शनिवार, 19 फ़रवरी 2011

मीन लग्‍नवालों के विभिन्‍न संदर्भों का आपस में सहसंबंध ...


आसमान के 3...30 डिग्री से 360 डिग्री तक के भाग का नामकरण मीन राशि  के रूप में किया गया है। जिस बच्‍चे के जन्‍म के समय यह भाग आसमान के पूर्वी क्षितिज में उदित होता दिखाई देता है , उस बच्‍चे का लग्‍न मीन माना जाता है। मीन लग्‍न की कुंडली के अनुसार मन का स्‍वामी चंद्र पंचम भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के बुद्धि , ज्ञान , संतान पक्ष का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए मीन लग्‍न के जातकों के मन को पूर्ण तौर पर प्रभावित करने वाले संदर्भ यही होते हैं। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में चंद्र के मजबूत रहने पर ऐसे जातकों की बुद्धि तीक्ष्‍ण होती है  , इन्‍हें संतान पक्ष का भरपूर सुख प्राप्‍त होता है , जो मन को खुश रखता है। जबकि जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में चंद्र के कमजोर रहने पर बुद्धि और सूझ बूझ की कमी और संतान पक्ष के सुख में कमी इनके मन को दुखी करते हैं।

मीन लग्‍न की कुंडली के अनुसार समस्‍त जगत में चमक बिखेरने वाला सूर्य षष्‍ठ भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के रोग , ऋण , शत्रु या अन्‍य प्रकार के झंझट का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए अपने नाम यश को फैलाने के लिए मीन लग्‍न के जातक किसी प्रकार के झंझट को हल कर प्रभाव बढाने में विशेष दिलचस्‍पी रखते हैं। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में सूर्य के मजबूत रहने से इनके झंझट को हल करने का तरीका उत्‍तम कोटि का और अनुकरणीय होता है , जबकि जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में सूर्य के कमजोर रहने इन्‍हें हर प्रकार के झंझट से कष्‍टकर समझौता करने को बाध्‍य होना पडता है।

मीन लग्‍न की कुंडली के अनुसार मंगल द्वितीय और नवम भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के धन , कोष और भाग्‍य का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए इस लग्‍न के जातकों के धन की स्थिति को मजबूत बनाने में भाग्‍य की बडी भूमिका होती है , किसी प्रकार के संयोग से संसाधन प्राप्‍त करते तथा किसी दुर्योग से संसाधनहीन होते है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में मंगल के मजबूत रहने पर भाग्‍य के साथ देने से इनका धन कोष मजबूत बना रहता हैं। विपरीत स्थिति में यानि जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में मंगल के कमजोर रहने पर भाग्‍य की कमजोरी धन कोष को कमजोर बनाती है।

मीन लग्‍न की कुंडली के अनुसार शुक्र तृतीय और अष्‍टम भाव का स्‍वामी है और यह जातक के भाई , बहन , बंधु , बांधव और जीवनशैली का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए मीन लग्‍नवालों की जीवनशैली का भाई बहन बंधु बांधव का संबंध बना होता है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शुक्र के मजबूत रहने पर मीन लग्‍नवाले भाई , बहन , बंधु और बांधव का सुख प्राप्‍त करते हैं , उनकी जीवनशैली को सुखमय बनाने में भाई बंधु की भमिका होती है। पर जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शुक्र कमजोर हो तो भाई बहन बंधु बांधव से संबंधित जबाबदेहियों के कारण उनकी जीवनशैली कमजोर दिखाई पडती है,  इनसे सहयोग की कमी से तनावग्रस्‍त रहते हैं।

मीन लग्‍न की कुंडली के अनुसार बुध चतुर्थ और सप्‍तम भाव का स्‍वामी है और यह जातक के मातृ पक्ष , हर प्रकार की संपत्ति और घर गृहस्‍थी का  प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए इस लग्‍न के जातक के घर गृहस्‍थी का उनकी माता या हर प्रकार की संपत्ति से संबंध बना होता हैं। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बुध के मजबूत रहने पर ऐसे जातकों को मातृ पक्ष का भरपूर सहयोग मिलता है , हर प्रकार की संपत्ति इनके घर गृहस्‍थी के वातावरण को सुखमय बनाती हैं। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बुध के कमजोर रहने पर जातक का मातृ पक्ष के विचारों से तालमेल नहीं होता , हर प्रकार की छोटी बडी संपत्ति कष्‍ट का कारण बनकर घर गृहस्‍थी के माहौल को बिगाडती है।

