शनिवार, 4 अगस्त 2012

नजर का असर ..... अतिथि पोस्‍ट .... श्री विद्या सागर महथा

कुणाल की आंखों पर उसकी सौतेली मां की नजर थी , कारण यह था कि उसकी आंखें बहुत ही खूबसूरत थी और उसकी तथाकथित मां उन आंखों पर मोहित थी। लाख कोशिश के बाद भी जब वह उन आंखों को हासिल न कर सकी तो अपने पति से उसकी शिकायत कर , उसपर छेड़खानी का इलजाम लगाकर उन आंखों को निकलवा लेने से भी बाज नहीं आयी। खड्गसिंह डाकू की नजर बाबा भारती के घोड़े पर थी , किसी भी तरह वह उस घोड़े को प्राप्त करना चाहता था। इसी क्रम में वह अपंग और असहाय बनने का ढोंग कर गन्तव्य तक जाने के लिए सहारा मांगकर बाबा भारती के घोड़े पर बैठा और उन्हें धक्का देकर गिराकर घोड़े को लेकर चंपत हो गया।

चोर उचक्के की नजर उस धन पर होती है , जिसे आसानी से झपटा जा सके। डाकू की नजर वैसे धन पर होती है , जिसे बंदूक के बल पर या शक्ति प्रदर्शन के साथ जबर्दस्ती हासिल किया जा सके। नेताओं की नजर हमेशा कुर्सी पर होती है , कुर्सी पर बैठे नेताओं को हराया जाए तथा खुद उसपर बैठा जाए , इसी तिकड़म में वे लगे होते हैं। पुलिस की नजर क्रिमिनल पर तथा इनकम टैक्सवालों की नजर टैक्स की चोरी करनेवालों पर होती है। मनचलों की नजर सुंदर युवतियो पर होती है। इन्द्र की नजर तप करनेवालों पर होती थी , किसी भी हालत में उनकी तपस्या पूरी न हो , ताकि उनकी गद्दी सुरक्षित रहे । इतना ही नहीं ग्रहों की भी दृष्टि की चर्चा शास्त्रों में की गयी है। मान्यता है कि शनि की दृष्टि बुरी होती है , जबकि बृहस्पति की दृष्टि को शुभ कहा गया है। अब प्रश्न यह उठता है कि यह दृष्टि या नजर वास्तव में अच्छी होती है या बुरी ?

चोर , डकैत या अपराधी पुलिस की नजर से बचना चाहते हैं। रिश्वतखोर बड़े अफसर , नौकरशाह या नेता सी बी आई या मिडिया की नजरों से बचना चाहते हैं। कर्जदार साहूकार या महाजन की नजरों से बचना चाहते हैं। लेकिन अपने से बड़े , शक्तिशाली और सक्षम व्यक्ति से कोई काम निकालना हो , तो सभी अपने ऊपर कृपादृष्टि बनाए रखने के लिए गिड़गिड़ाकर अनुरोध करते हुए देखे जाते हैं। ‘ महाशय , आपके ऑफिस में मेरा लड़का काम करता है , कृपया उसपर नजर रखिएगा। ’ इस तरह लोग कभी किसी की नजर के मुहॅताज होते हैं , तो कभी किसी की नजर से बचना चाहते हैं। स्पष्ट है , उन नजरों से हम बचना चाहते हैं , जिनसे हमारे बुरे होने की आशंका बनी होती है। इसके विपरीत , जिन कृपादृष्टि में हमारा कल्याण छुपा होता है , उनके हम आकांक्षी होते हैं।

अशिक्षित लोगों के बीच , गांवों या देहातों में नजर का मतलब केवल बुरी नजरों से ही होता है , जिससे किसी के सिर्फ अहित होने की ही संभावना है , किन्तु अज्ञानतावश उन नजरों को ही कसूरवार समझा जाता है , जिनमें किसी प्रकार की शक्ति नहीं होती , उनकी नीयत भी बुरी नहीं होती। वास्तव में वे शक्तिहीन होते हैं तथा अनेक प्रकार की शक्तियों से निरंतर घिरे होने के कारण उनका आत्मविश्वास मरा होता है। वे दूसरों से नजर मिलाने की हिम्मत भी नहीं कर पाते , फिर भी उनके किसी काम को संदेह की दृष्टि से देखा जाता है , इससे उनमें घबराहट पैदा होती है , उनसे संबंधित किसी प्रश्न को भी पूछे जाने पर वे उसका उत्तर अनाप-शनाप ढंग से ही देते हैं तथा अधिक छानबीन करने होने पर मैदान छोड़कर भाग भी जाते हैं। ऐसी हालत में समाज उनके किसी भी कार्यवाही को गलत मान लेता है तथा उन्हें कसूरवार समझ बैठता है।

