मंगलवार, 6 अप्रैल 2010

पूरे महीने दिलो दिमाग में दुर्घटनाओं का खौफ छाया रहा !!

पिछले आलेख में मैने बताया कि इस बार की दिल्‍ली यात्रा मेरे लिए बहुत ही सुखद रही, पर पूरे महीने दिलो दिमाग में दुर्घटनाओं का खौफ छाया रहा। 5 मई को बोकारो से प्रस्‍थान की तैयारी में व्‍यस्‍त 4 मई को मिली एक भयावह दुर्घटना की खबर ने मन मे जो भय बनाया , वह पूरे महीने दूर न हो सका। 25 मई को बेटे के बंगलौर से दिल्‍ली प्रस्‍थान करने से पहले मंगलौर में हुई विमान दुर्घटना और बोकारो आने से पूर्व स्‍टेशन में हुई भगदड से हुई मौत और बोकारो पहुंचने से पहले ज्ञानेश्‍वरी ट्रेन हादसे की खबर यह अहसास दिलाने में समर्थ हो गयी कि यात्रा के दौरान हम भाग्‍य और भगवान के भरोसे ही सुरक्षित हैं।

यात्रा के दौरान खासकर लौटते वक्‍त कहीं कहीं परिस्थितियां गडबड बनीं , पर ईश्‍वर की कृपा है कि उसका कोई दुष्‍परिणाम देखने को नहीं मिला। 29 मई को पुरूषोत्‍तम एक्‍सप्रेस से बोकारो लौटना था , ट्रेन की टाइमिंग थी .. 10 :20 रात्रि , चूंकि हम तीन मां बेटे पूरे सामान के साथ थे , इसलिए दो ऑटो वाले को  8 बजे रात्रि को आने को कहा गया था। आठ की जगह साढे आठ बज गए , पर ऑटो नहीं आया। हमने तुरंत दो रिक्‍शे से नांगलोई के लिए प्रस्‍थान किया। रात के नौ बजे हम नांगलोई से चले , ऑटो वाले से बार बार पूछते हुए कि दस बजे तक हमलोग पहुंच पाएंगे या नहीं ? 'यदि कहीं पर जाम न हो तो पहुंच जाएंगे , पर इस वक्‍त जाम रहती है' , ऑटोवाले का जबाब सुनकर हमलोग परेशान हो जाते थे , पर रास्‍ते में जाम क्‍या , कहीं लाल बत्‍ती भी नहीं मिली और हम पौने दस बजे स्‍टेशन पहुच चुके थे।

बिल्‍कुल शांत दिमाग से पूछ ताछ कर हम उस प्‍लेटफार्म पर उस स्‍थान पर पहुंचे , जहां पुरूषोत्‍तम की वह बोगी आने वाली थी , जिससे हमें जाना था । पर ट्रेन तो देर से आयी ही , बोगियां भी सूचना के विपरीत लगी हुई थी । अब प्‍लेटफार्म पर अफरातफरी का माहौल बन गया , इधर के यात्री उधर और उधर के यात्री इधर जाते दिखाई दे रहे थे। ट्रेन यदि देर से न खुलती , तो यहां भी एक दुर्घटना के होने की संभावना थी , पर सबों के आराम से बैठने के बाद ही ट्रेन खुली , जिससे राहत मिली। पर सुबह उठते ही ज्ञानेश्‍वरी ट्रेन हादसे की खबर मिली , जिससे पुन: एक बार मन:स्थिति पर बुरा प्रभाव पडा।

