हूं कि इतने वर्षों से इस क्षेत्र में समर्पित होने के बावजूद मेरे ज्ञान से समाज के सारे लोगों का भला नहीं हो पा रहा .. पर इसके लिए ग्रहों के पृथ्‍वी पर पडने वाले प्रभाव के महत्‍व को सबों को स्‍वीकारना होगा .. यदि मैं अपनी गणना से वर्ष के 365 दिनों मे से एक दिन पर आ जाती हूं .. 24 घंटों में से किसी दो घंटों पर आ जाती हूं .. तो स्‍थान की मेरी कमजोरी को भूगर्भ विज्ञान वाले तो हल कर सकते थे .. जिससे कुछ फायदा तो अवश्‍य हो सकता था .. अन्‍य विकसित विज्ञानों से ज्‍योतिष का तालमेल बनाकर कई घटनाएं टाली भी जा सकती थी .. या आने वाले दिनों में मै खुद भी इसे हल कर लूं .. ऐसा आपको शुभकामनाएं देनी चाहिए थी .. पर आपने उस संभावना की चर्चा न कर सीधा कह दिया कि मेरे ज्ञान से समाज का कुछ भी भला नहीं हो सकता .. जबकि प्रतिदिन मेरे ज्ञान से दो चार लोगों का भला हो रहा है.. और मेरा लक्ष्‍य लाखों का भला करना है !!

फिर भी जाकिर अली रजनीश जी के नाम भी कुछ लाइनें लिखी ही गयीं
संगीता पुरी ने कहा
वाह रजनीश जी,
आजतक आप चिल्‍लाते रहें कि ग्रहों के आधार पर भविष्‍यवाणियां सही हो ही नहीं सकती .. बरसात की तिथियुक्‍त भविष्‍यवाणियों को भी स्‍वीकार करने से आप कतराते रहें .. पर आज जब काटने की कोई जगह नहीं दिखी .. तो आप कह रहे हैं कि ऐसी भविष्‍यवाणियों का क्‍या औचित्‍य है .. दिनेश रॉय द्विवेदी जी के साथ ही रहें .. कोई आपत्ति नहीं मुझे .. पर उनको जो जबाब मैने दिए है .. उसे आप अपना जबाब समझिए !!

भले ही मैने इस पोस्‍ट पर मिली सभी प्रतिक्रियाओं का जबाब दे दिया हो , पर अपनी भविष्‍यवाणी के सटीक होने के बावजूद भी मैंने दुखी होकर इस पोस्‍ट को प्रेषित किया। सबसे पहली टिप्‍पणी गिरिजेश राव जी की मिली।
 गिरिजेश राव ने कहा
संगीता जीहिन्दी ब्लॉगिंग में किसी की निष्ठा से यदि वाकई प्रभावित हुआ हूँ तो वह आप हैं। लेकिन जाने क्यों आप को झुठलाने को मन करता है।
भविष्य की बातें वर्तमान में पता चल जाँयइसमें आप को कुछ बहुत प्रकृति विरुद्ध और काल विरुद्ध सा नहीं लगता?
आप की भविष्यवाणी का सही होना तुक्का भी तो हो सकता है।
यहाँ देश हजारों वर्षों तक दुर्गति भोगता रहा और कई मायनों में आज भी ऐसा ही है - क्या ज्योतिष के पास इसका कोई उत्तर/समाधान हैवे कौन से पुण्य कर्म हैं जिनके कारण यूरोपअमेरिका आदि देश सम्पन्न और कहीं अत्युत्तम जीवन क्वॉलिटी से नवाजे गए हैं?
यूरोप ने शोषण के बल पर अपने को सँवारा। दो दो विश्वयुद्धों को झेलाफिर भी आज कितना आगे है!भारत या समूचे दक्षिण एशिया की ऐसी दुर्गति क्यों हैइस बारे में गत्यात्मक ज्योतिष क्या कहता है?बहुत से सवाल मन में आते हैं। आप का यह ज्योतिष और इसके मानने वाले सचमुच बड़ी सोच में डाल देते हैं।क्या करें?

