शनिवार, 29 अक्तूबर 2011

चलिए आज के लिए भारतीय क्रिकेट टीम को जीत की शुभकामनाएं दे दें !!

23 अक्‍तूबर को ईडन गार्डन्स पर खेले गए पांचवें और अंतिम वनडे अंतरराष्ट्रीय मैच में भारतीय क्रिकेट टीम ने इंग्लैंड को 95 रन से हराकर सीरीज 5-0 से जीत ली और क्लीन स्वीप करके क्रिकेट प्रेमियों को दिवाली का शानदार तोहफा दिया। इस जीत से भारतीय टीम ने हाल में इंग्लैंड दौरे पर टेस्ट, वनडे और टी-20 में मिली हार का बदला भी चुकता कर दिया।

भारत की इस जीत के नायक रहे मैन ऑफ द सीरीज कप्तान महेंद्र सिंह धौनी और मैन ऑफ द मैच रविंदर जडेजा तथा आर. अश्विन। धौनी ने पहले नाबाद 75 रन की जांबाज पारी खेलकर टीम का स्कोर आठ विकेट पर 271 रन तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। उसके बाद जडेजा ने 33 रन देकर चार विकेट और आर अश्विन ने 28 रन देकर तीन विकेट झटके जिससे भारत ने इंग्लैंड को अच्छी शुरुआत का फायदा नहीं उठाने दिया और उसकी पूरी टीम 37 ओवर में 176 रन पर ढेर कर दी। इस मैच में शुरूआती दबाब के बाद भारत के जीत की भविष्‍यवाणी मैने इस पोस्‍ट में कर दी थी।

अब 29 अक्‍तूबर 2011 को भारतीय समयानुसार 8 बजे रात्रि ईडेन गार्डेन कोलकाता में इंगलैंड और भारत के मध्‍य अंतिम मैच एकमात्र ट्वेन्‍टी ट्वेन्‍टी खेला जाना है। यह दिन भी भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के लिए खुशी का होगा , क्‍यूंकि 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' के हिसाब से इस दिन की भी ग्रहों की ग्रहस्थिति भारत के पक्ष में है। कभी एकाध घंटे के लिए इंगलैंड भले ही अच्‍छा खेल ले , पर शुरू से अंत तक मैच लगभग भारतीय क्रिकेट टीम के ही पक्ष में रहेगा और काफी हद तक जीत की संभावना भी भारतीय टीम की ही होगी। चलिए एक बार फिर से भारतीय क्रिकेट टीम को जीत की शुभकामनाएं दे दें !!

बुधवार, 26 अक्तूबर 2011

भला बिना बच्‍चों के कैसी दीपावली ??

वैसे तो पूरी दुनिया में हर देश और समाज में कोई न कोई त्‍यौहार मनाए जाते हैं , पर भारतीय संस्‍कृति की बात ही अलग है। हर महीने एक दो पर्व मनते ही रहते हैं , कुछ आंचलिक होते हैं तो कुछ पूरे देश में मनाए जानेवाले। दीपावली , ईद और क्रिसमस पूरे विश्‍व में मनाए जाने वाले तीन महत्‍वपूर्ण त्‍यौहार हैं , जो अलग अलग धर्मों के लोग मनाते हैं। भारतवर्ष में पूरे देश में मनाए जानेवाले त्‍यौहारों में होली , दशहरा , दीपावली जैसे कई त्‍यौहार हैं। त्‍यौहार मनाने के क्रम में लगभग सभी परिवारों में पति खर्च से परेशान होता है , पत्‍नी व्रत पूजन , साफ सफाई और पकवान बनाने के अपने बढे हुए काम से , पर बच्‍चों के लिए तो त्‍यौहार मनोरंजन का एक बडा साधन होता है। स्‍कूलों में छुट्टियां है , पापा के साथ घूमघूमकर खरीदारी करने का और मम्‍मी से मनपसंद पकवान बनवाकर खाने की छूट है , तो मस्‍ती ही मस्‍ती है। मम्‍मी और पापा की तो बच्‍चों की खुशी में ही खुशी है। सच कहं , तो बच्‍चों के बिना कैसा त्‍यौहार ??

