गुरुवार, 4 नवंबर 2010

पहले जन्‍म या फिर भाग्‍य . . विश्‍लेषण के लिए कम से कम 100 अस्‍पतालों का आंकडा चाहिए !!

पहले अंडा या मुर्गी , ये फैसला तो आज तक न हो सका है और न हो पाएगा , पर इसी तर्ज पर कुछ दिनों से एक महत्‍वपूर्ण विषय पर मैं चिंतन कर रही थी , जन्‍म के आधार पर भाग्‍य निश्चित होता है या भाग्‍य के निश्चित होने पर जन्‍म की तिथि निश्चित होती है। संयोग से उसी आसपास पापाजी भी बोकारो पहुंच गए , हमेशा की तरह ही इस बार भी मेरे प्रश्‍नों की झडी तैयार थी। पर जहां पहले मैं मेरे प्रश्‍नों की झडी से वे ऊब से जाया करते , हाल के वर्षों में वे किसी निष्‍कर्ष पर पहुंचने से पहले मेरे अनुभव का भी ख्‍याल रखते हैं। वर्षों के अनुभव और चार दिनों तक हुई गंभीर बहस के बाद हमलोग इस निष्‍कर्ष पर पहुंचे कि बच्‍चे का स्‍वभाव और उसकी जीवन यात्रा पहले से तय होती है , उसी के अनुसार उसके जन्‍म लेने का समय तय होता है। दरअसल गर्भावस्‍था के दौरान ही बच्‍चे की मां और बच्‍चे की परिस्थितियों और जन्‍म के पश्‍चात बनने वाली बच्‍चे की जन्‍मकुंडलियों में समानता को देखते हुए हमने ऐसा समझा।

अभी तक ज्‍योतिष शास्‍त्र ये मानता आया है कि भूण के बनने के हिसाब से बच्‍चों का भाग्‍य निश्चित नहीं होता , जन्‍म के बाद बच्‍चे जो प्रथम श्‍वास ग्रहण करते हैं, उसी वक्‍त ब्रह्मांड में मौजूद ग्रहों का प्रभाव किसी बच्‍चे पर  पडता है , जिससे उसका स्‍वभाव और उसकी जीवनयात्रा निश्चित होती है , जिसे जन्‍मकुंडली में देखा जा सकता है। इस आधार पर बालारिष्‍ट रोगों का कारक ग्रह चंद्रमा यदि जन्‍म के वक्‍त कमजोर हो , तो जन्‍म के बाद बच्‍चे के स्‍वास्‍थ्‍य में गडबडी आती है। पर अध्‍ययन के क्रम में कई कुंडलियों में हमने पाया कि जन्‍म के वक्‍त रहनेवाले कमजोर चंद्रमा के कारण या तो घर की आर्थिक स्थिति गडबड थी या माता पिता के द्वारा किसी प्रकार की लापरवाही हुई , जिसके कारण गर्भावस्‍था के दौरान ही कई बच्‍चों  के शा‍रीरिक विकास में बाधा उपस्थित हुई थी ।

 ऐसा महसूस करने पर हमलोगों ने खास विशेषतावाले 100 बच्‍चों की माताओं से बात चीत की। जन्‍मकुंडली के हिसाब से बच्‍चों के जिन जिन पक्षों को मजबूत होना चाहिए था , वे उनकी गर्भावस्‍था के दौरान उनकी माताओं के द्वारा महसूस किए गए। गर्भावस्‍था के दौरान लगभग सभी महिलाओं ने अपने व्‍यवहार में ये विशेषताएं पायी थी , जो उनके बच्‍चों में बाद में देखने को मिली। हमारे ग्रंथों में माता के व्‍यवहार का बच्‍चों पर प्रभाव के बारे में चर्चा है , पर हमने महसूस किया कि अलग अलग बच्‍चें के स्‍वभाव के हिसाब से माता के व्‍यवहार या स्‍वास्‍थ्‍य या मानसिक क्रियाकलापों में अंतर देखने को मिला। पर हमलोग इस प्रकार के रिसर्च के बिल्‍कुल प्रारंभिक दौर में थे , इसलिए इस निष्‍कर्ष को लेकर दावा नहीं कर सकते थे , चिंतन अवश्‍य बना हुआ था , पर यह भ्रम था या हकीकत , समझ में नहीं आ रहा था।