मीन लग्‍न की कुंडली के अनुसार बृहस्‍पति प्रथम और दशम भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के स्‍वास्‍थ्‍य , व्‍यक्तित्‍व , पिता पक्ष , पद प्रतिष्‍ठा और सामाजिक राजनीतिक वातावरण का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए मीन लग्‍न के जातकों के आत्‍मविश्‍वास को बढाने घटाने में पिता की भूमिका बनती है , उनके व्‍यक्तित्‍व का समाज में एक पहचान बना होता है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बृहस्‍पति के मजबूत होने पर मीन लग्‍न के जातक को पिता का भरपूर सुख प्राप्‍त होता है , प्रकृति की ओर से स्‍वस्‍थ शरीर प्राप्‍त करते हैं , अपने आत्‍मविश्‍वास से समाज में अच्‍छी पहचान बनती है। इसके विपरीत , जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बृहस्‍पति के कमजोर होने पर मीन लग्‍नवाले जातक को पिता का सहयोग नहीं मिलता , स्‍वास्‍‍थ्‍य की गडबडी भी आत्‍मविश्‍वास को कमजोर बनाती है और उनकी पहचान में बाधा उपस्थित करती है।

मीन लग्‍न की कुंडली के अनुसार शनि एकादश और द्वादश भाव का स्‍वामी होता है यानि यह जातक के लाभ , खर्च और बाहरी संदर्भों आदि मामलों का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए इस लग्‍नवाले जातकों के लाभ और खर्च में बडा संबंध होता है । जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शनि के मजबूत रहने पर ऐसे जातकों को नियमित लाभ होता रहता है , जिससे खर्च की दिक्‍कत नहीं आती , हर प्रकार के संबंधों का निर्वाह भी ये आसानी से कर लेते हैं। पर जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शनि के कमजोर रहने पर मीन लग्‍नवालों के लाभ में कमी खर्चशक्ति को कमजोर बनाती है , बाह्य संदर्भों को कमजोर करने में सहायक होती है।

गुरुवार, 17 फ़रवरी 2011

कुंभ लग्‍नवालों के जीवन के विभिन्‍न संदर्भों के सहसंबंध ......

आसमान के 300 डिग्री से 330 डिग्री तक के भाग का नामकरण कुंभ राशि  के रूप में किया गया है। जिस बच्‍चे के जन्‍म के समय यह भाग आसमान के पूर्वी क्षितिज में उदित होता दिखाई देता है , उस बच्‍चे का लग्‍न कुंभ माना जाता है। कुंभ लग्‍न की कुंडली के अनुसार मन का स्‍वामी चंद्र षष्‍ठ भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के प्रभाव और रोग , ऋण , शत्रु जैसे हर प्रकार के झंझट का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए कुंभ लग्‍न के जातकों के मन को पूर्ण तौर पर प्रभावित करने वाले संदर्भ किसी प्रकार के झंझट ही होते हैं। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में चंद्र के मजबूत रहने पर ऐसे जातकों के समक्ष किसी प्रकार का झंझट उपस्थित नहीं होता , जो मन को खुश रखता है। जबकि जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में चंद्र के मजबूत रहने पर कई तरह के झंझट उपस्थित होकर इनके मन को दुखी करते हैं।

कुंभ लग्‍न की कुंडली के अनुसार समस्‍त जगत में चमक बिखेरने वाला सूर्य सप्‍तम भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के घर गृहस्‍थी का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए अपने नाम यश को फैलाने के लिए कुंभ लग्‍न के जातक अपनी घर गृहस्‍थी को महत्‍व देते हैं। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में सूर्य के मजबूत रहने से इनके घर गृहस्‍थी का वातावरण और दाम्‍पत्‍य जीवन बहुत ही उत्‍तम कोटि का और अनुकरणीय होता है , जबकि जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में सूर्य के कमजोर रहने इन्‍हें अपनी दाम्‍पत्‍य जीवन से कष्‍टकर समझौता करने को बाध्‍य होना पडता है।