पर आज सभी छोटे छोटे शहरों के मां पापा बिना बच्‍चों के त्‍यौहार मनाने को मजबूर हैं। चाहे होली हो , दशहरा हो या दीपावली , किसी के बच्‍चे उनके साथ नहीं। इस प्रतियोगिता वाले दौर में न तो पढाई छोटे शहरों में हो सकती है और न ही नौकरी। दसवीं पास करते ही अनुभवहीन बच्‍चों को दूर शहरों में भेजना अभिभावकों की मजबूरी होती है , वहीं से पढाई लिखाई कर आगे बढते हुए कैरियर के चक्‍कर में वो ऐसे फंसते हैं कि पर्व त्‍यौहारों में दो चार दिन की छुट्टियों की व्‍यवस्‍था भी नहीं कर पाते। मैं भी पिछले वर्ष से हर त्‍यौहार बच्‍चों के बिना ही मनाती आ रही हूं। दशहरे में गांव चली गयी , भांजे भांजियों को बुलवा लिया , नई जगह मन कुछ बहला। पर दीपावली में अपने घर में रहने की मजबूरी थी , लक्ष्‍मी जी का स्‍वागत तो करना ही पडेगा। पर बच्‍चों के न रहने से भला कोई त्‍यौहार त्‍यौहार जैसा लग सकता है ??

पहले संयुक्‍त परिवार हुआ करते थे , तीन तीन पीढियों के पच्‍चीस पचास लोगों का परिवार , असली त्‍यौहार मनाए जाते थे। कई पीढियों की बातें तो छोड ही दी जाए , अब तो त्‍यौहारों में पति पत्‍नी और बच्‍चों तक का साथ रह पाना दूभर होता है। जबतक बच्‍चों की स्‍कूली पढाई चलती है , त्‍यौहारों में पति की अनुपस्थिति बनी रहती है , क्‍यूंकि बच्‍चों की पढाई में कोई बाधा न डालने के चक्‍कर में वे परिवार को एक स्‍थान पर शिफ्ट कर देते हैं और खुद तबादले की मार खाते हुए इधर उधर चक्‍कर लगाते रहते हैं। हमारे मुहल्‍ले के अधिकांश परिवारों में किराए में रहनेवाली सभी महिलाएं बच्‍चों की पढाई के कारण अपने अपने पतियों से अलग थी। पर्व त्‍यौहारों में भी उनका सम्मिलित होना कठिन होता था , किसी के पति कुछ घंटों के लिए , तो किसी के दिनभर के लिए समय निकालकर आ जाते। मैने खुद ये सब झेला है , भला त्‍यौहार अकेले मनाया जाता है ??

बच्‍चों की शिक्षा जैसी मौलिक आवश्‍यकता के लिए भी सरकार के पास कोई व्‍यवस्‍था नहीं है। पहले समाज के सबसे विद्वान लोग शिंक्षक हुआ करते थे , सरकारी स्‍कूलों की मजबूत स्थिति ने कितने छात्रों को डॉक्‍टर और इंजीनियर बना दिया था। पर समय के साथ विद्वान दूसरे क्षेत्रों में जाते रहें और शिक्षकों का स्‍तर गिरता चला गया। शिक्षकों के हिस्‍से इतने सरकारी काम भी आ गए कि सरकारी स्‍कूलों में बच्‍चों की पढाई पीछे होती गयी।सरकार ने कर्मचारियों के बच्‍चों के पढने के लिए केन्‍द्रीय स्‍कूल भी खोलें , उनमें शिक्षकों का मानसिक स्‍तर का भी ध्‍यान रखा , पर अधिकांश क्षेत्रों में खासकर छोटी छोटी जगहों के स्‍कूल पढाई की कम राजनीति की जगह अधिक बनें।  इसका फायदा उठाते हुए प्राइवेट स्‍कूल खुलने लगे और मजबूरी में अभिभावकों ने बच्‍चों को इसमें पढाना उचित समझा। आज अच्‍छे स्‍कूल और अच्‍छे कॉलेजों की लालच में बच्‍चों को अपनी उम्र से अधिक जबाबदेही देते हुए हम दूर भेज देते हैं। अब नौकरी या व्‍यवसाय के कारण कहीं और जाने की जरूरत हुई तो पूरे परिवार को ले जाना मुनासिब नहीं था। इस कारण परिवार में सबके अलग अलग रहने की मजबूरी बनी रहती है।

