बुधवार, 23 अगस्त 2017

इंटरनेट दिवस : सावधानी बरतने का संकल्प

इंटरनेट की बदौलत इतनी बड़ी दुनिया एक छोटी दुनिया में बदल चुकी है। आज दुनिया में ४ अरब के लगभग लोग इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे हैं। ये आंकड़ा दुनिया की कुल आबादी का 51% से कुछ ज्यादा है। जबकि हमारे देश में ये आंकड़ा 4 करोड़ से ज्यादा ही है, 2016 में भारत में सब्सक्राइबर्स की संख्या मात्रा 39.15 करोड थी। पर आज भारत में लगभग हर किसी के पास स्मार्टफोन हैं जिसके जरिए वह पूरी दुनिया से जुड़ सकता है। एक आंकड़े के मुताबिक दुनिया में हर सेकेंड 30 लाख से ज्यादा मेल भेजे जाते हैं यानि आज के दौर में बिना इंटरनेट के सुचना का आदान प्रदान संभव ही नहीं। 

भारत में इंटरनेट का इतिहास 1986 में नैशनल रिसर्च नेटवर्क के लॉन्च के साथ शुरू हुई , जिसमे नेटवर्क को केवल शिक्षा और रिसर्च के लिए ही उपलब्ध कराया गया था। भारत सरकार और यूनाइटेड नेशन डेवलेपमेंट प्रोग्राम के सपोर्ट और आर्थिक सहायता के साथ ही इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग ने नेटवर्क शुरू किया , जिसके बाद NICNet की शुरुआत 1988 में हुई। 15 अगस्त 1995 के दिन भारत की विदेश संचार निगम लिमिटेड ने भारत में आम जनता के लिए आधिकारिक तौर इंटरनेट को लॉन्च किया। तभी से वर्ल्ड वाइड वेब हमारी जिंदगी का एक हिस्सा बन गया, आज लगभग सभी के हाथ में मोबाइल फ़ोन का उपयोग हो रहा है।

समय के साथ इंटरनेट का उपयोग तेजी से बढ़ता जा रहा है , जिसके कारन इसकी सुविधा उपलब्ध करने वाली कंपनियों में होड़ मची हुई है। भारत में सबसे कम स्पीड 9.6 kbps के लिए वीएसएनएल को 5000 रुपये चुकाने पड़ते थे, जबकि अधिक स्पीड 128 kbps के लिए 30 लाख रुपये चुकाने पड़ते थे। आज उससे भी अधिक स्पीड के इंटरनेट की सेवाएं फ्री में मिल रही हैं। अब तक विडियो गेम्स, पॉर्न एडिक्ट, सोशल साइट एडिक्ट की बातें कहीं जा रही थीं । 'ब्लू व्हेल गेम' ने भी इंटरनेट में सक्रिय सैकड़ों किशोरों को मौत के मुँह में जाने को मजबूर किया है। पर वैज्ञानिक यह भी  मानते हैं कि इंटरनेट का ज्यादा इस्तेमाल दिमाग के एक खास हिस्से पर असर डालता है, जिसकी वजह से लोग मानसिक बीमारी के भी शिकार हो सकते हैं।

फिर भी इंटरनेट आज हर कोई यूज कर रहा है, चाहे जॉब की मजबूरी की वजह से या फिर मनोरंजन के लिए। इन समस्याओ से बचने के लिए विश्व भर में आज का दिन 'इंटरनेट सेल्फ केयर डे' के रूप में मनाया जा रहा है। आज का दिन यह संकल्प लेने का दिन है की इंटरनेट को हम सुविधा के तौर पर ही उपयोग करेंगे, किसी भी तौर पर इसे अपने जीवन पर हावी नहीं होने देंगे। हम अपने बच्चों को भी इनकी लत नहीं पड़ने देंगे और अधिक से अधिक लोगों को जागरूक करेंगे कि वे इंटरनेट का सीमित उपयोग करें। 