कुंभ लग्‍न की कुंडली के अनुसार मंगल तृतीय और दशम भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के भाई बहन , बंधु बांधव , पिता , समाज और पद प्रतिष्‍ठा का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए इस लग्‍न के जातकों के परिवेश में भाई , बहन , बंधु बांधव ,  पिता , समाज सभी शामिल होते है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में मंगल के मजबूत रहने पर भाई बंहन बंधु बांधवों से लेकर पिता समाज के सारे बुजुर्गों से इनके संबंध अच्‍छे बने होते हैं और इसके कारण प्रतिष्‍ठा के पात्र बनते हैं। विपरीत स्थिति में यानि जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में मंगल के कमजोर रहने पर भाई , बंधु , पिता , समाज या अन्‍य लोगों का कष्‍ट झेलने को इन्‍हे बाध्‍य होना पडता है , इनकी प्रतिष्‍ठा पर भी आंच आती है।

कुंभ लग्‍न की कुंडली के अनुसार शुक्र चतुर्थ और नवम भाव का स्‍वामी है और यह जातक के मातृ पक्ष और हर प्रकार की छोटी बडी संपत्ति , स्‍थायित्‍व के साथ साथ भाग्‍य आदि का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए कुंभ लग्‍नवालों के हर प्रकार के संपत्ति का उनकी माता या भाग्‍य से संबंध बना होता है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शुक्र के मजबूत रहने पर कुंभ लग्‍नवाले माता या भाग्‍य के सहयोग से हर प्रकार की संपत्ति का सुख प्राप्‍त कर लेते हैं और स्‍थायित्‍व की मजबूती पाते हैं। पर जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शुक्र कमजोर हो तो मातृ पक्ष से कष्‍ट होता है , उनके साथ विचारों का तालमेल न होने से या भाग्‍य के साथ न देने से हर प्रकार के संपत्ति के सुख में बाधा आती है और स्‍थायित्‍व कमजोर दिखाई पडता है।

कुंभ लग्‍न की कुंडली के अनुसार बुध पंचम और नवम भाव का स्‍वामी है और यह जातक के बुद्धि , ज्ञान संतान और जीवनशैली का  प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए इस लग्‍न के जातक अपनी बुद्धि का उपयोग हमेशा जीवनशैली को सुधारने के लिए करते हैं। यही कारण है कि हमारे देश में अधिकांश चिंतकों और विचारकों ने कुंभ लग्‍न में ही जन्‍म लिया था। ये ऐसी जीवनशैली पर विश्‍वास रखते हैं , जो आनेवाली पीढी को अधिक सक्षम बना सके। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बुध के मजबूत रहने पर ऐसे जातकों की अपनी बुद्धि , ज्ञान की मजबूती के साथ साथ संतान के मामलों की मजबूती भी देखने को मिलती है , इनकी जीवनशैली मजबूत होती है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बुध के कमजोर रहने पर जातक खुद तो दिमाग से कमजोर होता ही है , संतान पक्ष से भी बडी उम्‍मीद नहीं रख पाता और उसकी जीवनशैली में सुधार नहीं हो पाता।

कुंभ लग्‍न की कुंडली के अनुसार बृहस्‍पति द्वितीय और एकादश भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के धन , कोष , लाभ के मामलों का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए कुंभ लग्‍न के जातकों के धन कोष का लाभ से और लाभ का धन कोष से संबंध बना होता है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बृहस्‍पति के मजबूत होने पर कुंभ लग्‍न के जातक संसाधन वाले परिवार में जन्‍म लेते हैं , जिससे इन्‍हें लाभ को लेकर कोई चिंता नहीं होती। सतत लाभ से इनका कोष मजबूत बना होता है। इसके विपरीत , जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बृहस्‍पति के कमजोर होने पर कुंभ लग्‍नवाले जातक के समक्ष संसाधन हीनता की स्थिति होती है , जिससे इनका लाभ प्रभावित होता है और इनके कोष पर बुरा प्रभाव पडता है।

कुंभ लग्‍न की कुंडली के अनुसार शनि प्रथम और द्वादश भाव का स्‍वामी होता है यानि यह जातक के शरीर , व्‍यक्तित्‍व , खर्च और बाहरी संदर्भों आदि मामलों का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए इस लग्‍नवाले जातकों की अपने स्‍वास्‍थ्‍य या व्‍यक्तित्‍व को मजबूती देने में अधिक से अधिक खर्च करने की प्रवृत्ति होती है । जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शनि के मजबूत रहने पर ऐसे जातकों का स्‍वास्‍थ्‍य अच्‍छा रहता है , खर्च शक्ति के बने होने से और खाने पीने के सुख से आत्‍मविश्‍वास में बढोत्‍तरी होती है। पर जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शनि के कमजोर रहने पर मकर लग्‍नवालों के स्‍वास्‍थ्‍य में कमजोरी बनी रहती है , खर्चशक्ति की कमी से आत्‍मविश्‍वास कमजोर होता है।

बुधवार, 16 फ़रवरी 2011

मकर लग्‍नवालों के सभी संदर्भों का आपस में सहसंबंध ....

