शुक्रवार, 1 अक्तूबर 2010

श्री श्रद्धानंद पांडेय जी के द्वारा रचित श्रीहनुमान कृपाष्‍टक

इस वर्ष के शुरूआत में ही हमारे पडोसी श्री श्रद्धानंद पांडेय जी के द्वारा रचित श्रीहनुमान पचासा आपलोगों को पढवा चुकी हूं। उनके द्वारा लिखा गया श्रीहनुमान कृपाष्‍टक का आज आनंद लें .....

बुद्धि शरीर निरोग रहे , प्रभु पूजन में न करें कृपणाई।
पावन भाव बसे उर में , जग दे सियाराम स्‍वरूप दिखाई।।
कान सुने रघुनाथ कथा , हरि का गुणगान सदा सुखदाई।
हे हनुमान कृपा करिये मन में सिय साथ रहे रघुराई।।

जीभ कभी न कहे अपशब्‍द , चखे रसना हीरनाम मिठाई।
हाथ करे प्रभु का पदपूजन , दान परिश्रम दीन भलाई।।
नित्‍य चले पग मंदिर में , शुभ धाम फिरे न करे कठिनाई।
हे हनुमान कृपा करिये , मन में सिय साथ रहे रघुराई।।

काम कदापि न क्‍लेश करे , रमणी गण में झलके निज माई।
क्रोध तजे प्रतिशोध सभी , उर वास करे समता करूणाई।।
लोभ न चाह करे धन या यश , मोह मिटे बिनसे कुटिलाई।
हे हनुमान कृपा करिये मन में , सिय साथ रहे रघुराई।।

जीवन में न रहे त्रयताप , विवेक रहे उर शीतलताई।
हो न अभाव कभी धन का , गृह गोरस अन्‍न रहे बहुलाई।।
दूर रहे सब भूत पिशाच , फले सुख संपत्ति की अमराई।
हे हनुमान कृपा करिये मन में , सिय साथ रहे रघुराई।।

विश्‍व लगे परिवार , लगे सबलोग सुता जनननी सुत भाई।
भेद घृणा लवलेश न हो , उर में सब जीव करे समताई।।
मानव मानव एक लगें , मिट जाए विभेदक मोह बुराई।
हे हनुमान कृपा करिये मन में , सिय साथ रहे रघुराई।।

पा नर देह कभी न करूं , मनसा वचसा तन से अघमाई।
राघव के पद पंकज में , मनभृंग रहे तज चंचलताई।।
मानस स्‍वच्‍छ रहे मलहीन , मिटे अभिमान तथा अघकाई।
हे हनुमान कृपा करिये मन में , सिय साथ रहे रघुराई।।

याद रहे चपला सम यौवन , जीवन की क्षणभंगुरताई।
पुत्र-कलत्र-धरा-गृह-संपत्ति , साथ तजे पद-मान-बडाई।।
याद रहे अगले पथ में , बस साधन धर्म अधर्म कमाई।
हे हनुमान कृपा करिये मन में , सिय साथ रहे रघुराई।।

प्राण प्रयाण करें तब , शोक विषाद न हो मन में दुखदाई।
'राम' रटे रसना प्रतिभाषित हो , सियनायक की प्रभुताई।।
पुत्र रखे मुख में तुलसीदल , कान पडे हरिनाम सुनाई।
हे हनुमान कृपा करिये मन में , सिय साथ रहे रघुराई।।

                              *दोहा*
श्रद्धानंद कृपा करें , पवनपुत्र गुणधाम।
अभिलाषाएं पूर्ण हों , रहे हृदय सियाराम।।