वास्‍तव में अध्‍ययन के लिए कम उम्र के बच्‍चों का माता पिता से इतनी दूर रहना उनके सर्वांगीन विकास में बाधक है , क्‍यूंकि आज के गुरू भी व्‍यावसायिक गुरू हैं , जिनका छात्रों के भविष्‍य या चरित्र निर्माण से कोई लेना देना नहीं। इसलिए उन्‍हें अपने घर के आसपास ही अध्‍ययन मनन की सुविधा मिलनी चाहिए।  यह सब इतना आसान तो नहीं , बहुत समय लग सकता है , पर पारिवारिक सुद्ढ माहौल के लिए यह सब बहुत आवश्‍यक है। इसलिए आनेवाले दिनों में सरकार को इस विषय पर सोंचना चाहिए।  मैं उस दिन का इंतजार कर रही हूं , जब सरकार ऐसी व्‍यवस्‍था करे , जब प्राइमरी विद्यालय में पढने के लिए बच्‍चे को अपने मुहल्‍ले से अधिक दूर , उच्‍च विद्यालय में पढने के लिए अपने गांव से अधिक दूर , कॉलेज में पढने या कैरियर बनाने के लिए अपने जिले से अधिक दूर जाने की जरूरत नहीं पडेगी। तभी पूरा परिवार साथ साथ रह पाएगा और आनेवाले दिनों में पर्व त्‍यौहारों पर हम मांओं के चेहरे पर खुशी आ सकती है , भला बिना बच्‍चों के कैसी दीपावली ??

आप सबकी .. आपके परिवार की और आपके मित्रों की दीपावली मंगलमय हो !!!!!! .. संगीता पुरी




मंगलवार, 25 अक्तूबर 2011

भारतीय टीम के लिए मैच का शुरूआती एक घंटा बहुत बुरा होगा !!!!!

ज्‍योतिष विज्ञान है या अंधविश्‍वास , बुद्धिजीवियों द्वारा तय न किए जाने से आम लोगों की स्थिति बहुत ही कष्‍टमय हो गयी है। पर पूरा जीवन ग्रहों के पृथ्‍वी पर पडनेवाले प्रभाव के अवलोकण के पश्‍चात् मैं इतना तो निशिचत तौर पर कह सकती हूं कि ग्रहों का प्रभाव हर क्षेत्र पर पडता है। अपने अनुभव के आधार पर ब्‍लॉग पर मैं समय समय पर मौसम , शेयर बाजार और क्रिकेट से संबंधित भविष्‍यवाणियां करती आ रही हूं। हां , यह बात अवश्‍य है कि इस प्रकार की गणनाओं में पूरे ध्‍यानसंकेन्‍द्रण की आवश्‍यकता होती है , क्‍यूंकि थोडी भी चूक से और एकाध ग्रहों पर ध्‍यान न दे पाने से चूक होने की संभावना बनी रहती है। और वैसी चूक होने पर मुझे व्‍यंग्‍यवाण झेलने पडते हैं। इसलिए अब पूरी निश्चिंति के बाद ही किसी तरह की भविष्‍यवाणी करने का प्रयास करती हूं। सबसे बडी बात है कि ग्रहीय आधार पर किए गए मैच के मेरे विश्‍लेषण में सिर्फ हार और जीत की चर्चा नहीं होती , जो संभावनावाद के हिसाब से तुक्‍का मानी जा सकती है। इसमें मैच के आठ घंटे के दौरान अच्‍छे और बुरे समयांतराल की चर्चा की जाती है , जब कोई टीम अच्‍छा या बुरा खेलती है।

व्‍यस्‍तता के कारण काफी दिनों से ब्‍लॉग जगत में मेरी सक्रियता कम हो गयी थी , एक डेढ वर्ष से अपने इस ब्‍लॉग पर कभी कभार ही पोस्‍ट डाल पा रही थी। बहुत दिनों बाद इस वर्ष 3 सितंबर 2011 को मैंने ग्रहीय आधार पर भारत और इंगलैंड के मध्‍य होनेवाले क्रिकेट मैच का विश्‍लेषण किया। उसमें शीर्षक में ही मैने लिखा था कि इंगलैंड की टीम के खिलाफ खेले जानेवाले एकदिवसीय मैचों में भी भारतीयों का संघर्ष स्‍पष्‍ट दिखता है। 3 सितंबर को होने वाले मैच के लिए उसी लेख में मैने लिखा था कि साढे छह बजे के बाद ही ग्रहों की स्थिति भारतीय टीम के पक्ष में नहीं रहेगी , इस कारण इसका प्रदर्शन मनोनुकूल नहीं रहेगा , इस कारण लगभग आठ बजे तक भारतीय टीम पूरे दबाब में रहेगी। सचमुच साढे छह बजे तक इंडिया की टीम का प्रदर्शन बहुत बढिया रहा , मैच उसके पक्ष में हो सकता था , लेकिन उसके थोडी ही देर बाद बारिश के कारण मैच को रद्द करना पडा और भारतीय टीम को निराशाजनक समाचार मिले।