मेरी मानसिक हालत उनके एक गलत शब्‍द तुक्‍का को भी बर्दाश्‍त न कर सकने की थी , मैने उन्‍हें दो टूक जबाब सुना दी, जिसका बाद में मुझे अफसोस भी हुआ।
संगीता पुरी ने कहा
गिरिजेश राव जी .. आप पाठकों की ऐसी बातें सुनने के लिए मैं तैयार रहती हूं .. जो ज्‍योतिष की ए बी सी डी की जानकारी के बिना ही पी एच डी स्‍तर के ज्ञान की तलाश में रहते हें .. तिथि के साथ भूकम्‍प की सूचना के बावजूद इसे तुक्‍का कहने में आपको थोडी भी हिचकिचाहट नहीं हुई .. आप मेरे ब्‍लॉग के नियमित पाठक होते तो शायद ऐसा नहीं कहते .. क्‍यूंकि यह मेरी पहली भविष्‍यवाणी नहीं है .. आप सब ज्‍योतिष विरोधी मिलकर 'भविष्‍यवाणियों का तुक्‍कानाम का एक ब्‍लॉग चलाएं .. और प्रतिदिन मौसम राजनीति से लेकर भूकम्‍प तक की तिथियुक्‍त भविष्‍यवाणी करें .. मैं भी तो थोडी सीख लूं .. जब यूं ही काम बन जाए तो इतना अध्‍ययन करने की क्‍या आवश्‍यकता ??
गिरिजेश राव ने कहा
बाप रे! आप तो एक शब्द पर ही नाराज हो गईं। 'तुक्काकी जगह 'संयोगलिखना था। शायद आप इतनी नाराज नहीं होतीं। आप को कष्ट पहुँचा इसके लिए क्षमाप्रार्थी हूँ।
ज्योतिष की ए.बी.सी.डी. और पी.एच.डी. की तो बात ही नहीं है। आप के लेख पढ़ता अवश्य हूँ लेकिन नियमित नहीं हूँइसे स्वीकारता हूँ।
मेरे प्रश्नों को सहज रूप में लें जो कि एक निष्ठावान अध्येता से हैं। अभी भी अनुत्तरित हैं। बहुत बार प्रश्न विधा के क्षेत्र में नहीं आते तब भी पूछने वाले पूछ बैठते हैं। यदि वाकई ये प्रश्न गत्यात्मक ज्योतिष की परिधि से बाहर हैं तो बता दीजिए।
यदि उसकी परिधि में हैं तो बताइए कि क्या कारण हो सकते हैं जो अरबों की जनसंख्या और इतना बड़ा और रिच भूभाग इस दशा में है?

डॉ टी एस दलाल जी के साथ ही साथ कई पाठकों ने मेरी भविष्‍यवाणी का सच होना स्‍वीकारा।
डॉ टी एस दराल ने कहा
संगीता जीमैंने आपकी भविष्यवाणी वाली पोस्ट भी पढ़ी थी और आज की भी।
सच तो यह है की मैं भी इंतज़ार में था की देखें क्या होता है।
लेकिन इसमें कोई शक नहीं की आपकी भविष्यवाणी सही निकली।
हालाँकि ये बड़ा दुखद समाचार हैऔर आपको मुबारकवाद भी नहीं दे सकते। अब तो यही कह सकते हैं की ज्योतिष इससे बचने का उपाय भी खोज निकाले तो सही मायने में सार्थक कहलायेगा।
Anil Pusadkar ने कहा
संगीता जी मैं भूविज्ञान का विद्यार्थी रहा हूं और भूकंप जैसे विषय आज भी जटील ही हैं।इस पर तमाम शोध और अध्ययन के बाद भी बहुत कुछ अंधेरे मे ही है।इसके बावजूद आपकी भविष्यवाणी का खरा उतरना आपके ज्ञान को प्रमाणित करता है और जंहा तक़ मेरा सवाल है मैं आपका पहले से प्रशंसक हूं।मुझे भी लगता है कि अपने जीवन की अनिश्चतता के बारे मे आपसे सलाह लेनी ही पड़ेगी।