बुधवार, 29 सितंबर 2010

हैती के बाद नवंबर 2010 के मध्‍य में एक और बडे भूकम्‍प की आशंका

मेरे पुराने पाठकों में से सबों को 11 जनवरी का एक आलेख याद ही होगा , जिसमें मैने 16 जनवरी को एक बडे भूकम्‍प के आने की आशंका जतायी थी , इसपर बहुत पाठकों ने सोंचा था कि मैं प्रतिदिन आनेवाली भूकम्‍प की घटना को ग्रहों का प्रभाव सिद्ध करने की बेमतलब कोशिश कर रही हूं,पर इसी दिन हैती में आए भूकम्‍प ने मेरा साथ देकर ग्रहों के पृथ्‍वी पर पडनेवाले प्रभाव को साबित कर दिया था। 200 साल के सबसे भयंकर भूकंप में कैरेबियाई देश हैती में हजारों लोग मलबे के नीचे दब गए थे। भूकंप में हैती का राष्ट्रपति भवन भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। संयुक्त राष्ट्र के पीसकीपर का हेड क्वार्टर, नेशनल पैलेस(राष्ट्रपति भवन ), एक अस्पताल और कुछ महत्वपूर्ण बिल्डिंग इस भूकंप में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुई थी। 

दो तीन वर्षों के ब्‍लॉग लेखन में मौसम को लेकर मैं तो अक्‍सर भविष्‍यवाणियां करती रहती हूं , पर भूकम्‍प को लेकर मेरे द्वारा यह पहली भविष्‍यवाणी की गयी थी , जिसके तिथि और समय के निर्धारण में तो मुझे पूरी कामयाबी मिली थी , पर स्‍थान के बारे में मेरी गणना में चूक रह गयी थी। इस घटना पर ब्‍लॉग जगत का पूरा ध्‍यान गया था और चार दिनों तक हमारी बहस भी चली थी। जहां कुछ ने मेरी भविष्‍यवाणी को सही मानते हुए मुझे और सटीकता के साथ भविष्‍यवाणी करने के लिए शुभकामनाएं दी थी , वहीं कुछ पाठकों ने भूकम्‍प के बारे में मेरे स्‍थान की कमजोरी को दिखाते हुए और इस भविष्‍यवाणी की सार्थकता के बारे में प्रश्‍न भी किया था। 

वास्‍तव मे इतने बडे ब्रह्मांड में आकाशीय पिंडों की खास खास स्थिति , उनके मध्‍य खास कोणिक दूरी से पृथ्‍वी पर कुछ विशेष प्रकार की घटनाओं का अंदाजा लगता है। पृथ्‍वी पर होनेवाली हलचल का पूरा संबंध ब्रह्मांड में ग्रहों की खास स्थिति से है, इसलिए इसके आकलन में दिक्‍कत नहीं आती , साथ ही सटीकता बनी रहती है। पर जहां तक पृथ्‍वी के खास भाग के प्रभावित होने का प्रश्‍न है , हमें कामयाबी नहीं मिल पाती। 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' के नियमों की माने तो 2010 में ही आनेवाले समय में एक और बडे भूकम्‍प की आशंका नजर आ रही है , नवंबर के मध्‍य में आसमान में मौजूद ग्रहीय स्थिति पृथ्‍वी पर एक बडे भूकम्‍प की जबाबदेह हो सकती है। इस भूकम्‍प में बडे पैमाने पर नुकसान की भी संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।

नवंबर के मध्‍य में भूकम्‍प की संभावना की खास तिथि , समय और स्‍थान की चर्चा करते हुए इसपर और विस्‍तार से जानकारी देते हुए एक पोस्‍ट नवम्‍बर के प्रथम सप्‍ताह में लिखने की कोशिश करूंगी। हालांकि मैने पहले भी स्‍पष्‍ट किया है कि जितनी सटीकता से किसी घटना की तिथि और समय की जानकारी दी जा सकती है , उतनी सटीकता घटना के स्‍थान में नहीं हो सकती है। इसकी वजह पृथ्‍वी की इतनी तेज गति मानी जा सकती है , दैनिक गति के कारण पृथ्‍वी 1669 किमी प्रतिघंटे के रफ्तार से चलती है। इसके अलावे वार्षिक गति के कारण प्रतिघंटे 108,000 किमी की दूरी पार करती है , जिसके कारण इसका कौन सा भाग कब कहां और कैसे गुजर जाता है , इसका अंदाजा लगाना हम जैसे संसाधन विहीनों लिए काफी मुश्किल होता है। लेकिन फिर भी मैं अपनी पूरी जानकारी से स्‍थान का पता लगाने की कोशिश कर रही हूं।