समाज में इस मानसिकता की औरतें डायन कहलाती हैं , जिनके चेहरे पर असमय ही पहाड़ जैसी पीड़ा को झेलने की छाया टपकती रहती है। वे शक्तिहीन , असहाय और निरीह होती है। किसी शुभ अवसर पर लोग उसकी उपस्थिति को बुरा समझने लगते हैं। छोटे सुंदर बच्चों को भी उनकी नजर से बचाने का प्रयास किया जाता है। लेकिन इन बातों में कोई दम नहीं है , असहाय शक्तिहीन की नजर घातक नहीं होती , वास्तव में लोगों को किसी शक्तिशाली की बुरी नजर से बचना चाहिए।

जब मैं ढाई वर्ष का था , भयंकर रुप से चेचक के प्रकोप से ग्रस्त होने के कारण लगभग मरनासन्न स्थिति में पड़ा हुआ था । उन्हीं दिनों मेरी माताजी भी लम्बे समय तक टायफायड से ग्रस्त होने के कारण बुरी तरह कमजोर हो चुकी थी , अपने को सॅभालना ही मुश्किल था , मेरी देख-रेख कर पाने का कोई प्रश्न ही नहीं था । इस हालत में मेरे पिताजी ने मेरी देखभाल के लिए ऐसी औरत को नियुक्त किया , जो समाज की नजरों में उपेक्षिता एक डायन थी , उसी की सतत् सेवा से मुझे पुनर्जन्म मिला। बड़े होने के बाद भी तथाकथित कई डायनों से मिला , सबकी नजरों में मुझे शक्तिहीनता , बदनामी और विवशता से संश्लिष्ट गहरी पीड़ा के सिवा कुछ भी देखने को नहीं मिली ।

सुंदर ताजमहल पर करोड़ों की नजर पड़ चुकी है , किन्तु सैकड़ों वर्षों बाद भी वह वही सुंदरता बिखेर रहा है। फिल्मी हीरो-हीरोइनों की सुंदरता और नाज-नखरों पर करोड़ों की नजरें पड़ती हैं। क्रिकेट के मैदान में खिलाडि़यों के खेल पर करोड़ो की अच्छी और बुरी निगाहे पड़ती हैं। इन नजरों में जहां एक ओर अपने देश के खिलाडि़यो के लिए शुभकामनाएं व्यकत होती हें , तो दूसरी ओर प्रतिद्वंदी देश के खिलाडि़यों के लिए बुरी नजर का इस्तेमाल होता है , परंतु होता वही है , जो मंजूरे खुदा होता है। जिन हीरो-हीरोइनों , क्रिकेटखिलाड़ी या जड़-चेतन पर उनकी विशेषताओं की वजह से अधिक से अधिक नजरें पड़ती हैं , वह उतना ही लोकप्रिय हो जाता है। कश्मीर की वादियों पर देशी-विदेशी करोड़ो पर्यटकों की नजरें टिकी होती हैं , परंतु उसका कुछ नहीं बिगड़ता , उसकी सुंदरता तो अक्षुण्ण है। यदि नजरों से ही बिगड़ने की बात होती , तो देश-रक्षा के लिए सीमा में सैनिको की जगह डायनों की नियुक्ति न की जाती।

व्यक्ति की विशेषता के साथ उसकी विनम्रता करोड़ो लोगों की दुआ हासिल करने में समर्थ होती है। उसकी लोकप्रियता को दिन दूनी रात चैगुनी गति से बढ़ा पाने में समर्थ होती है , विपरीत स्थिति में यानि अहंकारयुक्त विशेषता उतना लोकप्रिय नहीं हो पाता , क्योंकि अहंकार से उसकी कार्यक्षमता बाधित होती है। सुंदरता या विशेषता पर नजर स्वाभाविक आकर्षण की वजह से होता है , उसे प्राप्त करने की इच्छा या लोलुपता , ईर्ष्‍या आदि उसके नुकसान का कारण बनती हैं। इस प्रकार जैसा कि मैं पहले भी लिख चुका हूं , शक्तिशाली व्यक्ति की नजर से बचने की चेष्टा करनी चाहिए , किन्तु कमजोर , सामर्थ्‍यहीन और निरीह व्यक्ति की नजरों से नुकसान नहीं होता। उन्हें मनहूस या डायन समझकर प्रताडि़त करना या उन्हें कसूरवार समझना गलत है। उनकी उपेक्षा करना बड़प्पन और मानवता के खिलाफ तथा अंधविश्वास है।