इसी प्रकार 6 सितंबर के लेख में मैने  साढे नौ बजे रात्रि से लेकर साढे ग्‍यारह बजे तक ग्रहों की प्रतिकूल स्थिति की चर्चा की थी और आपको यह जानकर ताज्‍जुब होगा कि इसी दौरान पुन: बारिश के कारण मैच को रद्द करना पडा और  इंग्लैंड क्रिकेट टीम के द्वारा अंतर्राष्ट्रीय मुकाबले में भारत को डकवर्थ लुईस नियम के तहत तीन विकेट से हराए जाने की घोषणा हुई । । और 11 सितंबर के लेख में लिखा गया था कि  दूसरी पारी में इंगलैंड की शुरूआत भी सामान्‍य ही रहेगी , अंत अंत तक उनके लिए काफी अनुकूल वातावरण बनेगा और काफी हद तक जीत की उम्‍मीद उसी की की जा सकती है। ग्रहों का खेल देखिए , बारिश ने पुन: ऐसा माहौल बनाया कि 
डकवर्थ लुईस नियम  इंगलैंड के हिस्‍से ही जीत आयी।  

जब इंगलैंड की टीम भारत पहुंची और पहला मैच खेलना शुरू किया तो मुझे इसकी जानकारी देर से मिली , इस कारण पहले मैच में कोई संभावना व्‍यक्‍त न कर सकी। दूसरे मैच के बारे में मैने 17 अक्‍तूबर को पोस्‍ट लिखी , जिसमें बताया कि  खासकर शाम के 7 बजे से 9 बजे तक ग्रहों की स्थिति इंगलैंड की टीम के पक्ष में नहीं रहेगी , जिसका फायदा भारतीय क्रिकेटरों को मिलेगा और इस तरह इस मैच में भारत के जीत की ही संभावना दिखती है। सचमुच 7 से 9 बजे के मध्‍य ही भारतीय टीम की जीत निश्चित हुई। पुन: 20 अक्‍तूबर की पोस्‍ट में लिखा गया कि आरंभ के तीन घंटे तक आज की ग्रह स्थिति इंगलैंड के बिल्‍कुल प्रतिकूल दिखेगी , हालांकि उसके बाद उसके खेल में थोडा सुधार दिखेगा , जो भारतीय टीम के संघर्ष को कुछ बढा सकता है। पर ग्रहीय स्थिति से बिल्‍कुल अंत अंत तक खेल के भारतीय टीम के पक्ष में जाने की उम्‍मीद दिखती है, इसलिए आज भी भारतीय टीम की जीत की उम्‍मीद की जा सकती है।  इस दिन बिल्‍कुल अंतिम ओवर में भारत की जीत पक्‍की हुई। पुन: 23 अक्‍तूबर की पोस्‍ट का  शीर्षक ही था .. पहली पारी के अंत में भारत की स्थिति मजबूत बनेगी !!! .. और इस मैच में पहली पारी में बल्‍लेबाजी कर रही टीम 4 ओवर खेले बिना ही ऑल आउट हो गयी।  

आज यानि 25 अक्‍तूबर 2011  को भारत और इंगलैंड के मध्‍य हो रही इस श्रृंखला का अंतिम मैच होना निश्चित है। यह मैच इडेन गार्डेन कलकत्‍ता में भारतीय समयानुसार ढाई बजे दिन में शुरू होगा। यदि इस समय मैच शुरू होता है तो भारतीय टीम के लिए शुरूआती एक घंटा बहुत ही गडबड होगा , पर उसके बाद क्रमश: खेल में सुधार आएगा और अंत तक स्थिति सामान्‍य हो जाएगी। दूसरी पारी के शुरूआत में ही दो घंटे यह काफी मजबूत स्थिति में बनी रहेगी , और इसी वक्‍त बहुत हद तक भारतीय टीम की जीत तय हो सकती है। हां , यदि इस वक्‍त मजबूती न बन पायी तो इस मैच में हारने की बात हो सकती है , जिसकी संभावना बहुत थोडी है , इसलिए भारतीय क्रिकेट प्रेमी निराश न हों। आज भी भारतीय टीम को शुभकामनाएं दें कि शुरूआती बिगडे हुए माहौल का तनाव न लें और अच्‍छी तरह अपनी पारी खेल सके।