'अदा' ने कहा
संगीता जी,
ये आपदाएं तो आनी हीं थी.... लेकिन आपकी भविष्यवाणी को सुनकर उनके असर से बचा जा सकता है....ठीक वैसे ही जैसे कड़ी धूप में छतरी लगा कर छाया की जा सकती है....
विश्वास तो मुझे हमेशा ही आपकी बातों पर रहा है...आज उस विश्वास में और बढ़ोत्तरी हुई है...ऐसे ही कल्याण किया करें...
Mithilesh dubey ने कहा
आप जो करती है वह प्रशंसनिय है अच्छे कामों में अक्सर रुकावटें आती है ।
संगीता पुरी ने कहा
गिरिजेश राव जी,
मेरे ब्‍लॉग में मानव मस्तिष्‍क में उठने वाले बहुत सारे प्रश्‍नों के उत्‍तर दिए गए हैं .. सारे को पढने के बाद ही उससे आगे बढा जा सकता है .. आपके अन्‍य प्रश्‍नों के जबाब भी धीरे धीरे मिलते चले जाएंगे .. ज्‍योतिष तो बहुत छोटी चीज है .. आपके प्रश्‍न आध्‍यात्‍म के अंदर आते हैं .. आध्‍यात्‍म के ज्ञान की सीमा नहीं .. इतना आसानी से कैसे समझ पाएंगे आप ??
प्रवीण शाह ने कहा
आदरणीय संगीता जी,
आपकी यह पोस्ट अभी अभी देखीआज के दिन यह बहुत जरूरी है कि आपकी भविष्यवाणी और उसके परिणाम को एक सही नजरिये से देखा जायेअत: आपकी पिछली पोस्ट पर की गई टिप्पणी को फिर से एक बार यहां पर दोहरा रहा हूँ।

समीर लाल जी मेरी मानसिक अवस्‍था का अनुमान करने में सफल रहें,विष्‍णु बैरागी जी और आचार्य संजिव सलिल जी भी ।
Udan Tashtari ने कहा
ऐसी गणनाओं और भविष्यवाणियों के बाद आप किस मानसिक अवस्था से गुजरती होंगीसमझा जा सकता है.
यह सचमुच त्रासद विडम्‍बना ही है कि अपनी भविष्‍यवाणी के सच होने पर मन दुखी हो।
आपकी भविष्यवाणी और मनोव्यथा दोनों ही से मेरा सरोकार है. सटीक भविष्यवाणी हेतु आप साधुवाद की पात्र हैं. कोइ चिकित्सक रोगी के भयानक रोग को पहचान ले तो उसे सफल ही माना जाता है.
भविष्यवाणी सटीक हो तो अनुमान करता के ज्ञान और विशी दोनों पर शंका नहीं की जानी चाहिए. भारतीय दर्शन 'विश्वासम फलदायकममें विश्वास करता है, 'श्रद्धावान लभते ज्ञानंभी यही सन्देश देता है. पश्चिन का दर्शन संदेहवाद से प्रारंभ होता है...देकार्त कहता है प्रश्न करो...आप की विधि पे भरोसा न करनेवाले संदेहवाद के विद्यार्थी हैं. मैं विश्वास को जीता हूँ.
अब दूअसरे पहलू की बात...मेरे गुरु प्रो. विनय कुमार श्रीवास्तव भूगर्भविद हैं... वे गत कई सालों से भूकम्पों के स्थल का अनुमान लगा परे हैं पर तिथि नहीं बता पाते... भूगर्भ शास्त्री और ज्यतिशी एक साथ अध्ययन करें तो शायद अधिक सटीक पूर्वानुमान हो सके.