आसमान के 270 डिग्री से 300 डिग्री तक के भाग का नामकरण मकर राशि  के रूप में किया गया है। जिस बच्‍चे के जन्‍म के समय यह भाग आसमान के पूर्वी क्षितिज में उदित होता दिखाई देता है , उस बच्‍चे का लग्‍न मकर माना जाता है। मकर लग्‍न की कुंडली के अनुसार मन का स्‍वामी चंद्र सप्‍तम भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के घर गृहस्थी का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए मकर लग्‍न के जातकों के मन को पूर्ण तौर पर संतुष्‍ट करने वाले संदर्भ घर गृहस्‍थी ही होते हैं। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में चंद्र के मजबूत रहने पर ऐसे जातकों की घर गृहस्‍थी का माहौल सुखद होता है।जबकि विपरीत स्थिति हो तो घर गृहस्‍थी का माहौल कष्‍टकर बना होता है।

मकर लग्‍न की कुंडली के अनुसार समस्‍त जगत में चमक बिखेरने वाला सूर्य अष्‍टम भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के रूटीन और जीवनशैली का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए अपने नाम यश को फैलाने के लिए मकर लग्‍न के जातक जीवनशैली को मजबूत बनाए रखने में रूचि लेते हैं। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में सूर्य के मजबूत रहने से इनकी जीवनशैली बहुत ही उत्‍तम कोटि की और अनुकरणीय होती है , जबकि जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में सूर्य के कमजोर रहने इन्‍हें अपनी जीवनशैली से कष्‍टकर समझौता करने को बाध्‍य होना पडता है।

मकर लग्‍न की कुंडली के अनुसार मंगल चतुर्थ और एकादश भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के मातृ पक्ष , हर प्रकार की संपत्ति , स्‍थायित्‍व और लाभ का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए इस लग्‍न के जातकों के लाभ में मातृ पक्ष , किसी प्रकार की संपत्ति या स्‍थायित्‍व का सहसंबंध बना होता है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में मंगल के मजबूत रहने पर माता से इनके संबंध अच्‍छे बने होते हैं , ये हर प्रकार की संपत्ति और स्‍थायित्‍व का सुख प्राप्‍त करते हैं। विपरीत स्थिति में यानि जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में मंगल के कमजोर रहने पर मातृ पक्ष से संबंधित समस्‍याएं बनी होती हैं , हर प्रकार की संपत्ति कष्‍ट का कारण बनती हैं और स्‍थायित्‍व कमजोर बने होने से लाभ में बाधाएं आती हैं।

मकर लग्‍न की कुंडली के अनुसार शुक्र पंचम और दशम भाव का स्‍वामी है और यह जातक के बुद्धि , ज्ञान , संतान , पिता और सामाजिक राजनीतिक स्थिति आदि का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए मकर लग्‍नवालों के प्रतिष्‍ठा पक्ष को मजबूती देने में अपने बुद्धि , ज्ञान या संतान की बडी भूमिका होती है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शुक्र के मजबूत रहने पर मकर लग्‍नवाले अपने बुद्धि ज्ञान से कैरियर को मजबूती देते हैं । इनके सामाजिक राजनीतिक महत्‍व को बढाने में संतान भी सहयोगी सिद्ध होते हैं , पर जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शुक्र कमजोर हो तो बुद्धि ज्ञान की कमी से अपना कैरियर तो बाधित होता ही है , संतान पक्ष के काम भी मनोनुकूल ढंग से नहीं हो पाते।

