रविवार, 25 जुलाई 2010

यदि आप भविष्‍य को अनिश्चित देखना चाहते हैं .....

ज्‍योतिष के पक्ष्‍ा और विपक्ष में तर्कों की कमी नहीं , पर किसी का यह तर्क देना कि हम भविष्‍य को अनिश्चित ही देखना चाहते हैं , इसलिए ज्‍योतिष के अध्‍ययन की कोई आवश्‍यकता नहीं , सबसे बेकार का तर्क है। यदि आप भविष्‍य को अनिश्चित देखना चाहते हैं  ......

तो फिर दिशाओं का ज्ञान क्‍यूं आवश्‍यक है ??
तो फिर आप कलाई में घडी क्‍यूं लगाते हैं ??
तो फिर आप कैलेण्‍डर का उपयोग क्‍यूं करते हैं ??
तो आप भविष्‍यनिधि में जमा क्‍यूं करते हैं ??
आप विभिन्‍न योजनाओं में निवेश क्‍यूं करते हैं ??
मौसम विज्ञान का विभाग क्‍यूं स्‍थापित किया गया है ??
जीवन में एक स्‍थायी नौकरी या व्‍यवसाय की चाहत क्‍यूं रखते हैं ??
तो आप यात्रा करने से पहले रेलवे की टाइम टेबल क्‍यूं देखते हैं ??
बच्‍चे के उज्‍जवल भविष्‍य के लिए इतनी माथापच्‍ची क्‍यूं करते हैं ??

ये सब आप अपने समय का सदुपयोग कर उससे अधिक से अधिक फायदा उठाने के लिए करते हैं। सच तो यह है कि अस्‍सी प्रतिशत लोगों के पास आज की आवश्‍यकता के लिए सबकुछ होता है, पर वे भविष्‍य के लिए ही मेहनत करते हैं , वे भविष्‍य की अनिश्चितता को लेकर ही परेशान रहते हैं। इसी कारण भविष्‍य को मजबूत कर पाने के लिए मनुष्‍य का प्रयास लगातार जारी है। प्रकृति के हर रहस्‍य की जानकारी से हम कोई कार्य करते वक्‍त भविष्‍य के प्रति आश्‍वस्‍त हो जाते हैं।


जहां बीते हुए इतिहास को जानने के लिए इतने प्रयास किए जा रहे हों तथा आनेवाले भविष्‍य के लिए लोग इतने प्रयत्‍नशील हों , भविष्‍य जानने की कोई विधा को नकारने का कोई औचित्‍य नहीं लगता। यदि भविष्‍य की चिंता न करे , तो मनुष्‍य भी पशु के समान हो जाए। वैसे ज्‍योतिष सिर्फ संकेतों का विज्ञान है और उसके अध्‍ययन से कई रहस्‍यों से पर्दा अवश्‍य उठ सकता है , पर फिर भी भविष्‍य अनिश्चित ही रहेगा , उसे जान पाने के लिए जिस तपस्‍या की आवश्‍यकता है , आज वो संभव नहीं !!