प्रवीण शाह जी को मैने समझाया कि किस प्रकार स्‍थान के चुनाव में खामि रह जाती है।
संगीता पुरी ने कहा
प्रवीण शाह जी,
आप आराम से मेरी अगली भविष्‍यवाणियों का इंतजार करें .. वास्‍तव में हमारे अध्‍ययन के अनुसार भूकम्‍प के तिथि की सूचना जितनी पक्‍की होगी .. उतनी समय और स्‍थान की नहीं भी हो सकती है .. इसे मैने अपने पिछले आलेख में भी स्‍वीकारा है .. क्‍यूंकि पूरे ब्रह्मांड में पृथ्‍वी एक विंदू मात्र होती है .. और गणित ज्‍योतिष का काफी सूक्ष्‍म डाटा हमारे पास नहीं होता .. यदि गणित ज्‍योतिष के कोई विद्वान हमारी मदद करें तो भविष्‍यवाणी के स्‍तर में और बढोत्‍तरी लायी जा सकती है !!
आदरणीय संगीता जीअब आप मेरे शब्दों को भले ही जिस रूप में लें लेकिन यह कहूंगा की यदि ज्योतिष शास्त्र किसी आपदा की भविष्य बानी के साथ उसके घटने के स्थान के बारे में जानकारी दे पाने में असमर्थ है तो मैं तो भगवान् से यह प्रार्थना करूंगा कि आइन्दा आपकी इस तरह की कोई भी भविष्य बाणी सही न निकले ! :)
संगीता पुरी ने कहा
गोदियाल जी .. आपकी बातों का मैं कोई दूसरा अर्थ नहीं लगा रही .. पर मेरी भविष्‍यवाणी के कारण यह भूकम्‍प आया .. ऐसी बात नहीं है .. भूकम्‍प को आना था .. ग्रहों की चाल से मैने उसे पहले समझ लिया .. हो सकता है कि कुछ दिनों के अध्‍ययन के बाद स्‍थान का भी मुझे संकेत मिल जाए .. एक ही दिन में किसी विज्ञान का विकास नहीं हो जाता .. युगों युगों तक सकारात्‍मक रूप से लाखों करोडों लोगों को मदद करनी पडती है इसमें .. पहले इसमें विश्‍वास तो करना होगा .. उसके बाद ही तो दुनिया को आपत्ति से बचाया जा सकता है .. एक व्‍यक्ति से कितनी अपेक्षा कर सकते हैं आपलोग ??
Ashish ने कहा
संगीता जी
मुझे लगता है इस अर्जित ज्ञान को यदि आप अपने सॉफ्टवेर में समा कर उसे ओपन सौर्स रिलीज़ करें तो आप अपने लक्ष्य को जल्द प्राप्त कर सकेंगी।
निर्झर'नीर ने कहा
मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामना।जैसे ही भूकंप की जानकारी हुई आपकी याद तजा हो गयी ..आपने सच कहा था अफसोश है जो चले गए

धीरू सिंह जी ने ज्‍योतिष को विज्ञान बताया। पर आपलोगों को यह जानकारी देना चाहूंगी कि हमारा परंपरागत ज्‍योतिष आज के युग तक आते हुए बहुत सारी खामियों का शिकार हो गया है और इससे सटीक भविष्‍यवाणी नहीं की जा सकती। गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिषीय अनुसंधान केन्‍द्र द्वारा ग्रहों की गत्‍यात्‍मक और स्‍थैतिक शक्ति की खोज के बाद ही इसे विज्ञान का रूप दिया जा सका है।
ज्योतिष पर विश्वास है मुझे . यह एक सांइस है .लेकिन भारतीय विधा होने के कारण कई पढे लिखे स्वीकार नही करते . अगर विदेशी कोई यह सब कहता तो उसकी प्रंशसा होती . जैसे योग जब से योगा बना तब से स्वीकार्य हो रहा है





सतीश पंचम ने कहा…



मैं तो ज्योतिष पर बिल्कुल विश्वास नहीं करता, लेकिन किसी सर्वव्यापी ईश्वर पर जरूर कुछ हद तक विश्वास करता हूँ कि उसके चलाये ही यह संसार रच बस रहा है, बन बिगड रहा है....अब वह सर्वोच्च सत्ता मानव जनित कर्म के रूप मैं है या दैवीय या फिर इन दोनों का ही मिश्रण..... नहीं पता।
बस विश्वास है, तभी मंदिर में विभिन्न आकार प्रकार में तराश कर रखे प्रस्तरों में भी ईश्वर को जान नमन कर लेता हूँ.....लेकिन किसी भी ज्योतिष वगैरह पर विश्वास नहीं कर पाता।
शायद अर्ध-कम्यून हूँ मैं।


डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर ने कहा…



हालांकि हम ज्योतिष पर विश्वास नहीं करते पर इस बात को थोडा बहुत स्वीकारते हैं कि प्रथ्वी पर ग्रहों नक्षत्रों का प्रभाव पड़ता है.
बचपने से पाठ्य पुस्तकों में एक बात पड़ने को मिली कि समुद्र में आते ज्वार भाटे चाँद सूरज पृथ्वी की स्थिति से आते हैं..................बस यही बहुत है कहने को.
सिद्धार्थ शंकर जी ने इसकी उपयोगिता पर प्रकाश डालने को कहा है , मैने तो पहले ही लिखा है कि एक घडी , कैलेण्‍डर , टार्च की तरह ही गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष आपके लिए उपयोगी हो सकता है।
भविष्य देखना भी जी का जंजाल है। यदि सबकुछ पूर्व निर्धारित और अपरिहार्य ही है तो उसके बारे में पहले से जानकर हम अपना मस्तिष्क कुछ पहले से ही दुखी कर ले रहे हैं।
यह ज्ञान हमारे लिए कितना लाभकर है इसपर भी प्रकाश डाला जाय।
संगीता पुरी ने कहा
सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी जी .. क्‍या भवितब्‍यता टाली जा सकती है .. इसकी दस कडियां लिख चुकी हूं .. इसमें इस बात पर प्रकाश डाला जा चुका है!!

जी के अवधिया जी के द्वारा पूछे गये छोटे से प्रश्‍न को भी मैं बर्दाश्‍त नहीं कर सकी।
जी.के. अवधिया ने कहा
संगीता जी,
बस एक प्रश्न पूछना चाहता हूँ कि आपकी भविष्यवाणी से क्या लाभ हुआ?
संगीता पुरी ने कहा
जी के अवधिया जी .. आप इस प्रकार के प्रश्‍न कर मुझे और व्‍यथित करने की कोशिश कर रहे हैं अब कोई मरीज डॉक्‍टर पर विश्‍वास ही न करे .. तो डॉक्‍टर क्‍या कर सकता है .. वैज्ञानिक यदि हमारी मदद लें तो अवश्‍य मेरे अनुभव का फायदा दुनिया को मिल सकता है
संगीता जी ,
हेती की घटना का समाचार सुनकर अत्यंत दुःख हुआ ।
ज्योतिष शास्त्र भविष्य की गर्त मैं झाकने की एक विधा है । भविष्य आने वाली परेशानियों और प्राकृतिक आपदा को रोका तो नहीं जा सकता है, हाँ पर इनसे बचाव हेतु समय पूर्व आवश्यक कदम और सुरक्षात्मक उपाय तो किये जा सकते हैं जिससे जनहानि और धनहानि को कम तो किया जा सकता है ।
ज्योतिष विज्ञानं के माध्यम से सटीक और सही जानकारी प्राप्त कर उसका समाज हित और जनहित मैं प्रयोग हो यही कामना है ।
जी.के. अवधिया ने कहा
संगीता जी,
यदि आप समझती हैं कि मैं आपको व्यथित करने की कोशिश कर रहा हूँ तो आप बिल्कुल गलत समझ रही हैंन तो मेरी कोई ऐसी मंशा थीन है और न ही रहेगी। आपको व्यथित करके भला मेरा क्या लाभ होगा?
मैं तो सिर्फ यही कहना चाहता हूँ कि ज्ञान है तो उसका लाभ भी मिलना चाहिये। ऐसे ज्ञान का क्या फायदा जिससे लाभ तो मिले ही नहीं उलटे तनाव मिले?
मैं तो सीधे प्रश्न का सीधा सा उत्तर चाहता हूँ। सीधा सा प्रश्न था मेरा जिसका किसी डॉक्टर और मरीज से किसी प्रकार का सम्बन्ध नहीं था।
अभी तक तो विज्ञान ज्योतिष को मानता नहीं है तो वैज्ञानिक आपसे क्यों मदद लेने आयेंगेहाँ यदि आप ज्योतिष की एक सशक्त पहचान बना दें तो आपसे मदद माँगने वाले स्वयं ही आ जायेंगे।
संगीता पुरी ने कहा
आप मेरी भावनाओं को नहीं समझ पा रहे हैं .. सब कुछ जानते हुए कितनी अकेली पड जाती हूं मैं .. यही बात आपको समझाना चाह रही थी .. डेढ वर्ष हो गए ब्‍लॉग जगत में ही .. ज्‍योतिष को पहचान दिलाने के लिए कितनी बार हर तरह की तिथियुक्‍त भविष्‍यवाणियां की हैं .. पर न तो मेरी वाहवाही करने से दुनिया का भला हो सकता है .. और न मेरी शिकायत करने से ही .. भला तो मात्र 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिषको पहचान दिलाने से हो सकता है .. जो लाख कोशिश के बाद भी नहीं बन पा रहा है !!
Vineet Tomar ने कहा
संगीताजीआपकी कहन में दम हे और अगर आपके पास इसका ज्ञान हे तो बहुत अच्छा,आप इसी तरह लेख लिखे ,और समाज को अवगत कराते रहें,जिसको आपकी लेखनी में जरा भी विश्वाश होगा वो आपको जरुर पढेगा ,इसके लिए आप परेशान न हों,क्यूँकी जिनको विरोध करना या आपको गलत बताना हें तो बताना हें इस में कोइ कुछ नहीं कर सकता. आप बस इतना करे अगर ठीक लगे तो के अपनी बात स्पस्ट न लिख केर थोड़ा गुमा केर लिख दे तो शायद समझदार समझ जाएगा और किसी को कहने को समय लगेगा. में आपके लेख रो पढता हूँ क्यूँकी मेरी ईमेल पर आ जाते हें.इसी तरह जो भी पढेगा वो देखेगा . अगर कुछ गलत लगा हो तो उस के लिए आप मुझे माफ़ कर दे,. में आपका आभारी हूँ आप अच्छा लिखती हे इसलिए. धन्यवाद 
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राजीव जी ने मेरी टिप्‍पणी को ध्‍यान से पढा और बडा अच्‍छा प्रश्‍न किया है। उनके प्रश्‍न का जबाब मैं अगले किसी आलेख में दूंगी।
ई-गुरु राजीव ने कहापर न तो मेरी वाहवाही करने से दुनिया का भला हो सकता है .. और न मेरी शिकायत करने से ही .. भला तो मात्र 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिषको पहचान दिलाने से हो सकता है .. जो लाख कोशिश के बाद भी नहीं बन पा रहा है !! ]
इस वाक्यों का क्या अर्थ है !!
संगीता जीमैं आपके लिए क्या कर सकता हूँ ?
मेरा मतलब है कि एक हिन्दू या भारतीय या ज्योतिष-प्रेमी या आपका प्रशंसक होने के नाते आपके लिए (ज्योतिष के लिए) हम पाठक-गणों को क्या करनाचाहिए.