मकर लग्‍न की कुंडली के अनुसार बुध षष्‍ठ और नवम भाव का स्‍वामी है और यह जातक के भाग्‍य और झंझट का  प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए इस लग्‍न के जातकों के झंझट को दूर करने में भाग्‍य की बडी भूमिका होती है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बुध के मजबूत रहने पर ऐसे जातकों के झंझटों को हल करने में भाग्‍य बहुत बडी भूमिका निभाता है , किसी संयोग से उनके काम बन जाते हैं। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बुध के कमजोर रहने पर दुर्भाग्‍य की भूमिका होने से मकर लग्‍नवालों के झंझट में बडी बडी समस्‍याएं आती हैं।

मकर लग्‍न की कुंडली के अनुसार बृहस्‍पति तृतीय और द्वादश भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के भाई , बहन , बंधु , बांधव , खर्च और बाहरी संदर्भों का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए मकर लग्‍न के जातकों के खर्च के साथ भाई बहन , बंधु बांधवों का संबंध बना होता है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बृहस्‍पति के मजबूत होने पर मकर लग्‍न के जातकों की खर्च शक्ति मजबूत होती है , जिसका फायदा इनके भाई , बहन , बंधु बांधव उठाते हैं। इन्‍हें देशाटन का भी बडा शौक होता है। इसके विपरीत , जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बृहस्‍पति के कमजोर होने पर मकर लग्‍नवाले जातकों की खर्च शक्ति कमजोर होती है , जिसके कारण उन्‍हें भाई , बहन , बंधु बांधवों का सहयोग लेने की आवश्‍यकता होती है। इनका बाहरी संदर्भ भी बहुत कमजोर होता है।

मकर लग्‍न की कुंडली के अनुसार शनि प्रथम और द्वितीय भाव का स्‍वामी होता है यानि यह जातक के शरीर , व्‍यक्तित्‍व , धन , कोष आदि मामलों का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए इस लग्‍नवाले जातकों के आत्‍मविश्‍वास को बढाने या घटाने में धन की बडी भूमिका होती है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शनि के मजबूत रहने पर ऐसे जातकों का स्‍वास्‍थ्‍य अच्‍छा रहता है , धन का अनायास आगम होता रहता है , जिससे आत्‍मविश्‍वास में बढोत्‍तरी होती है। पर जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शनि के कमजोर रहने पर मकर लग्‍नवालों के स्‍वास्‍थ्‍य में कमजोरी बनी रहती है , धन की कमी होती है , जिससे आत्‍मविश्‍वास कमजोर होता है।

सोमवार, 14 फ़रवरी 2011

धनु लग्‍नवालों के विभिन्‍न संदर्भों का आपस में सहसंबंध ...

आसमान के 240 डिग्री से 270 डिग्री तक के भाग का नामकरण धनु राशि  के रूप में किया गया है। जिस बच्‍चे के जन्‍म के समय यह भाग आसमान के पूर्वी क्षितिज में उदित होता दिखाई देता है , उस बच्‍चे का लग्‍न धनु माना जाता है। धनु लग्‍न की कुंडली के अनुसार मन का स्‍वामी चंद्र अष्‍टम भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के रूटीन और जीवनशैली का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए धनु लग्‍न के जातकों के मन को पूर्ण तौर पर संतुष्‍ट करने वाले संदर्भ ये ही होते हैं। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में चंद्र के मजबूत रहने पर ऐसे जातकों की जीवनशैली सुखद होती है , रूटीन सुव्‍यवस्थित होता है । जबकि विपरीत स्थिति हो तो रूटीन अस्‍तव्‍यस्‍त और जीवनशैली कष्‍टकर होती है।

धनु लग्‍न की कुंडली के अनुसार समस्‍त जगत में चमक बिखेरने वाला सूर्य नवम् भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के भाग्‍य और धर्म का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए अपने नाम यश को फैलाने के लिए धनु लग्‍न के जातक भाग्‍य के रूप में प्रकृति के नियमों को समझने और धर्म का प्रचार प्रसार करने में रूचि लेते हैं। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में सूर्य के मजबूत रहने से ये भाग्‍य का सहयोग प्राप्‍त करते हैं , धर्म और भाग्‍य से संबंधित बातों में इनका सकारात्‍मक चिंतन बना रहता है , जबकि जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में सूर्य के कमजोर रहने ये भाग्‍य की कमजोरी झेलने को बाध्‍य होते हैं और अंधविश्‍वासी होते चले जाते हैं।