पर यह भ्रम पिछले शनिवार यानि 23 अक्‍तूबर को हकीकत में बदल गया। घटना यह हुई कि कुछ दिन पहले ही बोकारो से मेरी एक महिला मित्र अपनी गर्भवती पुत्री के पास दिन पूरे होने के लगभग दिल्‍ली पहुंच गई थी। उसकी पुत्री एक दिन पहले से ही अस्‍पताल में भर्ती थी , इसकी खबर लगते ही मैने दो बजे आसपास उनसे बात की। वो काफी घबडायी हुई थी , बिटिया को पांच घंटे पूर्व ही लेबर रूम ले जाया गया था , पूरे परिवार के लोग जमा थे और अंदर से कोई खबर भी नहीं आ रही थी। जब भी भविष्‍य अनिश्चित सा लगता है , मुझसे लोग भविष्‍य के बारे में जानना चाहते हैं। माता पिता जानना चाह रहे थे कि इसमें कितनी देर हो सकती है।

फोन रखने के बाद मैने पंचांग निकाला , पूर्णमासी का दिन था और साढे पांच बजे से साढे सात बजे के मध्‍य चांद पूर्वी दिशा में उदय होने वाला था। उस वक्‍त बच्‍चे का जन्‍म हो , तो जन्‍मकुंडली में लग्‍नचंदा योग बनेगा , इस योग के बारे में कहा जाता है कि इसमें जन्‍म लेने वाला बच्‍चा पूरे परिवार का लाडला और प्‍यारा होता है। लग्‍नचंदा योग यदि पूर्णिमा के दिन बनें , तो इसकी बात ही अलग होती है। वैसे तो अपने माता पिता के लिए हर बच्‍चा प्‍यारा ही होता है , पर जिस बच्‍चे का जन्‍म होनेवाला था , वह दादाजी और नानाजी दोनो के घर का पहला बच्‍चा था , उसके अतिरिक्‍त लाड प्‍यार में कोई संशय नहीं था। मेरे मन से सारा भ्रम हट गया , इस बच्‍चे का जन्‍म साढे पांच से साढे सात के मध्‍य लग्‍नचंदा योग में ही हो सकता है , यही वजह है कि लेबर रूम में इतनी देर हो रही है।

मेरा ध्‍यान दिल्‍ली की ओर ही लगा रहा , सात बजे सूचना मिली कि पंद्रह मिनट पहले बच्‍चे का जन्‍म हो चुका है , जच्‍चा और बच्‍चा दोनो ही स्‍वस्‍थ हैं , बच्‍चे का वजन 4 किलो है। मतलब एक निश्चित समय पर बच्‍चे का जन्‍म लेना तय था , और उसी ग्रहस्थिति के हिसाब से उसका पूरा विकास हो चुका था। इस घटना के बाद मेरा भ्रम तो बिल्‍कुल मिट चुका है , पर इसे और निश्चित करने के लिए मैं एक सर्वे करना चाहती हूं। इसके लिए कम से कम देशभर के 100 अस्‍पतालों से पूरे दिसंबर 2010 के दौरान जन्‍म लेने वाले सारे बच्‍चों का जन्‍म विवरण , उनका वजन , उनके जन्‍म से पहले और बाद का स्‍वास्‍थ्‍य , उनके माता पिता , दादा दादी या नाना नानी के बेटे बेटियों , नाती नातिनियों और पो‍ते पोतियों में उनका कौन सा स्‍‍थान है ,  इसके बारे पूरी जानकारी चाहती हूं , मैने इस दिशा में अपने नजदीकी डॉक्‍टरों और अस्‍पतालों से बात शुरू कर दी है , क्‍या आप पाठकों में से भी कोई मेरी मदद कर सकते हैं ??