वैसे मोटा मोटी तौर पर मेरे द्वारा अबतक जो गणना हुई है , उसमें भारतवर्ष के आक्षांस और देशांतर का स्‍थान किसी भी कोण से नहीं आ रहा है। फिर भी भूगर्भशास्त्रियों से उम्‍मीद रखूंगी कि वो इसका ध्‍यान रखे। प्रकृति अचानक किसी भी घटना को अंजाम नहीं देती , किसी प्रकार की दुर्घटना से पहले वह बारंबार किसी न किसी प्रकार का संकेत दिया करती है। पर हम मनुष्‍य उसके संकेत को नहीं समझते और अंत में अनिष्‍ट हो ही जाया करता है। यदि पृथ्‍वी के किसी भाग में नवंबर के मध्‍य में एक बडा भूकम्‍प आना है , तो उस भाग में आनेवाले डेढ महीने के अंदर भूगर्भ शास्त्रियों को हलचल तो अवश्‍य दिखाई पडेगा , आवश्‍यकता है इस बात पर ध्‍यान देने की , ताकि उस क्षेत्र के कम से कम लोगों को नुकसान पहुंच सके। वैसे मैं अभी भी इस बात के लिए अध्‍ययनरत हूं कि इस बारे में मुझे अधिक से अधिक जानकारी मिल सके।

मंगलवार, 28 सितंबर 2010

अब से मौसम संबंधी भविष्‍यवाणियों की कॉपियां मौसम विभाग और मानव संसाधन विकास मंत्रालय को भेजी जाएंगी !!

 24 सितंबर तक देश के अधिकांश हिस्‍सों में हो रही बारिश और इसके कारण नदियों में बाढ के कारण बना अस्‍त व्‍यस्‍त जनजीवन 25सितंबर के बाद बारिश के बंद होते ही सामान्‍य होने लगा , जैसा कि मैने 16 सितंबर के अपने आलेख में लिखा था। दो तीन वर्षों से इस प्रकार के आकलन करते रहने से हमारे ब्‍लॉग के पुराने पाठकों को तो आश्‍चर्य नहीं हुआ होगा , पर इस ब्‍लॉग से जुडे एक नए पाठक काफी प्रभावित हुए। उनके अनुसार मेरे पाठक कितने भी बढ जाएं , आपकी मदद नहीं कर सकते , हमारे इस विधा की जानकारी सरकार को होनी चाहिए , जिससे दूर तक की मौसम की भविष्‍यवाणी अच्‍छी तरह की जा सकती है। उनके कहने पर आज से मैने अपनी मौसम संबंधी भविष्‍यवाणियों की एक कॉपी मौसम विभाग और दूसरी कॉपी मानव संसाधन विकास मंत्रालय को भेजने का निश्‍चय किया है। इन दोनो को आज भेजी गयी कॉपी इस प्रकार है .......

30 वर्षों से हमारी संस्‍था 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिषीय अनुसंधान केन्‍द्र' ने ग्रहों की गति के आधार पर भारत के मौसम से तालमेल बिठाते हुए कुछ आश्‍चर्यजनक तथ्‍य प्राप्‍त किए हैं , जिसके आधार पर मौसम से संबंधित दूर दूर तक की भविष्‍यवाणियां की जा सकती हैं। इसी आधार पर मैं अपने ब्‍लॉग http:/sangeetapuri.blogspot.com पर कई वर्षों से अक्‍सर मौसम से संबंधित भविष्‍यवाणियां करती आ रही हूं।