मंगलवार, 22 अगस्त 2017

ब्लू व्हेल गेम चैलेन्ज : गत्यात्मक ज्योतिष की दृष्टि

हाल के दिनों में सेल्फ डिस्ट्रक्टिव ब्लू व्हेल चैलेंज एक नई मुसीबत बनकर सामने आया है। तमाम प्रयासों के बाद भी यह ना सिर्फ सरकार के लिए बल्कि शिक्षण संस्थानों के लिए भी एक चुनौती बना हुआ है। इसके लिए आईटी मंत्रालय से लेकर सीबीएसई बोर्ड ने सर्कुलर जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि इसे रोकने के हरसंभव प्रयास किए जाए। इस गेम को खेलते हुए अभी तक दुनिया भर में 200 से ज्यादा लोग अपनी जान दे चुके हैं। अब हमारे देश में भी कई बच्चे इसे खेलते खेलते जान दे रहे हैं।


कई यूजर्स ऑऩलाइन इस गेम को सर्च कर रहे हैं. सोशल मीडिया साइट्स पर ढूंढ रहे हैं, यहां तक कि इससे जुड़े एप्स भी ढूंढ रहे हैं। पर ये सनकी गेम डाउनलोड नहीं किया जा सकता है। भारत में सरकार ने गूगल और फेसबुक से इस गेम के लिंक बैन करने को कहा है, लेकिन ये इतना आसान नहीं है, सोशल मीडिया साइट पर ये गेम टास्क के रूप में आता है, इस चैलेंज को न स्वीकारे। कोई आपको ऐसा मैसेज कर रहा है तो उसकी फॉरन रिपोर्ट करें।


सीबीएसई का कहना है कि छात्रों द्वारा इंटरनेट की सही और सुरक्षित उपयोगिता का ध्यान प्रबंधन द्वारा रखा जाए। छात्र इंटरनेट पर दुर्व्यवहार, साइबर बुलिंग, धोखाधड़ी का शिकार न हो, इस पर विशेष ध्यान देने को कहा है। छात्र फर्जी मेल आईडी न बनाए या शैक्षणिक उद्देश्य के इतर अन्य कार्यों के लिए इंटरनेट का प्रयोग न करें। अगर आपकी जान पहचान का कोई ऐसा इंसान है जो डिप्रेशन में रहता है, सोशल मीडिया का ज्यादा इस्तेमाल करता है, उम्र के हिसाब से टीनएज में है तो उसे इस गेम के बारे में सचेत करें ताकि वो इस तरह के किसी भी गेम से न जुड़ पाएं।

'गत्यात्मक ज्योतिष' के हिसाब से ....... 
उन अभिभावकों को सचेत रहना चाहिए , जिनके बच्चों का जन्म अप्रैल १९९७ से लेकर मार्च २००० के मध्य  हुआ है , खासकर जिन बच्चों का जन्म मार्च १९९८ से मार्च १९९९ के मध्य हुआ हो, उसके क्रियाकलापों पर अवश्य ध्यान दें। खासकर यदि बच्चे का जन्म निम्न समयावधि में हुआ हो तो अभिभावकों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता है ....... 
१. १९९७ में १ जनवरी से १० जनवरी, २० अप्रैल से ६ मई , २३ अगस्त से ७ सितम्बर, १३ दिसम्बर से २४ दिसंबर। 
२. १९९८ में २ अप्रैल से १७ अप्रैल, ६ अगस्त से २१ अगस्त, २६ नवंबर से ८ दिसंबर। 
३. १९९९ में १५ मार्च से ३० मार्च, १८ जुलाई से ३ अगस्त, १० नवंबर से २२ नवंबर। 
४. २००० में २६ फ़रवरी से १२ मार्च, २९ जून से १५ जुलाई, २४ अक्टूबर से ५ नवंबर। 
५. २००१ में ९ फ़रवरी से २१ फ़रवरी, ९ जून से २४ जून, ६ अक्टूबर से १९ अक्टूबर। 

सोमवार, 21 अगस्त 2017

गणेश चतुर्थी या विनायक चतुर्थी विशेष


भारत त्योहारों का देश है और गणेश चतुर्थी उन्हीं त्योहारों में से एक है जिसे 10 दिनों तक बड़ी ही धूम-धाम से मनाया जाता है।  भारत में भगवान गणेश के जन्मदिन के इस उत्सव को उनके भक्त बेहद ही उत्साह के साथ मनाते हैं।  वैसे भी भारत में  नए या अच्छे काम की शुरूआत करने से पहले भगवान गणेश का पूजन किया जाना शुभ माना जाता है।  हिन्दू कैलेंडर के अनुसार गणेश चतुर्थी का पर्व भाद्रपद महीने में आता है यानि कि  हर साल यह त्योहार अगस्त या सितंबर के महीने पड़ता है। गणेश चतुर्थी का त्योहार 10 दिनों तक चलता है, ऐसा माना जाता है विर्सजन के बाद वह अपने माता-पिता देवी पार्वती और भगवान शिव के पास लौट जाते हैं।  इस साल गणेश चतुर्थी का यह पर्व 25 अगस्त से शुरू होकर 5 सितंबर तक चलेगा।  इन दिनों भगवान गणेश भक्त उन्हें हर रोज नए-नए पकवान और मिठाईयों का भोग लगाते हैं।