शाम 5 बजे के बाद बोकारो से काफी निकट गोमो स्‍टेशन से ट्रेन के चलने के बाद घर पहुंचने की खुशी में बडा खलल उस वक्‍त पहुंचा , जब हमें यह मालूम हुआ कि ज्ञानेश्‍वरी हादसे के बाद सुरक्षा कारणों से ट्रेन बोकारो से नहीं , वरन् दूसरे रास्‍ते से बंगाल की दिशा में चल चुकी है। गोमो में हो रहे इस एनाउंसमेंट के वक्‍त हमारा ध्‍यान बेटे के ए आई ट्रिपल ई के रिजल्‍ट की ओर था , जिसकी सूचना हमें तुरंत मिली थी। एनाउंसमेंट न सुन पाने के कारण आयी इस विकट परिस्थिति से लगभग आधे घंटे हम सब हैरान परेशान रहे , पर खैरियत थी कि एक छोटे से स्‍टेशन 'मोहदा' में गाडी रूकी , दो मिनट के इस स्‍टॉपेज में गाडी रूकने का अंदाजा होने से हम अपने सामान के साथ गेट पर तैयार ही थे , इसलिए हमने सारा सामान जल्‍दी जल्‍दी उतार लिया। वहां से हम बाहर आए , एक टैक्‍सी ली और पौने सात बजे हम बोकारो में थे। इस तरह इस यात्रा के दौरान कुछ कुछ असमान्‍य घटनाएं होती रहीं , पर कुशल मंगल अपने घर पहुंच गयी।

पूरे महीने दिलो दिमाग में दुर्घटनाओं का खौफ छाया रहा !!

पिछले आलेख में मैने बताया कि इस बार की दिल्‍ली यात्रा मेरे लिए बहुत ही सुखद रही, पर पूरे महीने दिलो दिमाग में दुर्घटनाओं का खौफ छाया रहा। 5 मई को बोकारो से प्रस्‍थान की तैयारी में व्‍यस्‍त 4 मई को मिली एक भयावह दुर्घटना की खबर ने मन मे जो भय बनाया , वह पूरे महीने दूर न हो सका। 25 मई को बेटे के बंगलौर से दिल्‍ली प्रस्‍थान करने से पहले मंगलौर में हुई विमान दुर्घटना और बोकारो आने से पूर्व स्‍टेशन में हुई भगदड से हुई मौत और बोकारो पहुंचने से पहले ज्ञानेश्‍वरी ट्रेन हादसे की खबर यह अहसास दिलाने में समर्थ हो गयी कि यात्रा के दौरान हम भाग्‍य और भगवान के भरोसे ही सुरक्षित हैं।

यात्रा के दौरान खासकर लौटते वक्‍त कहीं कहीं परिस्थितियां गडबड बनीं , पर ईश्‍वर की कृपा है कि उसका कोई दुष्‍परिणाम देखने को नहीं मिला। 29 मई को पुरूषोत्‍तम एक्‍सप्रेस से बोकारो लौटना था , ट्रेन की टाइमिंग थी .. 10 :20 रात्रि , चूंकि हम तीन मां बेटे पूरे सामान के साथ थे , इसलिए दो ऑटो वाले को  8 बजे रात्रि को आने को कहा गया था। आठ की जगह साढे आठ बज गए , पर ऑटो नहीं आया। हमने तुरंत दो रिक्‍शे से नांगलोई के लिए प्रस्‍थान किया। रात के नौ बजे हम नांगलोई से चले , ऑटो वाले से बार बार पूछते हुए कि दस बजे तक हमलोग पहुंच पाएंगे या नहीं ? 'यदि कहीं पर जाम न हो तो पहुंच जाएंगे , पर इस वक्‍त जाम रहती है' , ऑटोवाले का जबाब सुनकर हमलोग परेशान हो जाते थे , पर रास्‍ते में जाम क्‍या , कहीं लाल बत्‍ती भी नहीं मिली और हम पौने दस बजे स्‍टेशन पहुच चुके थे।

बिल्‍कुल शांत दिमाग से पूछ ताछ कर हम उस प्‍लेटफार्म पर उस स्‍थान पर पहुंचे , जहां पुरूषोत्‍तम की वह बोगी आने वाली थी , जिससे हमें जाना था । पर ट्रेन तो देर से आयी ही , बोगियां भी सूचना के विपरीत लगी हुई थी । अब प्‍लेटफार्म पर अफरातफरी का माहौल बन गया , इधर के यात्री उधर और उधर के यात्री इधर जाते दिखाई दे रहे थे। ट्रेन यदि देर से न खुलती , तो यहां भी एक दुर्घटना के होने की संभावना थी , पर सबों के आराम से बैठने के बाद ही ट्रेन खुली , जिससे राहत मिली। पर सुबह उठते ही ज्ञानेश्‍वरी ट्रेन हादसे की खबर मिली , जिससे पुन: एक बार मन:स्थिति पर बुरा प्रभाव पडा।