इस वर्ष 29 मार्च के लेख http://sangeetapuri.blogspot.com/2010/03/blog-post_29.html में मैने इस वर्ष की बारिश के बारे में लिखा था कि 29 अप्रैल के आसपास उत्‍तर भारत के अधिकांश भागों में गर्मी अपनी चरम सीमा पर रहेगी। उसके बाद क्रमश: कुछ सुधार होते हुए 12 मई के बाद स्थिति थोडे नियंत्रण में आ सकती है, क्‍यूंकि 18 मई के आसपास का समय पुन: हल्‍की फुल्‍की बारिश लानेवाला होगा , जो आमजनों को थोडी राहत दे सकता है। उसके बाद मई का बाकी समय भी सामान्‍य गर्मी का ही होगा। 24 जून तक लगातार बढते हुए क्रम में नहीं , वरन् कमोबेश होती हुई गर्मी बनी रहनी चाहिए , पर उसके तुरंत बाद शुभ ग्रहों का प्रभाव आरंभ होगा , जिसके कारण बादल बनने और बारिश होने की शुरूआत हो सकती है , यदि नहीं तो कम से कम मौसम खुशनुमा बना रह सकता है। इस वर्ष यानि 2010 में मौसम की सबसे अधिक बारिश 4 अगस्‍त के आसपास से शुरू होकर 19 सितम्‍बर के आसपास तक होगी।

पुन: 16 सितंबर को ही http://sangeetapuri.blogspot.com/2010/09/blog-post_16.html पर मैने लिखा कि 19 सितंबर बहुत निकट है और इस हिसाब से तेज बारिश का मौसम यहीं समाप्‍त हो जाना चाहिए। वैसे 16 सितंबर को एक खास ग्रहयोग एक दो दिनों तक यत्र तत्र बहुत तेज बारिश और आंधी तूफान तक का दृश्‍य उपस्थित कर सकती है , लेकिन इसके बाद लगातार होनेवाली बारिश बादलों को समाप्‍त करनेवाली है और अब बारिश खात्‍मे की ओर है। यदि थोडी देर भी हुई तो यह अधिकतम 24 सितंबर तक दिखाई दे सकती है।  इसलिए कॉमनवेल्थ गेम्स में ऐसी मुसीबतभरी बारिश की कोई संभावना नहीं दिखती। पर अक्‍तूबर के पहले सप्‍ताह तक हस्‍त नक्षत्र में सूर्य होने तक बारिश बिल्‍कुल नहीं होगी , ऐसा नहीं माना जा सकता। यत्र तत्र तो बारिश होगी ही , खासकर 3 अक्‍तूबर को खेल के उद्घाटन के दिन ही थोडी बहुत बारिश की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता। पर 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' के हिसाब से बारिश से भयानक तबाही वाली कोई बात अब नजर नहीं आएगी।

अब हाल फिलहाल में बहुत अधिक बारिश की कोई संभावना नहीं दिखाई पड रही। मौसम में गडबडी लानेवाले कारक ग्रह अब दिसंबर के पहले सप्‍ताह में ही क्रियाशील हैं , इसलिए उस समय तक मौसम में कोई बडा परिवर्तन नहीं होता दिखेगा। उम्‍मीद रखती हूं , मेरी बातों पर गौर करते हुए ग्रहों को मौसम में परिवर्तन लाने का कारक मानते हुए इस दिशा में भी शोध को भी आप महत्‍व देंगे।

मौसम से संबंधित सारे तथ्‍यों को पूर्ण तौर पर परखने के बाद ही आपसे संपर्क किया जा रहा है , मौसम विभाग के अलावे इसकी एक प्रति मानव संसाधन विभाग को भी भेजी जा रही है , आनेवाले समय में भी यहां से मौसम से संबंधित सभी भविष्‍यवाणियां आप दोनो को भेजी जाती रहेगी । ताकि सरकार इसपर ध्‍यान दें और मौसम की सटीक भविष्‍यवाणी समय से पूर्व किया जा सके ।

लंबाई बढते वक्‍त बच्‍चों के कपडे जूत्‍ते खरीदना बहुत बडी समस्‍या होती है !!