मंगलवार, 2 नवंबर 2010

कौन सा व्‍यवसाय किया जाए ??

अभी हाल में एक भाई ने बहुत खुश होकर बताया कि उसने कई प्रोडक्‍टों की एजेंसी ले रखी है , बाजार में उन वस्‍तुओं की अच्‍छी खपत है और अब भविष्‍य के लिए उसे सोंचने की आवश्‍यकता नहीं। उत्‍सुकता वश मैने उसे पूछा कि‍ वे कौन कौन से प्रोडक्‍ट हैं ?? शायद उसे सबसे अधिक फायदा शायद कोल्‍ड ड्रिंक्‍स और पानी की बोतलों से आ रहा था , उसके मुहं से इन्‍हीं दोनो का नाम पहले निकला । सुनते ही मैं ऐसे सोंच में पड गयी कि बाद में उसने और कई प्रोडक्‍टों का क्‍या नाम बताया , वो भी सुन न पायी और उसके चुप्‍प होते ही उसे जीवन में नैतिक मूल्‍यों को धारण करने का लेक्‍चर देने लगी।

वो तर्क करने में मुझसे बीस ही निकला। उसने बताया कि पानी और कोल्‍ड ड्रिंक्‍स की बोतल को बेचना तो वह एक मिनट में छोड सकता है , जब मैं उसे बताऊं कि बाजार में कौन सा प्रोडक्‍ट सही है। दूध में केमिकल की क्‍या बात की जाए , पेण्‍ट का घोल तक मिलाया जाता है। मधु , च्‍यवणप्राश तक में एंटीबायोटिक और पेस्टिसाइड की बात सुनने में आ ही गयी है। जितनी सब्जियों है , उसमें आक्सीटोसीन के इंजेक्‍शन दिए जाते हैं , जिससे सब्जियां जहरीली हो जाती हैं। गाय तक को तेज इंजेक्‍शन देकर उसके सारे शरीर का दूध निचोड लिया जाता है , नकली मावा , नकली मिठाई , नकली घी। पैकिंग के चाकलेटों और अन्‍य सामानों में कीडे मकोडे , किस चीज का व्‍यवसाय किया जाए ??

सुनकर उसकी मां यानि चाची खेतों के ऊपज तक के शुद्ध नहीं रहने की चर्चा करने लगी। गांव के परंपरागत सारे बीज समाप्‍त हो गए हैं और हर वर्ष किसान को सरकारी बीज खरीदने को बाध्‍य होना पडता है। विशेष ढंग से विकसित किए गए उस बीज में प्राकृतिक कुछ भी नहीं , उसमें गोबर की खाद नहीं चल सकती , रसायनिक खाद का ही इस्‍तेमाल करना पउता है , सिंचाई की सुविधा हो तो ठीक है , नहीं तो पौधों में प्रतिरोधक क्षमता बिल्‍कुल भी नहीं होती , देखभाल में थोडी कमी हो तो मर जाते हैं। हां, सबकुछ ठीक रहा तो ऊपज अवश्‍य होती है , पर न तो पुराना स्‍वाद है और न ही पौष्टिकता।

 इस तरह के बातचीत से लोगों को कितनी निराशा होती होगी , इसका अनुमान आप लगा सकते हैं। शरीर को कमजोर कर , प्रकृति को कमजोर कर हम यदि विकसित होने का दावा करते हैं , तो वह हमारा भ्रम ही तो है। पाश्‍चात्‍य की नकल करते हुए इस अंधे विकास की दौड में किसी को कुछ भी हासिल नहीं हो सकता। एलोपैथी दवाओं का तो और बुरा हाल है , एक बार किसी बीमारी की दवा लेना शुरू करो , भाग्‍य अच्‍छा होगा , तभी उस दवा के कुप्रभाव से आप बच सकते हैं। इन दवाओं और जीवनशैली की इन्‍हीं खामियों के कारण 40 वर्ष की उम्र का प्रत्‍येक व्‍यक्ति दवाइयों पर निर्भर हो जाता है। हमारी सभ्‍यता और संस्‍कृति तथा ज्ञान ने अपने स्‍वास्‍थ्‍य के साथ साथ प्रकृति के कण कण के बारे में सोंचने को बाध्‍य करती है। इसलिए जितनी जल्‍द हमलोग परंपरागत जीवनशैली की ओर लौट जाएं , उतना ही अच्‍छा है।

सोमवार, 1 नवंबर 2010

मध्‍य दोपहर में ग्रहों का प्रभाव बी एस ई पर गंभीर रूप से देखने को मिला ...