शाम 5 बजे के बाद बोकारो से काफी निकट गोमो स्‍टेशन से ट्रेन के चलने के बाद घर पहुंचने की खुशी में बडा खलल उस वक्‍त पहुंचा , जब हमें यह मालूम हुआ कि ज्ञानेश्‍वरी हादसे के बाद सुरक्षा कारणों से ट्रेन बोकारो से नहीं , वरन् दूसरे रास्‍ते से बंगाल की दिशा में चल चुकी है। गोमो में हो रहे इस एनाउंसमेंट के वक्‍त हमारा ध्‍यान बेटे के ए आई ट्रिपल ई के रिजल्‍ट की ओर था , जिसकी सूचना हमें तुरंत मिली थी। एनाउंसमेंट न सुन पाने के कारण आयी इस विकट परिस्थिति से लगभग आधे घंटे हम सब हैरान परेशान रहे , पर खैरियत थी कि एक छोटे से स्‍टेशन 'मोहदा' में गाडी रूकी , दो मिनट के इस स्‍टॉपेज में गाडी रूकने का अंदाजा होने से हम अपने सामान के साथ गेट पर तैयार ही थे , इसलिए हमने सारा सामान जल्‍दी जल्‍दी उतार लिया। वहां से हम बाहर आए , एक टैक्‍सी ली और पौने सात बजे हम बोकारो में थे। इस तरह इस यात्रा के दौरान कुछ कुछ असमान्‍य घटनाएं होती रहीं , पर कुशल मंगल अपने घर पहुंच गयी।

सोमवार, 5 अप्रैल 2010

आसमान में बुध ग्रह की एक खास चाल .. क्‍या आप भी इससे प्रभावित हो रहे हैं ??

29 मार्च से ही आसमान में मेष राशि में बुध ग्रह का काफी समय तक रहना पृथ्‍वी के जड चेतन पर बहुत प्रभाव डालने में समर्थ है। चूंकि ज्‍योतिष में बुध ग्रह बुद्धि , ज्ञान का ग्रह माना जाता है , इसलिए यह विद्यार्थियों और बौद्धिक श्रम करनेवाले लोगों को अधिक प्रभावित करेगा। इस कारण बुद्धिजीवी ब्‍लॉगर भाइयों को प्रभावित करने में भी इसकी कम भूमिका नहीं होगी। इसकी यह स्थिति 29 मई तक बनीं रहेगी , जिसके कारण लोगों का उलझाव खास कार्यों में बना रहेगा। वैसे 18 अप्रैल से 12 मई तक का समय इनके कार्यक्रम में थोडी सुस्‍ती लानेवाला होगा। वैसे तो अधिकांश लोगों पर इसका अच्‍छा ही प्रभाव देखा जाएगा , पर कुछ विद्यार्थी , जिनकी  जन्‍मकुंडली में बुध ग्रह कमजोर होकर स्थित है ,और इसके कारण वे विद्यार्थी जीवन में मनोनुकूल वातावरण का अभाव पा रहे हैं , की समस्‍या इस वक्‍त थोडी और गहरा सकती है। इसी समय बोर्ड की परीक्षाओं के रिजल्‍ट भी निकलने हैं , जिसें इस ग्रहस्थिति की बडी भूमिका बनी रह सकती है। ऐसे विद्यार्थियों , जिनका जन्‍म निम्‍न तिथियों में हुआ है , अपने किसी कार्यक्रम में बाधा महसूस कर सकते हैं या फिर परीक्षा परिणामों को मनोनुकूल नहीं पा सकते हैं .... 