बोकारो के बारे में अबतक आपने पढा .... बोकारो में दोनो बच्‍चों के साथ परिवार के किसी अन्‍य सदस्‍य के न होने से मुझे पढाई के साथ ही साथ बच्‍चों के शारीरिक और चारित्रिक विकास पर भी मैने पूरा ध्‍यान देना पडा। बहुत बचपन में तो बच्‍चें की लंबाई तेज गति से बढती नहीं है , यदि बढती भी हो , तो अधिकांशत: हाफ शर्ट और हाफ पैण्‍ट में मालूम भी नहीं चलता। पर किशोरावस्‍था के दो चार वर्ष लंबाई में बहुत तेज गति से वृद्धि होती है , खासकर हमारे घर के सभी बच्‍चे 13 की उम्र तक अपनी पूरी लंबाई छह फीट पूरे कर लेते हैं , इस दौरान इनकी पीठ , बगल और जांघों में वो स्‍क्रैच पड जाता है , जो महिलाओं के शरीर में गर्भावस्‍था के दौरान पडता है। इसलिए 9 से 13 की उम्र के चार पोंच वर्ष जहां एक ओर पौष्टिक खाना खिलाने पर इनपर पूरा ध्‍यान देना आवश्‍यक होता हैं , वहीं फैशन के इस दौर में कपडे , जूते खरीदने में साइज को लेकर खासी मशक्‍कत होती है। कपडे जूत्‍ते तुरंत छोटे हो जाते , इसको ध्‍यान में रखते हुए बडे कपडे जूत्‍ते खरीदने की मजबूरी होती ।

कक्षा आठवीं तक ही पूरी लंबाई प्राप्‍त कर लेने से उसके बाद कपडों के छोटे होने को लेकर अधिक समस्‍या नहीं रह गयी थी। यह बात मुझे इसलिए याद है , क्‍यूंकि स्‍कूल की ओर से इस कक्षा में उनके नाप के अनुरूप जो नीले स्‍कोलर ब्‍लेजर मिले , वो दुबारा हमें नहीं बनवाने पडे थे। लंबाई पूरी होने के बाद फिर कमर की साइज बढने से समस्‍या आती रही। हां जब से हॉस्‍टल में रहने लगे हैं , बाहर के अस्‍वास्‍थ्‍यकारी और अरूचिकर खाने ने उनकी कमर भी कम कर दी है। अभी तक जिन पैण्‍टों के कमर छोटे हो गए थे , वो भी अब फिट हो रहे हैं। पर एक समय था , जब कपडे के कारण अच्‍छी मुसीबत हो जाया करती थी , खासकर एक प्रसंग तो हमेशा याद रखने लायक है।

बोकारो में दुर्गापूजा बहुत धूमधाम से मनायी जाती है , पूजा के कारण अधिकांश घरों में लोग नए कपडे खरीदते ही हैं , पर हमलोग कपडे का बाजार जरूरत के मुताबिक ही करते हैं । एक वर्ष दोनो भाइयों के सारे कपडे छोटे मिले , खासकर पैरों और हाथों की लंबाई बढने से फुल पैण्‍ट , फुल शर्ट और पार्टी के जूत्‍तों पर अधिक असर पडता है , क्‍यूंकि स्‍कूल के जूत्‍ते तो एक वर्ष में पहनने लायक नहीं होते। चार छह महीने के दौरान कहीं जाना हो , तो दिक्‍कत हो जाएगी , यह सोंचकर दोनो के तीन तीन सेट अच्‍छे कपडे बनवाए। दिसंबर में ही चाचाजी की लडकी का विवाह तय हुआ , वे फरवरी में विवाह कर सकते थे , पर घर के बच्‍चों की परीक्षा को देखते हुए 5 मार्च कर दिया ।

छह माह पहले पूजा में ही कपडे बनवाए थे , तैयारी की कोई आवश्‍यकता नहीं थी , इसलिए मैं बच्‍चों की परीक्षा की तैयारी में ही व्‍यस्‍त रही। 5 मार्च को मेरे बच्‍चों की अंतिम परीक्षा थी , परीक्षा देकर उन्‍हें 12 बजे तक स्‍कूल से लौटना था। मेरा मायका 30 किमी की दूरी पर है , मैने 1 बजे तक चलने का कार्यक्रम बनाया । दोनो को स्‍कूल भेजकर मैने जल्‍दी जल्‍दी सारी पैकिंग शुरू कर दी , एक एक सेट कपडे बच्‍चें के रास्‍ते के लिए भी रख लिए। स्‍कूल से बच्‍चे आए तो खा पीकर तैयार होने लगे। घर से कहीं निकलना हो , तो अंत अंत में कई तरह के काम होते हैं , मैं उसी में व्‍यस्‍त थी कि छोटे बेटे ने आकर दिखाया कि मैने उसके लिए जो पैंट निकालकर रखी थी , वह छोटा हो गया है। रास्‍ते की ही तो बात थी , मैने उसे बडे बेटे की वह पैण्‍ट दे दी , जो उसने एकाध दिन पहनकर हैंगर में टांग दिया था।