सोमवार, 24 अक्तूबर 2011

आपको जन्‍मदिन की बहुत बहुत बधाई मम्‍मी !!

ज्योतिष से जुड़े होने के कारण पापाजी की चर्चा अक्सर कर लेती हूँ , पर मम्मी को आज पहली बार याद कर रही हूँ . बिहार के नवादा जिले के एक गांव खत्रिया माधोपुर के एक समृद्ध परिवार में सत्‍तर वर्ष पूर्व कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी यानि धनतेरस की संध्या  स्व करतार नारायण कपूर की पुत्री के रुप में साक्षात लक्ष्मी का जन्‍म हुआ। बचपन से विवाह होने तक पांच भाइयों और पांच भतीजों के मध्य अकेली होने के कारण काफी लाड प्यार से पालन पोषण होता रहा . किन्तु जैसा कि हर बेटियों का प्रारब्ध है, उन्‍होने जन्म वहां लिया , परंतु रोशनी फैलाने वह हमारे घर पहुच गयी।

शायद ही किसी दार्शनिक या विचारक का दाम्पत्य जीवन इतना सफल रहता है , जितना कि मेरे पापाजी का रहा । इसका सारा श्रेय मेरी मम्मी की कर्तब्यपरायणता , सहनशीलता , उदारता और त्याग को ही जाता है। पापाजी चालीस वर्षों तक अपनी ज्योतिष की साधना में लीन रहें , उनको कोई व्यवधान न देकर उन्होनें घर-गृहस्थी की सारी जवाबदेही अपने कंधों पर उठायी। सारे जीवन में अधिकारों की कोई चिंता नहीं , केवल कर्तब्य निभाती रही , चाहे सास-ससुर हों या देवर-ननद या देवरानिया-जिठानिया । भतीजे-भतीजीयों और बेटे-बेटियों की जिम्‍मेदारी तो थी ही उनकी। 

सभी बच्चों के उचित लालन-पालन करने , शिक्षा-दीक्षा देने में वे सफल हुईं। मैं जैसा समझती हॅ , इसका सबसे बड़ा कारण माना जा सकता है , उनके गजब के दृष्टिकोण को । सकारात्मक दृष्टिकोण के बारे में लोग कहते हैं - ‘गिलास में आधा पानी हो तो उसे आधा गिलास खाली न कहकर आधा गिलास भरा कहो।’ पर मेरी मम्मी तो दस प्रतिशत भरे गिलास को भी गिलास में पानी है , कहना पसंद करेगी। फूल की प्रशंसा तो हर कोई करता है , काटों की भी प्रशंसा करना कोई मेरी मम्मी से सीखे। किसी के हजारो खामियों को छोड़कर उसके गिने-चुने गुणों की प्रशंसा करते ही मैंने उन्हें देखा और सुना है। 

गाँव में न जाने कितने सास-ससुर इनकी जैसी बहू पाने , कितने ही नौजवान इनकी जैसी पत्नी या भाभी पाने , कितने बच्चे इनकी जैसी माँ और चाची , मामी पाने के लिए आहें भरते रह गए , पर जिन्हें आसानी से सुख मिल जाता है , वो कहाँ कभी उसकी कद्र कर पाता है। आज जब उम्र के उस मोड़ पर मैं खड़ी हूँ , जहाँ वे बीस वर्ष पूर्व वे खड़ी थीं , मैं उनकी महानता को नजरअंदाज नहीं कर पा रही । मेरा आदर्श मेरी माँ है और कोई नहीं , मैं उनके जैसी मेहनती, सहनशील और कर्तब्यपरायण बनना चाहती हूँ । मैं ईश्वर से प्रार्थना करती हूँ कि मुझे उतनी शक्ति प्रदान करे। ईश्‍वर आपको लंबी आयु और हर सुख दे मम्‍मी , आपको जन्‍म दिन की बहुत बहुत बधाई !!!!!!!