2006 से मैने शेयर बाजार के आंकडों का विश्‍लेषण करना शुरू किया है , ग्रहों से इसका तालमेल बिठाती आ रही हूं , मैने पाया है कि ग्रहों का प्रभाव शेयर बाजार पर भी पडता है , हालांकि मैं इसे स्‍पष्‍ट नहीं देख पाती , पर किसी न किसी प्रकार के संकेत अवश्‍य मिल जाते हैं। पिछले लेख में मैने दो वर्षों से मैं हर सप्‍ताह शेयर बाजार के बारे में भविष्‍यवाणी करते हुए मोल तोल में कॉलम लिखती आ रही हूं और अगले सप्‍ताह लगभग वैसी ही परिस्थितियों देखा करती हूं।


मैने अपने ब्‍लॉग पर पिछले सप्‍ताह के संकेत की चर्चा की थी। मेरे लिखे अनुरूप ही 25 अक्‍टूबर को बाजार की शुरूआत मजबूती से हुई। निवेशक पूरे उत्‍साह में थे और थोडी देर तक सभी सैक्‍टरों में लिवाली होती रही। भले ही 26 अक्‍टूबर को शुरूआत में दलाल स्‍ट्रीट में ये हाल न रहा हो लेकिन अंत के बारे में मैने जैसा लिखा था, सप्‍ताह के प्रत्‍येक दिन लगभग दोपहर तक बाजार दायरे में ही कारोबार करते दिखे, लेकिन दोपहर बाद शॉर्ट कवरिंग की वजह और खासकर 27 अक्‍टूबर को आखिरी घंटे बाजार में सीरीज की एक्सपायरी की वजह से बाजार में चौतरफा बिकवाली देखी गई।


जैसा कि ‘गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष’ के हिसाब से साप्‍ताहिक बंद सकारात्‍मक होना था।  तीन दिनों से जारी गिरावट 29 अक्‍टूबर के कारोबार के अंतिम घंटे में थम ही गई और निवेशकों की ब्लूचिप कंपनियों में लिवाली और बैंकिंग तंत्र में मुद्रा आपूर्ति बढ़ाने के रिजर्व बैंक के उपायों के बल पर सेंसेक्स 91 अंक मजबूत होकर सेंसेक्स 20 हजार के मनोवैज्ञानिक स्तर के ऊपर चला गया एवं निफ्टी ने भी छह हजार के स्तर को पार कर गया। यहां तक कि मेरे लिखे अनुरूप बाजार में कमजोरी के बावजूद 27,  28 और 29 अक्‍टूबर को ऑयल और गैस सैक्‍टर में बडी बढत देखने को मिली, यानी ग्राफ की ऊंचाई को छोडकर मेरे बाकी सारे संकेत सही थे।


पर जैसा कि मैन‍े पिछले सप्‍ताह ही लिखा था , अभी 8 नवंबर तक बाजार फिर एक नई ऊंचाई हासिल करेगा , अभी बाजार में गिरावट के कोई चांस नहीं। हां , उसके बाद छोटे मोटे करेक्‍शन जरूर देखे जा सकते हैं। शेयर बाजार में आने वाले सप्‍ताह में भी कुल मिलाकर स्थिति अच्‍छी दिख रही है ,  लेकिन ग्रहों के हिसाब से भारतीय बाजार का समय कुछ जोड तोड वाला अवश्‍य है । इस सप्‍ताह भी साप्‍ताहिक बाजार खुलने के पूर्व ही मैने मोल तोल में आनेवाले सप्‍ताह के शेयर बाजार के बारे में भविष्‍यवाणी कर दी थी। अपने ब्‍लॉग में कल शाम इसे लगाने का मन बनाया था , पर कुछ तकनीकी गडबडी के कारण सफलता न मिली। 