विवाह के घर में रिश्‍तेदारों की भीड , आजकल महिलाओं को काम तो कुछ रहता नहीं है , गप्‍पें मारते दोपहर से कैसे शाम हो गयी , पता भी न चला। बरात आने वाली थी , आठ या साढे आठ बजे हमलोग तैयार होने अपने पापा के घर आए , क्‍यूंकि हमारी अटैची वहीं थी। सब अपने अपने कपडे पहनने लगे , पर यह क्‍या ?? बडे ने तो पिछले वर्ष ही अपनी लंबाई पूरी कर ली थी , इसलिए इन छह महीनों में उसके कपडे छोटे नहीं हुए थे , पर छोटे बेटे की पैंट तो मेरे बढाकर खरीदे हुए दो तीन इंच अधिक का मेकअप करते हुए उसके पैरो से दो इंच ऊपर आ गयी थी यानि छह महीने के अंदर उसके कमर के नीचे का हिस्‍सा 5 इंच से अधिक बढ गया था। मेरे पास उसके और कपडे थे नहीं और मेरे घर में कोई उसका हमउम्र भी नहीं था । पुरानी पैंट, जो वह पहनकर गया था , उसमें रसगुल्‍ले के रस गिर चुके थे , बाजार भी बंद हो गया था , बडे ने पिछले वर्ष ही अपनी लंबाई पूरी कर ली थी , इसलिए उसके कपडे काफी लंबे थे , किसी तरह मोडकर उससे ही काम चलाना पडा।

सोमवार, 27 सितंबर 2010

बुरे समय का इलाज ... संगीता पुरी

जहां जीवन में अच्‍छे ग्रहों के कारण सुखमय समय जीवन को आनंदमय बनाए रहते हैं , वहीं बुरे ग्रहों के कारण चलने वाले बुरे समय को झेलने को भी मनुष्‍य विवश होता है , परंपरागत ज्‍योतिषियों द्वारा इसके इलाज के लिए बडे बडे दावे किए जाते हैं । 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' इस बारे में एक अलग ही धारणा रखता है , इसपर मै लगभग 10 पोस्‍ट लिख चुकी हूं। कल पिताजी के द्वारा 15 वर्ष पूर्व हस्‍तलिखित कुंडली बनाई जाने वाली एक पुस्तिका मिली। इसमें उन्‍होने संक्षेप में बुरे समय के इलाज के निम्‍न विंदुओं को प्रकाशित करवाया था ....

  • बुरे समय में घबडाहट की बात न हो , समय बहुत तेज गति से बदलता है। 
  • समय से पूर्व अभिष्‍ट की प्राप्ति नहीं होती , समय का इंतजार करें। 
  • समय की वास्‍तविक जानकारी ही हर प्रकार के भ्रमों का उन्‍मूलन करती है। 
  • अच्‍छे बुरे समय की जानकारी सही समय में सही कदम उठाने को प्ररित करती है। 
  • बुरे दिनों में रिस्‍क न ले , गर्दिश के ग्रहों का यह सर्वोत्‍तम इलाज है। 
  • रत्‍न धारण , पूजा पाठ , तंत्र मंत्र या किसी प्रकार के अनुष्‍ठान से अच्‍छा समय के अनुसार सूझ बूझ और धैर्य से किया गया काम होता है। 
  • बुरे समय का अभिप्राय निष्क्रियता नहीं , वरन् परिस्थितियों से समझौता है , अतिरिक्‍त रिस्‍क की अवहेलना करें। 
  • अनुशासित रहे , गुरूजनों की इज्‍जत एवं दलितों की सहायता करें। 
  • नेष्‍ट ग्रह जब गोचर में सबसे अधिक गति‍शीलता को प्राप्‍त करे , तो अपने लग्‍नकाल में सोना , चांदी या ताम्‍बे को पूर्ण तौर पर गलाकर नया रूप देकर उसे धारण करें।