गणेश चतुर्थी या विनायक चतुर्थी का त्यौहार शुक्रवार, 25 अगस्त 2017 को देश-विदेश में रहने वाले हिन्दू लोगों द्वारा मनाया जाएगा। यह शुक्ल चतुर्थी से शुरू होकर अनंत चतुर्दशी पर समाप्त होगी । गणपति स्थापना और गणपति पूजा मुहूर्तऐसा माना जाता है कि भगवान गणेश का जन्म मध्याह्न काल के दौरान हुआ था इसीलिए मध्याह्न के समय को गणेश पूजा के लिये ज्यादा उपयुक्त माना जाता है। पहले भारतवर्ष में गणेश चतुर्थी भगवान गणेश के जन्म दिन के रूप में पुरे हिंदू समुदाय के द्वारा एक साथ पूरी श्रद्धा और समर्पण के साथ प्रतिवर्ष मनाया जाता था  । आजकल यह हिंदू समुदाय के लोगों द्वारा पूरी दुनिया में मनाया जाता है।

गणेश चतुर्थी का त्योहार आने से दो-तीन महीने पहले ही कारीगर भगवान गणेश की मिट्टी की मूर्तियां बनाना शुरू कर देते हैं। गणेश चतुर्थी वाले दिन लोग इन मूर्तियों को अपने घर लाते हैं. कई जगहों पर 10 दिनों तक पंडाल सजे हुए दिखाई देते हैं जहां गणेश जी की मूर्ति स्थापित होती हैं।  प्रत्येक पंडाल में एक पुजारी होता है जो इस दौरान चार विधियों के साथ पूजा करते हैं।  अनन्त चतुर्दशी के दिन श्रद्धालु-जन बड़े ही धूम-धाम के साथ सड़क पर जुलूस निकालते हुए भगवान गणेश की प्रतिमा का सरोवर, झील, नदी इत्यादि में विसर्जन करते हैं।विसर्जन के दौरान उनके भक्त ''गणपति बप्पा मोरया, पुग्चा वर्षा लोकर या" जिसका मतबल है गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ।

गणेश चतुर्थी के दिन चन्द्र-दर्शन वर्ज्य होता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन चन्द्र के दर्शन करने से मिथ्या दोष अथवा मिथ्या कलंक लगता है जिसकी वजह से दर्शनार्थी को कोई झूठा आरोप सहना पड़ता है। पौराणिक गाथाओं के अनुसार, भगवान कृष्ण पर स्यमन्तक नाम की कीमती मणि चोरी करने का झूठा आरोप लगा था। माना जाता है कि भगवान कृष्ण ने भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के दिन चन्द्रमा को देखा था जिसकी वजह से उन्हें मिथ्या दोष का श्राप लगा था । भगवान गणेश ने चन्द्र देव को श्राप दिया था कि जो व्यक्ति भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के दौरान चन्द्र के दर्शन करेगा वह मिथ्या दोष से अभिशापित हो जायेगा और झूठे आरोप से कलंकित हो जायेगा। मिथ्या दोष से मुक्ति के लिये गणेश चतुर्थी का व्रत कर चन्द्रमा को फल, फूल, दही का भोग लगाकर या हाथ में कोई फल लेकर चंद्र-दर्शन की परम्परा अनेक जगहों पर है।



रविवार, 20 अगस्त 2017

बाढ़ की भयावहता

कई फ़ोन आये बिहार और अन्य बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से, कबतक झेलना होगा हमें यह सब। अखबार में भी पढ़ने को मिला ....... 
बिहार में बाढ़ के कारण अब तक 17 ज़िलों के एक करोड़ से ज़्यादा लोग बाढ़ से प्रभावित हो चुके हैं. बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 153 तक पहुंच चुकी है.
 की अधिकतर नदियों का जलस्तर कम तो हो रहा है, लेकिन हफ्तेभर से बेहाल बाढ़ पी़डि़तों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। राज्य के 18 जिलों में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। हाल ही में बहादुरगंज-अररिया मार्ग का एक वीडियो सामने आया है। इस मार्ग पर बना एक पुल बाढ़ से बह गया और उसे पार कर रहे मां-बेटी की मौत हो गई, जबकि तीसरे व्यक्ति को बचा लिया गया। इस वीडियो को यूट्यूब पर अब तक साढ़े चार लाख बार देखा जा चुका है।