मोल तोल के आलेख में मैने लिखा था कि 1 या 2 नवंबर को पूंजीगत या उपभोक्‍ता वस्‍तुओं के शेयरों में कुछ कमजोरी दलाल स्‍ट्रीट के रौनक को कम कर सकती है। इसका खास प्रभाव मध्‍य दोपहर में देखने को मिलेगा। हालांकि आज बाजार तेज होकर खुला , पर ग्रहों का प्रभाव उपभोक्‍ता वस्‍तुओं पर अवश्‍य दिखा है , बाकी सेक्‍टर की तुलना में  FMCG में कम बढत देखी जा रही है। पर आश्‍चर्य तो मुझे इस बात पर हुआ कि जैसा मैने लिखा था , मध्‍य दोपहर में ग्रहों का प्रभाव बी एस ई पर गंभीर रूप से देखने को मिला , तकनीकी गडबडी की वजह से इसे पौने तीन घंटे कारोबार ही बंद करना पडा। 



मोल तोल के इस सप्‍ताह के आलेख में 3 , 4 और 5 नवंबर को इसकी तुलना में शेयर बाजार के बेहतर होने की बात लिखी गयी है। ग्रहों का प्रभाव 3 और 4 नवंबबर को मेटल सेक्‍टर के लिए खास रहेगा , इसलिए कोल इंडिया के शेयरों को अच्‍छा रिस्‍पांस मिलना चाहिए। 5 नवंबर आई टी, रियल्‍टी और बैंकिंग जैसे कुछ सैक्‍टरों को प्रभावित करने वाले होंगे। लेकिन इन दिनों में भी दोपहर बाद का समय शेयर बाजार के प्रतिकूल होने से सेंसेक्‍स और निफ्टी में कुछ गिरावट अवश्‍य दर्ज की जा सकती है। लेकिन बिल्‍कुल अंत का समय कुछ राहत देने वाला अवश्‍य हो सकता है।


कुछ पाठकों, जिन्‍हें हमारे द्वारा किए गए एक सप्‍ताह के आकलन से दूरस्‍थ कार्यक्रम बनाने में सुविधा महसूस नहीं होती है, की इच्‍छा को ध्‍यान में रखते हुए, पूरे नवंबर भर के शेयर बाजार का आकलन किया जा चुका है। प्रतिमाह इस प्रकार का आकलन किया जा सकता है। सशुल्‍क उसे प्राप्‍त करने की इच्‍छा रखने वाले ईमेल से संपर्क कर सकते हैं।

भूल सुधार .. LOCKED BY HINDI BLOG TIPS

आशीष खंडेलवाल जी ने अपनी एक पोस्‍ट में रचनाओं को चोरी से बचाने के लिए कुछ टिप्‍स दिए थे , जिससे टेक्‍सट कॉपी नहीं किया जा सकता था। इसका प्रयोग कुछ दिन मैने भी किया था , फिर किसी सज्‍जन के अनुरोध पर अपने लेखों के प्रयोग करने की सुविधा देने के लिए हटाना पडा । पर कुछ दिनों से मैने कई ब्‍लॉग्‍स पर जब भी कुछ शब्‍दों को सेलेक्‍ट करने की कोशिश की है , ऐसा दृश्‍य पाया है ......



मतलब कि वह स्‍वामी जी के तोते की तरह अपनी कहता भी है और आपको कॉपी करने भी दे देता है। आपको नहीं मालूम तो सुन लीजिए , स्‍वामी जी का तोता शिकारी के बिछाए गए जाल में फंसकर स्‍वामी जी द्वारा रटाए गए पाठों को कैसे दोहरा रहा था ....

शिकारी आएगा , जाल बिछाएगा . लोभ से उसमें फंसना मत !!

भूल सुधार कर लें आशीष खंडेलवाल जी !!