धनु लग्‍न की कुंडली के अनुसार मंगल पंचम और द्वादश भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के बुद्धि , ज्ञान , संतान , खर्च और बाहरी संदर्भों का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए इस लग्‍न के जातकों के अपनी या संतान पक्ष के बौद्धिक विकास में खर्च और बाहरी स्‍थान का सहसंबंध बना होता है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में मंगल के मजबूत रहने पर ये और इनकी संतान बुद्धि के तीक्ष्‍ण होते हैं , खर्च की मजबूती रखते है और देशाटन वगैरह में रूचि भी। विपरीत स्थिति में यानि जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में मंगल के कमजोर रहने पर ये और इनके संतान सामान्‍य दिमाग के होते हैं , खर्च शक्ति की कमी से बौद्धिक विकास में बाधाएं आती हैं और बाहरी संदर्भों को कमजोर पाते हैं।

धनु लग्‍न की कुंडली के अनुसार शुक्र षष्‍ठ और एकादश भाव का स्‍वामी है और यह जातक के लाभ , प्रभाव और रोग , ऋण शत्रु जैसे झंझट आदि का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए इनके लाभ के वातावरण में बहुत झंझट होते हैं। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शुक्र के मजबूत रहने पर धनु लग्‍नवाले प्रभाव की मजबूती से झंझटों को हल करते हुए लाभ प्राप्ति का माहौल बनाते हैं। पर जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शुक्र के कमजोर रहने पर प्रभाव की कमजोरी से झंझटों को न हल कर पाने के कारण धनु लग्‍नवालों के लाभ में कमजोरी आती है।

धनु लग्‍न की कुंडली के अनुसार बुध सप्‍तम और दशम भाव का स्‍वामी है और यह जातक के पिता पक्ष , घर गृहस्‍थी के माहौल और पद प्रतिष्‍ठा का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए इस लग्‍न के जातकों की घर गृहस्‍थी का प्रतिष्‍ठा से संबंध बना होता है । जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बुध के मजबूत रहने पर ऐसे जातकों का प्रतिष्ठित परिवार में जन्‍म होता है , ससुराल पक्ष भी बहुत ही मनोनुकूल होता है और घर गृहस्‍थी के वातावरण भी प्रतिष्‍ठा में वृद्धि करनेवाला होता है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बुध के कमजोर रहने पर धनु लग्‍नवाले पिता से संबंधित मामलों का कष्‍ट प्राप्‍त करते हैं , ससुराल पक्ष का वातावरण इनके मनोनुकूल नहीं होता , घर गृहस्‍थी में भी तनाव आता है और कभी कभी बात कानून तक भी पहुंच जाती है।

धनु लग्‍न की कुंडली के अनुसार बृहस्‍पति लग्‍न और चतुर्थ भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के शरीर , व्‍यक्तित्‍व , हर प्रकार की छोटी बडी संपत्ति  और स्‍थायित्‍व का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए धनु लग्‍न के जातकों के आत्‍मविश्‍वास को बढाने में उनकी स्‍थायित्‍व की मजबूत स्थिति और हर प्रकार की संपत्ति का बउा महत्‍व होता है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बृहस्‍पति के मजबूत होने पर धनु लग्‍न के जातकों का स्‍वास्‍थ्‍य अच्‍छा रहता है , हर प्रकार की संपत्ति का सुख मिलता है , जिससे आत्‍मविश्‍वास की बढोत्‍तरी होती है। इसके विपरीत , जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बृहस्‍पति के कमजोर होने पर धनु लग्‍नवाले जातकों के स्‍वास्‍थ्‍य में समस्‍याएं आती है , हर प्रकार की छोटी बडी संपत्ति कष्‍ट देनेवाली बनती हैं और आत्‍मविश्‍वास में कमी आती है।

धनु लग्‍न की कुंडली के अनुसार शनि द्वितीय और तृतीय भाव का स्‍वामी होता है यानि यह जातक के धन , कोष , भाई , बहन , बंधु बांधवों का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए इस लग्‍नवाले जातकों के भाई , बंधुओं के धन कोष की स्थिति से संबंध बने रहने की संभावना होती है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शनि के मजबूत रहने पर ऐसे जातकों को भाई बंधु बांधव से संबंध अच्‍छा बना होता है , धन का लाभ भी प्राप्‍त होता है। पर जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शनि के कमजोर रहने पर धनु लग्‍नवालों के धन कोष की स्थिति कमजोर होती है , भाई बहनों से भी संबंध में खराबी होने से धन की स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पडता है।