दरभंगा-समस्तीपुर रेलखंड पर ट्रेनों का परिचालन बंद कर दिया गया है. हायाघाट स्टेशन से पहले मुंडा रेल पुल पर बागमती नदी के पानी का दवाब अत्यधिक हो जाने की वजह से रेलवे में यह निर्णय लिया है. इस वजह से अमृतसर जाने वाली जननायक एक्सप्रेस रद्द कर दी गयी है. सियालदाह जाने वाली गंगा सागर तथा नयी दिल्ली जाने वाली स्वतंत्रता सेनानी सुपरफास्ट एक्सप्रेस वाया सीतामढ़ी मुजफ्फरपुर जा
उत्तर प्रदेश के पूर्वी इलाकों में कहर बरपा रही बाढ़ और वर्षाजनित हादसों में 40 से अधिक लोगों की मृत्यु हुई है। राज्य सरकार के आंकड़ों के मुताबिक बाढ़ से 22 जिलों के 3000 से अधिक गांव प्रभावित हैं। बाढ़ की वजह से 40 से अधिक लोगों की जान गई है और एक लाख से ज्यादा मवेशी प्रभावित हुए हैं। मवेशियों के मरने की स्पष्ट संख्या की जानकारी तो नहीं दी गई है लेकिन एक अनुमान के तहत सैंकड़ों मवेशियों की जान गई है। बाढ़ की वजह से 15 लाख से अधिक आबादी प्रभावित है। डेढ़ लाख हैक्टेयर से ज्यादा खेतों में खड़ी फसल बर्बाद हो गई।
बिहार के 15 जिले बाढ़ की चपेट में हैं. पटना के आस-पास की नदियों का जल स्तर काफी बढ़ा हुआ है. पटना के जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों को अलर्ट रहने का निर्देश दिया है. वहीं, मौसम विभाग की ओर से जारी अलर्ट के मुताबिक बिहार में भारी बारिश की संभावना भी जतायी गयी है. अगले 24 घंटे के मौसम पूर्वानुमान में पटना, गया, भागलपुर एवं पूर्णिया में आम तौर पर बादल छाये रहने के साथ बारिश अथवा गरज के साथ छीटें पड़ने की संभावना जतायी गयी है. बिहार में पिछले 24 घंटे के दौरान दक्षिण पश्चिम मानसून के सक्रिय रहने के साथ प्रदेश के कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने के साथ उत्तर पश्चिम एवं दक्षिण पश्चिम इलाकों में एक अथवा कई स्थानों पर भारी वर्षा रिकार्ड की गयी.
बाढ़ से सम्बंधित उपरोक्त खबर वेब समाचार पत्रों की खबर है जिनके लिंक भी बनाये गए है, पर शायद ही आपको मालूम होगा कि १३ से २६ अक्टूबर के दौरान होने वाले मूसलाधार बारिश और अन्य प्रकार की प्राकृतिक घटनाओ की भविष्यवाणी फेसबुक पर मेरे पिताजी श्री विद्या सागर महथा जी के द्वारा की जा चुकी थी, इस लिंक पर क्लिक करें ....... 
उपरोक्त तिथियों के अलावा, 13 अगस्त से 26 अगस्त तक कुछ स्थानों में अविस्मरणीय मूसलाधार वर्षा हो सकती है तथा 25-26 अगस्त के आसपास कोई प्राकृतिक आपदा जैसे भूकंप, भूस्खलन या कोई अन्य तरह की दुर्घटना आदि की भी संभावना दिखती हैI

यानि निष्कर्ष के तौर पर स्पष्ट है २७ अगस्त से धीरे धीरे बाढ़ की भयावहता समाप्त हो जाएगी, जैसा की ग्रह-योग इशारा कर रहे हैं। पर अभी भी एक सप्ताह का समय और बाकि है , समझ में नहीं आता कैसे काटेंगे लोग इस विपत्ति भरे समय को ?