मेरे पिताजी श्री विद्या सागर महथा जी के द्वारा 

मंगलवार, 31 जुलाई 2012

भगवान महाकाल के ये रूप आपने नहीं देखे होंगे ... सौजन्‍य दैनिक भास्‍कर

महाकालेश्‍वर के उद्भव के बारे में मान्‍यता है कि भगवान शिव के परम भक्त उज्‍जयिनी के राजा चंद्रसेन को एक बार उनके शिवगणों में प्रमुख मणिभद्र ने तेजोमय 'चिंतामणि' प्रदान की, जिसे गले में धारण देखकर दूसरे राजाओं ने उसे पाने के प्रयास में आक्रमण कर दिया। शिवभक्त चंद्रसेन भगवान महाकाल की शरण में जाकर ध्यानमग्न हो गया। जब चंद्रसेन समाधिस्थ था तब वहाँ कोई गोपी अपने पांच वर्ष के छोटे बालक को साथ लेकर दर्शन हेतु आई। राजा चंद्रसेन को ध्यानमग्न देखकर बालक भी शिव की पूजा हेतु प्रेरित हुआ। कुछ देर पश्चात क्रुद्ध हो माता ने उस बालक को पीटना शुरू कर दिया और समस्त पूजन-सामग्री उठाकर फेंक दी। ध्यान से मुक्त होकर बालक चेतना में आया तो उसे अपनी पूजा को नष्ट देखकर बहुत दुःख हुआ। अचानक उसकी व्यथा की गहराई से चमत्कार हुआ। भगवान शिव की कृपा से वहाँ एक सुंदर मंदिर निर्मित हो गया। मंदिर के मध्य में दिव्य शिवलिंग विराजमान था एवं बालक द्वारा सज्जित पूजा यथावत थी। उसकी माता की तंद्रा भंग हुई तो वह भी आश्चर्यचकित हो गई। राजा चंद्रसेन को जब शिवजी की अनन्य कृपा से घटित इस घटना की जानकारी मिली तो वह भी उस शिवभक्त बालक से मिलने पहुँचा। अन्य राजा जो मणि हेतु युद्ध पर उतारू थे, वे भी पहुँचे। सभी ने राजा चंद्रसेन से अपने अपराध की क्षमा माँगी और सब मिलकर भगवान महाकाल का पूजन-अर्चन करने लगे। तभी वहाँ रामभक्त श्री हनुमानजी अवतरित हुए और उन्होंने गोप-बालक को गोद में बैठाकर सभी राजाओं और उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित किया। दैनिक भास्‍कर में छपे इन तस्‍वीरों और वर्णन को आपसे शेयर करने से नहीं रोक पायी .........

हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार सावन के महीने में भगवान शिव के दर्शन करने से सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। सावन के महीने में 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करने का भी विशेष महत्व है। इन सभी ज्योतिर्लिंगों का अपनी एक अलग विशेषता है। इन सभी में एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर की महिमा देखते ही बनती है।

यह ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश की धार्मिक राजधानी कहे जाने वाले उज्जैन शहर में स्थित है। यहां के लोग भगवान महाकाल को अपना राजा मानते हैं। हर साल भगवान महाकाल सावन व भादौ के महीने में पालकी में सवार होकर जनता का हाल-चाल जानने के लिए निकलते हैं। ऐसी कई अनोखी परंपराएं यहां प्रचलित हैं। भगवान महाकाल के अद्भुत श्रृंगार भक्तों का मन मोह लेते हैं। आप भी देखिए भगवान महाकाल के विभिन्न श्रृंगारों की तस्वीरें-
1- ये है भगवान महाकाल के अद्र्धनारीश्वर रूप का श्रृंगार।






Source: धर्म डेस्क. उज्जैन
 2- ये है भगवान महाकाल के भांग श्रृंगार का अनोखी रूप।







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 3- इस तस्वीर में बाबा महाकाल घटाटोप श्रृंगार में दिखाई दे रहे हैं।







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4- भगवान महाकाल का शिव तांडव श्रृंगार भक्तों का मन मोह लेता है।





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5- केसर-चंदन श्रृंगार में भगवान महाकाल का अद्भुत रूप दिखाई देता है।





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 6- ये है भगवान महाकाल का रुद्र श्रृंगार।






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 7- इस फोटो में भगवान महाकाल सेहरा श्रृंगार में दिखाई दे रहे हैं। बाबा महाकाल का ये श्रृंगार साल में सिर्फ एक बार महाशिवरात्रि के दिन किया जाता है।

Source: धर्म डेस्क. उज्जैन