  • 1987 में 24 फरवरी से 11 मार्च , 26 जून से 12 जुलाई , 22 अक्‍तूबर से 3 नवम्‍बर , 
  • 1988 में 7 फरवरी से 21 फरवरी , 6 जून से 22 जून, 4 अक्‍तूबर से 17 अक्‍तूबर, 
  • 1989 में 21 जनवरी से 3 फरवरी , 18 मई से 2 जून , 17 सितंबर से 1 अक्‍तूबर, 
  • 1990 में 6 जनवरी से 17 जनवरी , 28 अप्रैल से 14 मई , 31 अगस्‍त से 15 सितंबर , 20 दिसंबर से 31 दिसंबर, 
  • 1991 में 10 अप्रैल से 25 अप्रैल , 13 अगस्‍त से 29 अगस्‍त , 4 दिसंबर से 9 दिसंबर ,
  • 1992 में 22 मार्च से 6 अप्रैल , 25 जुलाई से 10 अगस्‍त , 16 नवंबर से 28 नवंबर, 
  • 1993 में 6 मार्च से 20 मार्च , 7 जुलाई से 23 जुलाई , 1 नवंबर से 12 नवंबर, 
  • 1994 में 16 फरवरी से 2 मार्च , 18 जून से 4 जुलाई , 14 अक्‍तूबर से 27 अक्‍तूबर , 
  • 1995 में 31 जनवरी से 13 फरवरी , 29 मई से 14 जून , 27 सितंबर से 11 अक्‍तूबर, 
  • 1996 में 15 जनवरी से 27 जनवरी , 9 मई से 25 मई , 9 सितंबर से 21 सितंबर, 
  • 1997 में 1 जनवरी से 10 जनवरी , 20 अप्रैल से 6 मई , 23 अगस्‍त से 6 सितंबर, 13 दिसंबर से 24 दिसंबर,   

विद्वार्थियों के अलावे अन्‍य लोगों पर भी बुध ग्रह का अच्‍छा या बुरा प्रभाव पडता है। कुछ लोगों के लिए यह ग्रह स्थिति विशेष तौर पर फलदायक भी हो सकती है। किसी संयोग के काम करने से वे किसी महत्‍वपूर्ण कार्यक्रम से जुड सकते हैं । किसी भी वर्ष नवम्‍बर और दिसंबर में जन्‍म लेनेवालों के लिए खासकर 1926 , 1932 , 1939 , 1945 , 1952 , 1959 , 1965 , 1972 , 197 , 1985 , 1992 , 1998 , 2004 के नवम्‍बर और दिसंबर में जन्‍म लेनेवाले इन दिनों में किसी मामले में मनोनुकूल माहौल में रहेंगे। इसके साथ ही वृश्चिक राशि में जन्‍म लेनेवालों के लिए भी बुध ग्रह की यह स्थिति किसी संदर्भ में मनोनुकूल होगी।

पर कुछ लोगों के लिए  यह ग्रह स्थिति विशेष तौर पर कष्‍टदायक भी हो सकती है। किसी दुर्योग से उनका जीवन बाधित हो सकता है। किसी भी वर्ष सितंबर अक्‍तूबर में जन्‍म लेनेवालों खासकर 1929 , 1936 , 1942 , 1949 , 1956 , 1962 , 1969 , 1975 , 1982 , 1988 , 1995 , 2002 और 2008 के सिंतंबर अक्‍तूबर में जन्‍म लेने वालों के समक्ष इन दिनों में किसी मामले में मनोनुकूल स्थिति का अभाव हो सकता है। इसके साथ ही कन्‍या राशि में जन्‍म लेनेवालों के लिए भी बुध ग्रह की यह स्थिति किसी संदर्भ में परेशानी उपस्थि‍त कर सकती है।

गोचर के आधार पर यह बिल्‍कुल अस्‍थायी तौर पर आनेवाला ग्रहयोग है और कोई अच्‍छा या बुरा बडा निर्णय तभी होगा , जब आपकी जन्‍मकुंडली के हिसाब से स्‍थायी तौर पर कोई बडी सफलता या असफलता इस समय मिलनी होगी। पर यदि जन्‍मकुंडली के हिसाब से आपका कोई बडा अच्‍छा या बुरा योग न हो , तो इस ग्रहयोग के कारण अधिक परेशान होने की आवश्‍यकता नहीं। इन दो महीनों के व्‍यतीत हाते ही सारी समस्‍या समाप्‍त हो जाएगी।