पाठकों ने यह भी कहा कि मेरी भविष्‍यवाणी के कारण भूकम्‍प नहीं आया, भविष्‍यवाणी सही होने पर ग्रहों के प्रभाव की पुष्टि हुई है।
ई-गुरु राजीव ने कहा
किसी का भी आपको या ज्योतिष को दोष देना अनुचित है.
यह तो ग्रहों की स्थिति के कारण से ऐसा हुआ.
अतःआपका या किसी का ऐसा सोचना कि काश यह भविष्यवाणी सच नहीं हुई होतीठीक नहीं है.
प्रत्येक भविष्यवाणी सत्य होनी ही चाहिए इससे ही ज्योतिषी और ज्योतिष का सम्मान बढेगा.
पुनः आपको आपकी भविष्यवाणी के लिए नमन करता हूँ.
कमल शर्मा ने कहा
आपने लिखा कि काश मेरी भविष्‍यवाणी सही नहीं हुई होती...लेकिन जो तय है उसे कौन टाल सकता है। होनी तो होकर ही रहेगी...कुछ ऐसे परिणामों के लिए मनुष्‍य भी जिम्‍मेदार है जिसने पूरी प्रकृति के साथ खिलावड़ किया है और कर रहे हैं। वैसे भी जो बना है उसका विनाश भी तय है। हम इस विनाश पर आंसू भरी श्रंद्धाजलि के अलावा कुछ नहीं दे सकते।

एक बेनामी ने बिल्‍कुल अलग तरह की टिप्‍पणी की है।
खुला सांड ने कहासंगीताजी !!! आप के गृह अच्छे नहीं लग रहे !!! कहीं वैज्ञानिक लोग आपका अपहरण ना कर लें!! पहले ही आपकी एक भविष्य वाणी सच हो चुकी है!!! आप हीट लिस्ट में हैं!!!

उन्‍हें मालूम नहीं कि वैज्ञानिकों को जिस दिन ग्रहों के प्रभाव के बारे में जानकारी हो जाएगी , वो आराम से हमारे साथ काम करेंगे, हमारा अपहरण करने की क्‍या आवश्‍यकता ??