रविवार, 23 अक्तूबर 2011

पहली पारी के अंत में भारत की स्थिति मजबूत बनेगी !!!

अभी अभी एक फोन राजस्‍थान के सीकर से आ गया , जानकारी देने के लिए कि आज क्रिकेट का मैच है और अभी तक मैने अपने ब्‍लॉग पर कोई भविष्‍यवाणी नहीं की। दरअसल काम की भीड में मुझे याद भी नहीं रह पाया कि आज ही क्रिकेट मैच है। पिछले मैच में मैने अपने ब्‍लॉग पर लिखा था कि आज यानि 20 अक्‍तूबर 2011 को इसी श्रृंखला का तीसरा एकदिवसीय मैच पंजाब क्रिकेट एसोशिएशन स्‍टेडियम मोहाली , चंडीगढ में भारतीय समयानुसार ढाई बजे शुरू होना तय है। शुरूआती दौर में ही यानि लगभग आरंभ के तीन घंटे तक आज की ग्रह स्थिति इंगलैंड के बिल्‍कुल प्रतिकूल दिखेगी , हालांकि उसके बाद उसके खेल में थोडा सुधार दिखेगा , जो भारतीय टीम के संघर्ष को कुछ बढा सकता है। पर ग्रहीय स्थिति से बिल्‍कुल अंत अंत तक खेल के भारतीय टीम के पक्ष में जाने की उम्‍मीद दिखती है, इसलिए आज भी भारतीय टीम की जीत की उम्‍मीद की जा सकती है।

दूसरी पारी के लिए लिखे ये वाक्‍य बिल्‍कुल सही हुए। यह पहला मौका नहीं है , जब क्रिकेट मैच के बारे में मेरी भविष्‍यवाणी सही हुई है , अधिकांश समय घंटे और मिनट तक का मेरा आकलन सही होता है। एक पाठक ने यह प्रश्‍न भी किया कि क्‍या इस दुनिया में होनेवाली एक एक घटना निश्चित है ? इस प्रश्‍न का जबाब मेरे पास भी नहीं , पर ज्‍योतिष की जानकारी से हम केवल इतना बता सकते हैं कि कोई घटना या किसी घटना का फल किसी के लिए शुभ समय में होना निश्चित हो , तो वह शुभ होता है , अन्‍यथा अशुभ।

इंगलैंड के दौरे में भी एकदिवसीय मैच में जीत के लिए भारतीय क्रिकेट टीम की मजबूती कम न थी। पर समय यानि ग्रह उनके पक्ष में नहीं थे , मैने पहले मैच में ही इस बात की जानकारी अपने ब्‍लॉग में दे दी थी। उन्‍होने एकदिवसीय मैच में संतुलित ढंग से खेला भी , पर लगभग प्रतिदिन बारिश ने ऐन मौके पर उनको हार का सामना करने को विवश किया। इस बार की ग्रहस्थिति भारतीय टीम के पक्ष में है , इसलिए उन्‍हे ऐसे दुर्योग का सामना करना नहीं पड रहा है। इसलिए प्रतिदिन इन्‍हें अपनी मजबूती का फल मिल रहा है। जिस दिन ग्रहस्थिति इंगलैंड के पक्ष में हो जाती है , उनके सामने कुछ कठिन परिस्थितियां बन जाती हैं।

जहां तक आज यानि 23 अक्‍तूबर 2011 का सवाल है , अधिक सूक्ष्‍म गणना न कर पाते हुए , क्‍यूंकि अभी साढे बारह बजे मुझे फिर बाहर निकलना है , भी इतना कहना आसान है कि पहली पारी में भारत के ग्रह उसका बहुत अधिक साथ दे रहे हैं , इसलिए पहली पारी में यह बहुत मजबूत रहेगा। दूसरी पारी दोनो देशों के लिए सामान्‍य तौर के हैं, इसलिए पहली पारी में अधिक मजबूती बन जाती है , तो भारत के लिए जीत आसान रहेगी , यदि उस समय वो मजबूत न हो सका तो जीत में कुछ बाधा आ सकती है , जिसकी संभावना बहुत कम दिखाई देती है। 

चलिए आज भी भारतीय टीम को जीत के लिए शुभकामनाएं दे दे !!!!!!!!!